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रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी)-झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) परीक्षा विवाद को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच सीआईडी ने 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच में बड़ी कार्रवाई करते हुए जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को गिरफ्तार कर लिया है जबकि पूर्व सदस्य अजिता भट्टाचार्य से पूछताछ के साथ कथित दो करोड़ रुपये के लेन-देन और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। छात्र आंदोलन के बीच पूर्व चेयरमैन पर बड़ा एक्शन झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच जेपीएससी के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी को अहम कार्रवाई माना जा रहा है। अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम और परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही है। इसी जांच के दौरान पूर्व चेयरमैन की भूमिका भी एजेंसी के दायरे में आई थी। छात्र इस परीक्षा के परिणाम को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं और कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष तथा उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। पूर्व सदस्य अजिता भट्टाचार्य से भी पूछताछ जांच केवल पूर्व चेयरमैन तक सीमित नहीं है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जेपीएससी की पूर्व सदस्य अजिता भट्टाचार्य से भी पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसी परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका के साथ उन परिस्थितियों को समझने की कोशिश कर रही है, जिनके कारण कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए। पहले घर और दूसरे ठिकानों पर हुई थी छापेमारी एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी अचानक हुई कार्रवाई नहीं है। इससे पहले जांच एजेंसी उनके आवास समेत उनसे जुड़े अन्य ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी थी। जांच के दौरान परीक्षा से जुड़े दस्तावेज और कथित गड़बड़ियों से संबंधित विभिन्न जानकारियां जुटाई गई थीं। सीआईडी ने जेपीएससी मुख्यालय में भी छापेमारी की थी और अधिकारियों-कर्मचारियों से पूछताछ के साथ दस्तावेजों की जांच की जा रही थी। कथित 2 करोड़ रुपये का लेन-देन भी जांच के घेरे में मामले में एक और गंभीर पहलू कथित वित्तीय लेन-देन का सामने आया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान करीब दो करोड़ रुपये के कथित लेन-देन से जुड़ी जानकारी सामने आने की बात कही गई है। हालांकि, इस कथित लेन-देन को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में दो करोड़ रुपये के लेन-देन से जुड़े आरोप की अंतिम पुष्टि जांच के निष्कर्ष के बाद ही हो सकेगी। सीआईडी कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय लेन-देन की कड़ियों के साथ यह भी पता लगाने में जुटी है कि यदि कोई लेन-देन हुआ तो उसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। कैसे हुई कथित गड़बड़ी, अब इसकी कड़ियां जोड़ रही सीआईडी पूर्व चेयरमैन की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है। एजेंसी के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताएं किस स्तर पर और कैसे हुईं। इसके लिए परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोगों की भूमिका, दस्तावेज, फैसलों और कथित वित्तीय लेन-देन की कड़ियों की जांच की जा रही है। जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि कथित गड़बड़ी में कौन-कौन शामिल था और जिम्मेदारी किस स्तर तक जाती है। विवाद के बीच दिया था चेयरमैन पद से इस्तीफा श्री एल. खियांग्ते ने हाल ही में जेपीएससी के चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने अपना इस्तीफा ई-मेल के माध्यम से राजभवन भेजा था। उनका इस्तीफा ऐसे समय में आया था, जब 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को लेकर विवाद तेज था और छात्र सड़कों पर आंदोलन कर रहे थे। अब इस्तीफे के बाद उनकी गिरफ्तारी ने पूरे परीक्षा विवाद को नया मोड़ दे दिया है। छात्र लगातार मांग रहे निष्पक्ष जांच जेपीएससी और जेएसएससी समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों की प्रमुख मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, कथित गड़बड़ियों के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। इसके साथ ही छात्र भर्ती परीक्षाओं की पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की मांग भी कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह के विवाद पैदा न हों। कौन हैं एल. खियांग्ते लालबियाक्तलुआंगा खियांग्ते यानी एल. खियांग्ते झारखंड कैडर के 1988 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनका जन्म 26 अक्टूबर 1964 को हुआ और उन्होंने इतिहास विषय से स्नातक की पढ़ाई की है। अपने लंबे प्रशासनिक करियर में उन्होंने झारखंड सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। श्री खियांग्ते 6 दिसंबर 2023 से 31 अक्टूबर 2024 तक झारखंड के मुख्य सचिव भी रहे। इसके अलावा वह अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव जैसे वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं। उन्होंने महानिदेशक और परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारी भी संभाली है। अपने प्रशासनिक करियर में वह जिला कलेक्टर एवं मजिस्ट्रेट, डिप्टी कमिश्नर, एसडीओ और डिप्टी डेवलपमेंट कमिश्नर जैसे पदों पर भी रहे।



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