Full Story
पटना। बिहार की मिट्टी से निकले चार नाम, सिनेमा की चार अलग-अलग विधाएं और मंजिल एक- राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार; अभिनय में संजय मिश्रा , निर्देशन में कमलेश के. मिश्र , निर्माण में मिंटी मिश्रा और फिल्म समीक्षा में संजीव श्रीवास्तव 22 सितंबर को उस गौरवपूर्ण क्षण के गवाह बनेंगे, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में सम्मानित करेंगी। इन पुरस्कारों में अभिनय से लेकर फिल्म निर्माण और फिल्म समीक्षा तक बिहार की मौजूदगी दिखाई देगी। संजय मिश्रा को ‘भक्षक’ में अभिनय, कमलेश के. मिश्र और मिंटी मिश्रा को ऐतिहासिक फिल्म ‘काकोरी’ तथा संजीव श्रीवास्तव को हिंदी फिल्म समीक्षा के क्षेत्र में उनके काम के लिए सम्मानित किया जाएगा। ‘भक्षक’ ने दिलाया संजय मिश्रा को रजत कमल दरभंगा निवासी और हिंदी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता संजय मिश्रा को फिल्म ‘भक्षक’ में बेहतरीन अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का रजत कमल प्रदान किया जाएगा। ‘भक्षक’ की कहानी चर्चित मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड से प्रेरित है। फिल्म में संजय मिश्रा के अभिनय को अब राष्ट्रीय पुरस्कार से पहचान मिलने जा रही है। तीन दशक से अधिक समय से अभिनय की दुनिया में सक्रिय संजय मिश्रा ने वर्ष 1995 में ‘ओह डार्लिंग! ये है इंडिया!’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। अलग-अलग तरह के किरदारों में प्रभावशाली अभिनय उनकी पहचान रहा है। उन्हें ‘आंखों देखी’ और ‘वध’ में अभिनय के लिए दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवॉर्ड भी मिल चुका है। ‘काकोरी’ को राष्ट्रीय सम्मान, बिहार के दो नाम जुड़े राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में बिहार की एक और बड़ी उपलब्धि फिल्म ‘काकोरी’ के जरिए सामने आई है। गोपालगंज निवासी निर्देशक कमलेश के. मिश्र और निर्माता मिंटी मिश्रा को फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ जीवनीपरक/ऐतिहासिक पुनर्निर्माण/संकलन फिल्म का रजत कमल प्रदान किया जाएगा। देशभक्ति पर आधारित ‘काकोरी’ को 1925 के ऐतिहासिक काकोरी ट्रेन एक्शन के शताब्दी वर्ष पर काकोरी के अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि के रूप में समर्पित किया गया है। फिल्म में काकोरी की ऐतिहासिक घटना के साथ उससे जुड़े स्वतंत्रता सेनानियों के साहस, संकल्प और स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान को सामने लाने का प्रयास किया गया है। फिल्म के मुख्य निर्माता जसविंदर सिंह दिल्ली के हैं जबकि निर्माता मिंटी मिश्रा बिहार के गोपालगंज से आती हैं। फिल्म का निर्माण उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के सहयोग से किया गया है। कमलेश मिश्र के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार नया नहीं निर्देशक कमलेश के. मिश्र के लिए यह पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार नहीं है। उनकी फिल्म ‘मधुबनी: द स्टेशन ऑफ कलर्स’ को इससे पहले गैर-फीचर फिल्म श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ कथन का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुका है। कमलेश मिश्र की पहली निर्देशित फीचर फिल्म ‘आजमगढ़’ है, जिसमें पंकज त्रिपाठी ने मुख्य नकारात्मक भूमिका निभाई है। यह फिल्म आतंकवाद के विषय पर आधारित है। उनकी फिल्मों में इतिहास और शोध को प्रमुखता मिलती रही है। उन्होंने वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों पर ‘दिल्ली राइट्स- अ टेल ऑफ बर्न एंड ब्लेम’ नाम से डॉक्यूमेंट्री भी बनाई। उनकी पहली शॉर्ट फिल्म ‘किताब’ को भी वैश्विक स्तर पर पहचान मिली। ‘यह सिर्फ फिल्म का नहीं, इतिहास को ईमानदारी से सामने रखने का सम्मान’ ‘काकोरी’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने पर कमलेश के. मिश्र ने इसे व्यक्तिगत उपलब्धि से कहीं अधिक काकोरी के अमर बलिदानियों को मिली श्रद्धांजलि बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार केवल किसी फिल्म या फिल्मकार का सम्मान नहीं है बल्कि इतिहास, समाज और संवेदनाओं को ईमानदारी से सामने रखने वाले रचनात्मक प्रयास की राष्ट्रीय स्वीकृति भी है। उन्होंने कहा कि काकोरी रेल एक्शन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण पड़ाव था और फिल्म बनाने का उद्देश्य इस ऐतिहासिक घटना को उचित महत्व के साथ आज की पीढ़ी तक पहुंचाना था। उन्होंने निर्माता जसविंदर सिंह, मिंटी मिश्रा, उत्तर प्रदेश सरकार और फिल्म से जुड़े कलाकारों तथा तकनीशियनों का आभार जताते हुए पुरस्कार को पूरी टीम के सामूहिक प्रयास की सफलता बताया। मिंटी मिश्रा बोलीं—पूरी यात्रा को खास बना दिया इस पुरस्कार ने निर्माता मिंटी मिश्रा ने राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने पर कहा कि काकोरी जैसी ऐतिहासिक घटना पर बनी फिल्म का हिस्सा होना उनके लिए पहले ही महत्वपूर्ण अनुभव था और अब राष्ट्रीय सम्मान ने इस पूरी यात्रा को और खास बना दिया है। उन्होंने कहा कि काकोरी रेल एक्शन स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण अध्याय है और इसके क्रांतिकारियों के साहस, त्याग और बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि फिल्म के जरिए इतिहास की एक महत्वपूर्ण लेकिन अपेक्षाकृत कम चर्चित घटना को प्रमुखता से सामने लाने का प्रयास किया गया। फिल्म समीक्षा में भी बिहार की चमक, संजीव श्रीवास्तव को स्वर्ण कमल राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में बिहार की उपलब्धि केवल पर्दे और फिल्म निर्माण तक सीमित नहीं है। सीतामढ़ी निवासी पत्रकार, लेखक और फिल्म समीक्षक संजीव श्रीवास्तव को हिंदी में सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक का स्वर्ण कमल प्रदान किया जाएगा। श्री संजीव करीब ढाई दशक से दिल्ली में पत्रकारिता और फिल्मों पर लेखन कर रहे हैं। वह मुंबई में भी फिल्मों की रिपोर्टिंग कर चुके हैं। सिनेमा पर उनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इनमें ‘समय सिनेमा और इतिहास’, ‘सिनेमा की समानांतर दुनिया’ और ‘आपातकाल का सिनेमा’ प्रमुख हैं। राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने पर उन्होंने इसे अपने लिए गौरव का क्षण बताया और कहा कि बिहार की चार हस्तियों को एक साथ राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलना महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अभिनय, निर्देशन, निर्माण और समीक्षा—चार मोर्चों पर बिहार इस बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में बिहार से जुड़े नामों की खास बात उनके काम की विविधता भी है। संजय मिश्रा अभिनय, कमलेश के. मिश्र निर्देशन, मिंटी मिश्रा फिल्म निर्माण और संजीव श्रीवास्तव फिल्म समीक्षा के क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इनमें ‘भक्षक’ की कहानी का संबंध भी बिहार के मुजफ्फरपुर से है जबकि ‘काकोरी’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के ऐतिहासिक अध्याय को पर्दे पर लेकर आती है। अब 22 सितंबर को गुजरात के एकता नगर (केवाड़िया) में होने वाले 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में बिहार से जुड़ी इन चारों हस्तियों को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों सम्मान मिलने का इंतजार है।



Comments
0