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तेहरान। दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित जहाजरानी के लिए दोबारा खोलने की दिशा में ईरान और ओमान ने चरणबद्ध ढांचे पर सहमति जताई है, लेकिन तेहरान ने साफ कर दिया है कि यह समझौता जलडमरूमध्य को तत्काल खोलने की घोषणा नहीं है और अमेरिका के अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करने तथा ईरान की सुरक्षा चिंताओं का समाधान होने तक रास्ता बंद रहेगा। ईरान और ओमान के संयुक्त बयान के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था में एक अस्थायी संयुक्त नौवहन गलियारा बनाने, जलडमरूमध्य से बारूदी सुरंगें हटाने और भविष्य में स्थायी मार्ग तथा उसके प्रबंधन पर तकनीकी बातचीत जारी रखने की योजना शामिल है। ईरान-ओमान ने तैयार किया तीन स्तर वाला खाका तस्नीम की रिपोर्ट के मुताबिक, ओमान के विदेश मंत्री सैयद बद्र बिन हमद अल बुसैदी ने ईरान की यात्रा के दौरान अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से बातचीत की। दोनों देशों ने मौजूदा तनाव और हालिया युद्ध के प्रभावों को देखते हुए सुरक्षित नौवहन बहाल करने के लिए एक व्यावहारिक और चरणबद्ध व्यवस्था पर चर्चा की। इस ढांचे में तीन प्रमुख कदम होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थायी संयुक्त नौवहन गलियारा बनाना, बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए संयुक्त अभियान चलाना और स्थायी समुद्री मार्ग, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा सेवाओं और भविष्य के प्रशासन पर बातचीत करना प्रस्तावित हैं। दोनों पक्षों ने फारस की खाड़ी से लगे क्षेत्रीय देशों के साथ भी चर्चा की जरूरत बताई है। सहमति हुई, मगर जलडमरूमध्य अभी नहीं खुलेगा ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया कि ओमान के साथ बनी समझ अपने आप में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने का फैसला नहीं है। उनका कहना है कि जलडमरूमध्य अभी भी बंद है और उस पर ईरानी सशस्त्र बलों की निगरानी तथा नियंत्रण बना हुआ है। ईरान की ओर से तय व्यवस्थाएं, सुरक्षा शर्तें और राजनीतिक मांगें स्वीकार होने के बाद ही इसे खोलने पर विचार किया जाएगा। 45 दिनों से चल रही थी पर्दे के पीछे बातचीत ईरानी अधिकारी के मुताबिक, तेहरान और मस्कट के बीच पिछले करीब 45 दिनों से वाणिज्यिक जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग बनाने पर बातचीत चल रही थी। ईरान का कहना है कि वह और ओमान होर्मुज जलडमरूमध्य से सीधे जुड़े दो तटीय देश हैं, इसलिए इसके दीर्घकालीन प्रबंधन में दोनों की भूमिका जरूरी है। तेहरान ने दावा किया कि हालिया युद्ध और सुरक्षा परिस्थितियों ने पुराने नौवहन प्रबंध में बदलाव की जरूरत पैदा कर दी है। कैसा होगा नया अस्थायी समुद्री रास्ता ईरान की ओर से पेश योजना के मुताबिक, फारस की खाड़ी में प्रवेश करने वाले जहाज ईरानी जलक्षेत्र से गुजरेंगे। खाड़ी से बाहर जाने वाले जहाज शुरुआत में ओमान के जलक्षेत्र का इस्तेमाल करेंगे और उसके बाद ईरानी जलक्षेत्र से आगे बढ़ेंगे। श्री गरीबाबादी ने इसे करीब सात समुद्री मील लंबे दोतरफा राजमार्ग जैसा बताया है। उनके अनुसार, यह पुरानी व्यवस्था की तरह उत्तर और दक्षिण में अलग-अलग मार्गों वाली प्रणाली नहीं होगी। 