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मोतिहारी। बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद आता हसनैन ने कहा कि सीमा पर देश की रक्षा में तैनात जवानों के परिवारों का सम्मान और उनकी सुविधाओं का ख्याल रखना पूरे समाज की जिम्मेदारी है। सैनिकों को यह भरोसा होना चाहिए कि वे देश की रक्षा करते हुए सीमा पर रहें या अपना सर्वोच्च बलिदान दें, उनका परिवार अकेला नहीं है और देश उसकी सुरक्षा एवं सम्मान के लिए खड़ा रहेगा। राज्यपाल बुधवार को मोतिहारी स्थित महात्मा गांधी प्रेक्षागृह में कृषि, पशुपालन एवं मात्स्यिकी उद्यमी मेला के तहत आयोजित ‘जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान सम्मेलन’ में सैन्य एवं अर्धसैनिक सेवा से जुड़े परिवारों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसी भी युद्ध में सेना और समाज का समन्वय ही विजय का आधार बनता है। जिस दिन कोई युवा सैन्य सेवा का चुनाव करता है, उसी दिन वह देश की रक्षा के लिए प्राणोत्सर्ग के संकल्प के साथ आगे बढ़ता है। सैनिकों के लिए तीन करोड़ का संग्रहालय, महिला छात्रावास का भी शिलान्यास राज्यपाल ने इस अवसर पर सांसद निधि से निर्मित सैन्य कैंटीन का उद्घाटन किया। साथ ही तीन करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले सैन्य संग्रहालय और दो करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले महिला छात्रावास का शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि पूर्वी चंपारण में करीब सात हजार सेवानिवृत्त सैनिकों के परिवार रहते हैं। इनके सम्मान, कल्याण और सुविधाओं का ध्यान रखना समाज और प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। श्री हसनैन ने चंपारण की ऐतिहासिक धरती को नमन करते हुए कहा कि इसी मिट्टी ने नीलहे अंग्रेजों के खिलाफ सत्याग्रह के माध्यम से देश की आजादी का मार्ग प्रशस्त किया था। आज समय बदल चुका है और देश के विकास तथा सुरक्षा के लिए जवान, किसान और विज्ञान के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है। 80 से अधिक देशों को रक्षा उत्पाद निर्यात कर रहा भारत : राधा मोहन सिंह रक्षा संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष, पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री एवं सांसद राधा मोहन सिंह ने कहा कि भारत केवल शांति का उपासक नहीं है, बल्कि अपनी रक्षा करने का सामर्थ्य भी रखता है। उन्होंने कहा कि पहले भारत रक्षा उपकरणों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर था, लेकिन अब देश 80 से अधिक देशों को रक्षा उत्पादों का निर्यात कर रहा है। उन्होंने कहा कि सामरिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है और करीब 75 प्रतिशत रक्षा उत्पादों का स्वदेशीकरण हो चुका है। अपने सामर्थ्य के बल पर भारत ने अपनी सामरिक क्षमता का विस्तार किया है। यह आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती ताकत का प्रमाण है।



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