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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट के संभावित असर के चलते चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में देश के विनिर्माण क्षेत्र की उत्पादन वृद्धि सुस्त रहने की आशंका है, हालांकि मजबूत घरेलू आर्थिक आधार के कारण उद्योग जगत का समग्र भरोसा अभी भी सकारात्मक बना हुआ है। वाणिज्य एवं उद्योग संगठन फिक्की की मंगलवार को जारी विनिर्माण सर्वेक्षण के अनुसार, उत्पादन को लेकर उद्योगों का भरोसा पिछली तिमाही के मुकाबले कमजोर हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में 93% कंपनियों ने उत्पादन स्तर को बेहतर या समान बताया था, लेकिन अप्रैल-जून तिमाही में यह आंकड़ा घटकर करीब 77% रह गया। मांग के मोर्चे पर भी नरमी देखने को मिली है। पहली तिमाही में 77% कंपनियों ने ऑर्डर अधिक या समान रहने की बात कही, जबकि पिछली तिमाही में यह आंकड़ा 89% था। फिक्की का यह सर्वेक्षण ऑटोमोबाइल, पूंजीगत वस्तुएं, रसायन, उर्वरक, फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीन टूल्स, धातु, वस्त्र और अन्य प्रमुख उद्योगों पर आधारित है। इसमें बड़े उद्योगों के साथ एमएसएमई इकाइयों ने भी हिस्सा लिया, जिनका कुल वार्षिक कारोबार 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। रोजगार के मोर्चे पर भी कुछ नरमी के संकेत मिले हैं। अगले तीन महीनों में 35% कंपनियां नई भर्ती की योजना बना रही हैं, जबकि पिछली तिमाही में यह आंकड़ा 41% था। ब्याज दरों में कोई खास बदलाव नहीं आया है। कंपनियों द्वारा चुकाई जा रही औसत ब्याज दर 8.9% रही और 90% से अधिक उद्योगों ने बताया कि उन्हें कार्यशील और दीर्घकालिक पूंजी के लिए बैंकों से पर्याप्त वित्त मिल रहा है। सर्वेक्षण में 63% कंपनियों ने कहा कि उन्हें कर्मचारियों की उपलब्धता में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन 37% उत्तरदाताओं ने कुशल श्रमिकों की कमी को बड़ी चुनौती बताया। उनका मानना है कि इस समस्या के समाधान के लिए सरकार और उद्योग दोनों को मिलकर प्रयास तेज करने होंगे। क्षमता उपयोग (कैपेसिटी यूटिलाइजेशन) 72% पर स्थिर बना हुआ है, जो पिछली तिमाही के बराबर है। अगले छह महीनों के लिए निवेश का माहौल भी स्थिर दिख रहा है। हालांकि, आयात शुल्क, व्यापार प्रतिबंध, मांग में अनिश्चितता, कच्चे माल की कमी, बढ़ती लॉजिस्टिक लागत और नियामकीय चुनौतियां उद्योगों की चिंता बढ़ा रही हैं। वहीं, निर्यात के मोर्चे पर राहत की खबर है। चौथी तिमाही 2025-26 में 61% कंपनियों ने निर्यात बेहतर या समान रहने की बात कही थी, जो पहली तिमाही 2026-27 में बढ़कर 74% हो गई। इससे संकेत मिलता है कि सरकार और उद्योग द्वारा निर्यात बाजारों के विविधीकरण की रणनीति सकारात्मक परिणाम दे रही है।