30 से 60 दिनों में स्थायी मार्ग पर बातचीत ईरान का कहना है कि प्रस्तावित रास्ता अस्थायी होगा। यदि इस अस्थायी गलियारे पर सहमति बनती है, तो ईरान और ओमान के पास नया स्थायी नौवहन मार्ग तैयार करने के लिए 30 से 60 दिन होंगे। इसी अवधि में भविष्य के प्रबंधन, सूचनाओं के आदान-प्रदान, यातायात नियंत्रण और सुरक्षा सेवाओं से जुड़े नियम तय किए जा सकते हैं। अमेरिका के ‘दक्षिणी मार्ग’ पर ईरान को आपत्ति ईरान ने अमेरिका पर जलडमरूमध्य के दक्षिणी हिस्से में एक कथित अवैध मार्ग बनाने का आरोप लगाया है। तेहरान का दावा है कि यह व्यवस्था पूर्व में हुए इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन का उल्लंघन है। ईरान ने चेतावनी दी कि यह दक्षिणी मार्ग तनाव बढ़ा सकता है और क्षेत्र में नए सैन्य टकराव की वजह बन सकता है। श्री गरीबाबादी के अनुसार, नई समझ के तहत पहले कदम के तौर पर इस दक्षिणी मार्ग को बंद किया जाएगा और इसकी सूचना अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन को दी जाएगी। सिर्फ कारोबारी जहाजों के लिए होगी व्यवस्था ईरान ने साफ किया है कि प्रस्तावित समझौता केवल वाणिज्यिक जहाजों पर लागू होगा। तेहरान के मुताबिक, किसी सैन्य जहाज को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इससे स्पष्ट है कि ईरान समुद्री व्यापार को सीमित राहत देने के साथ सुरक्षा नियंत्रण अपने हाथ में रखना चाहता है। अमेरिका के सामने ईरान की बड़ी शर्तें ईरान ने जलडमरूमध्य दोबारा खोलने के लिए केवल समुद्री सुरक्षा से जुड़ी नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक शर्तें भी रखी हैं। तेहरान की प्रमुख मांगों में आर्थिक नाकाबंदी पूरी तरह हटाना, सभी मोर्चों पर युद्ध का स्थायी अंत, लेबनान से जुड़े संघर्ष का समाधान, यमन की नाकाबंदी की स्थिति स्पष्ट करना, ईरान को धमकी न देने की गारंटी और ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई से परहेज शामिल हैं। श्री गरीबाबादी ने कहा कि अमेरिका को पहले अपनी प्रतिबद्धताओं पर अमल करके ईरान का भरोसा जीतना होगा, हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि तेहरान को वाशिंगटन पर भरोसा नहीं है। ईरान ने क्यों बदली पुरानी समुद्री व्यवस्था ईरानी उप विदेश मंत्री के मुताबिक, वर्ष 1968 से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही मुख्य रूप से ओमान की ओर से होती रही है, जिससे ईरान को नुकसान हुआ। तेहरान अब नई सुरक्षा परिस्थितियों में ऐसा रास्ता चाहता है, जिसमें ईरानी जलक्षेत्र की भूमिका बढ़े और जलडमरूमध्य के संचालन में उसकी सुरक्षा चिंताओं को प्राथमिकता मिले। ईरान ने होर्मुज को अब केवल व्यापारिक मार्ग नहीं, बल्कि अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बताया है। सेना और आईआरजीसी भी बातचीत में शामिल होर्मुज के नए मार्ग पर बातचीत केवल विदेश मंत्रालय तक सीमित नहीं है। ईरानी पक्ष की संयुक्त कार्यसमिति में विदेश मंत्रालय के साथ इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स, सशस्त्र बलों का जनरल स्टाफ और नौसेना भी शामिल हैं। ईरान ने कहा है कि मार्ग के नक्शे उसकी सेना ने तैयार किए हैं, क्योंकि यह केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि तकनीकी और सुरक्षा से जुड़ा मामला है।