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पटना। मानव तस्करी के खिलाफ ‘नया सवेरा’ 1.0 और 2.0 के बाद बिहार सरकार अब ‘नया सवेरा 3.0’ के जरिए अभियान को और व्यापक बनाने जा रही है, जिसमें तस्करी की रोकथाम और पीड़ितों की बरामदगी के साथ उनके पुनर्वास, कौशल विकास, रोजगार और सम्मानजनक जीवन को प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को पटना के ज्ञान भवन में गृह विभाग की ओर से आयोजित ‘गुमशुदा बच्चों और मानव तस्करी पर पूर्वी क्षेत्रीय सम्मेलन’ में सरकार की इस रणनीति की जानकारी दी। क्या है ‘नया सवेरा 3.0’ का लक्ष्य श्री चौधरी ने बताया कि ‘नया सवेरा 3.0’ के माध्यम से मानव तस्करी के खिलाफ जागरूकता, रोकथाम, बचाव और पुनर्वास से जुड़ी गतिविधियों को पहले से अधिक प्रभावी और व्यापक बनाया जाएगा। सरकार का जोर इस बात पर है कि मानव तस्करी से मुक्त कराए गए किसी व्यक्ति की कहानी केवल उसकी बरामदगी पर खत्म न हो। उसे सुरक्षित माहौल देने के साथ कौशल विकास और रोजगार से जोड़ा जाए, ताकि वह आत्मनिर्भर बन सके और सम्मान के साथ अपनी जिंदगी दोबारा शुरू कर सके। बरामदगी के बाद भी पीड़ितों का हाथ नहीं छोड़ेगी सरकार मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मानव तस्करी से मुक्त कराए गए लोगों को केवल राहत देना पर्याप्त नहीं है। सरकार का लक्ष्य पीड़ितों का पुनर्वास, स्किलिंग और रोजगार सुनिश्चित करना है। इसके पीछे कोशिश यह है कि आर्थिक मजबूरी के कारण पीड़ित दोबारा तस्करी के जाल में न फंसें और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। इसके लिए बिहार सरकार संबंधित राज्यों, पुलिस, प्रशासन, न्यायपालिका और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर काम करेगी। मानव तस्करी पर ‘जीरो टॉलरेंस’, तस्करों पर कठोर कार्रवाई श्री चौधरी ने कहा कि बिहार सरकार मानव तस्करी के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। मानव तस्करी की रोकथाम के साथ तस्करों के खिलाफ कठोर और त्वरित कार्रवाई सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बच्चों के लापता होने और मानव तस्करी को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि बच्चों और कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समन्वित कार्रवाई जरूरी है। रोजगार को बनाया जाएगा तस्करी के खिलाफ हथियार ‘नया सवेरा 3.0’ की सोच में रोजगार और कौशल विकास की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहने वाली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को स्थानीय स्तर पर सुरक्षित और वैध रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने से मानव तस्करी के जोखिम को कम किया जा सकता है।उन्होंने पलायन को भी मानव तस्करी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू बताया। सरकार का मानना है कि बिहार में उद्योग और रोजगार के अवसर बढ़ने से आर्थिक सशक्तीकरण होगा और पलायन में भी कमी आएगी। 1,200 से ज्यादा लापता बच्चों की हो चुकी बरामदगी श्री चौधरी ने बताया कि लापता बच्चों और व्यक्तियों से जुड़े मामलों में कार्रवाई तेज करने के लिए बिहार में रियल टाइम मॉनीटरिंग की व्यवस्था की गई है। इस व्यवस्था के तहत राज्य में अब तक 1,200 से अधिक लापता बच्चों की बरामदगी की जा चुकी है।राज्य में स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट का भी गठन किया गया है। मुख्यमंत्री ने पुलिस बल में महिलाओं की बड़ी भागीदारी का भी उल्लेख किया। 51 हजार करोड़ से ज्यादा के निवेश समझौते का भी जिक्र मुख्यमंत्री ने रोजगार बढ़ाने और पलायन कम करने की रणनीति का जिक्र करते हुए बताया कि हाल में विभिन्न स्टील उद्योग समूहों के साथ 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक के औद्योगिक निवेश के समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बिहार में ही रोजगार और बेहतर भविष्य के अवसर तैयार करना चाहती है, ताकि ‘कर्मभूमि से जन्मभूमि’ की ओर लौटने का वातावरण तैयार हो। उनका कहना था कि बिहार में प्रतिभा की कमी नहीं है, जरूरत राज्य की प्रतिभा को बेहतर शिक्षा, कौशल, रोजगार और अवसरों से जोड़ने की है। ‘सहयोग शिविर’ में छह लाख से ज्यादा आवेदन सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने राज्य में शिकायतों के निपटारे की व्यवस्था का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि लोगों की शिकायतों का 30 दिनों के भीतर निष्पादन करने के लिए आयोजित ‘सहयोग शिविर’ में अब तक छह लाख से अधिक आवेदन मिले हैं, जिनमें से 5.50 लाख से ज्यादा मामलों का निष्पादन किया जा चुका है। यदि किसी पीड़ित को अधिकारी स्तर पर न्याय नहीं मिलता या वह कार्रवाई से संतुष्ट नहीं होता है तो वह हर महीने के दूसरे मंगलवार को स्वयं ऐसे मामलों की सुनवाई करते हैं। पिछले ‘राज्यस्तरीय सहयोग कार्यक्रम’ में उनके सामने 129 आवेदन आए थे, जिनमें 100 आवेदकों से जुड़े मामलों का समाधान किया गया। कई राज्यों के बीच बेहतर तालमेल पर मंथन पूर्वी क्षेत्रीय सम्मेलन में लापता बच्चों की बरामदगी, मानव तस्करी की रोकथाम, पीड़ितों के पुनर्वास और राज्यों के बीच समन्वय मजबूत करने पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में मानव तस्करी के दुष्प्रभाव, बचाव और कार्रवाई से जुड़ी एक वीडियो फिल्म भी दिखाई गई।सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए. अमानुल्लाह , पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद , बिहार के महाधिवक्ता एस.डी. संजय , एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे और दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता समेत कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे।



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