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मुंबई। रोमांटिक और शहरी किरदारों से अलग ‘द रिवोल्यूशनरीज’ में स्वतंत्रता सेनानी सचिंद्रनाथ सान्याल बनने के लिए रोहित सराफ ने 15 महीने तक ऐसी कड़ी तैयारी की, जिसमें मांसपेशियां बनाने के लिए प्रतिदिन 3500 से ज्यादा कैलोरी लेने से लेकर शरीर को तराशने के अंतिम चरण में 1800 से कम कैलोरी पर आने और कलारीपयट्टू, लाठी, कुश्ती, मल्लखंब तथा एक्शन प्रशिक्षण तक का कठिन सफर शामिल रहा। रोमांटिक छवि से निकलकर बने क्रांतिकारी निखिल आडवाणी निर्देशित पीरियड ड्रामा सीरीज ‘द रिवोल्यूशनरीज’ में रोहित स्वतंत्रता सेनानी सचिंद्रनाथ सान्याल की भूमिका निभा रहे हैं। यह किरदार उनके अब तक के रोमांटिक और आधुनिक शहरी पात्रों से बिल्कुल अलग है। रोहित का मानना था कि सचिन के किरदार को विश्वसनीय बनाने के लिए सिर्फ मजबूत दिखाई देना पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें अपने भीतर ऐसी शारीरिक दृढ़ता विकसित करनी थी, जो कठिन परिस्थितियों को सहने की क्षमता के रूप में पर्दे पर स्वाभाविक रूप से दिखाई दे। शरीर में चाहिए थी संघर्ष सहने वाली मजबूती रोहित ने बताया कि उस दौर के युवा लगातार यात्रा करते, प्रशिक्षण लेते, छिपते और लड़ते थे। बेहद कम सुविधाओं के बावजूद वे अपने उद्देश्य से पीछे नहीं हटते थे। इसलिए वह केवल मांसपेशियों वाला शरीर नहीं, बल्कि संघर्ष और कठिनाइयां झेल सकने वाला व्यक्तित्व तैयार करना चाहते थे। उनके मुताबिक, यह मजबूती अभिनय के जरिए थोपी हुई नहीं दिखनी चाहिए थी। वह चाहते थे कि सचिन की सहनशक्ति उनके शरीर और चाल-ढाल में स्वाभाविक रूप से उतर आए। कलारी ने जमीन पर ला दिया फिटनेस का भ्रम किरदार की तैयारी के लिए रोहित ने स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, कंडीशनिंग, कलारीपयट्टू, एक्शन रिहर्सल, मूवमेंट ट्रेनिंग और डांस रिहर्सल का सहारा लिया। इस लंबे और कठिन कार्यक्रम के बीच उन्हें अपना मूल काम यानी अभिनय भी करना था। रोहित ने मजाकिया अंदाज में कहा, “सच कहूं तो कुछ समय के लिए मुझे लगा कि मैंने गलती से एथलीट बनने के लिए साइन अप कर लिया है!” उनके लिए सबसे मजेदार अहसास यह था कि जिम में भारी वजन उठा लेना कलारीपयट्टू में महारत की गारंटी नहीं है। उन्होंने कहा कि कलारी करते हुए जब व्यक्ति अचानक जमीन पर पहुंच जाता है, तब उसे अपनी फिटनेस को लेकर किए गए सारे दावे याद आने लगते हैं। जिम ने ताकत दी, कलारी ने फुर्ती हर तरह के प्रशिक्षण ने रोहित के शरीर और किरदार में अलग गुण जोड़ा। उनके अनुसार, जिम ने उन्हें आकार और ताकत दी, कलारीपयट्टू ने फुर्ती तथा नियंत्रण सिखाया और एक्शन ट्रेनिंग ने इन क्षमताओं का सही इस्तेमाल करना बताया। लगातार अभ्यास का परिणाम यह हुआ कि एक समय के बाद वह इन सभी तकनीकों के बारे में अलग-अलग सोचना बंद कर चुके थे। उनका शरीर अपने आप प्रतिक्रिया देने लगा था और रोहित अपनी तैयारी में इसी स्वाभाविकता तक पहुंचना चाहते थे। कभी खाना मुश्किल, कभी कैलोरी घटाना चुनौती रोहित के शारीरिक बदलाव का सबसे कठिन हिस्सा केवल व्यायाम नहीं, बल्कि भोजन भी था। मांसपेशियां बढ़ाने के दौर में उन्हें इतनी अधिक मात्रा में खाना पड़ता था कि कई बार अगला भोजन देखने तक का मन नहीं करता था। उनके मुताबिक, अधिक खाने की आदत बनने के बाद अचानक कैलोरी घटाने का निर्देश मिलना भी आसान नहीं था। पहले पेट भरा होने पर भी खाने का अगला डिब्बा इंतजार करता था और बाद में उसी शरीर को कम कैलोरी पर ढालना पड़ा। उन्होंने हंसते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में व्यक्ति कभी खुश नहीं रहता। बदलते शरीर ने बढ़ाया आत्मविश्वास कड़ी मेहनत के बाद शरीर में दिखाई देने वाला बदलाव रोहित के लिए प्रेरणा बन गया। हर कुछ सप्ताह में कपड़ों की फिटिंग बदलती थी और शरीर पर नई मांसपेशियां तथा स्ट्रिएशन दिखाई देने लगते थे। प्रशिक्षण की तस्वीरें देखकर उन्हें महसूस होता था कि मेहनत वास्तव में परिणाम दे रही है। इस बदलाव ने उनका आत्मविश्वास केवल अभिनेता के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के तौर पर भी बढ़ाया। वह उन शारीरिक गतिविधियों को करने में सक्षम महसूस करने लगे, जिन्हें पहले नहीं कर पाते थे। मजबूत शरीर ने खोला सचिन का भावुक पक्ष रोहित के लिए यह बदलाव केवल बाहरी नहीं था। जैसे-जैसे वह शारीरिक रूप से मजबूत होते गए, वैसे-वैसे सचिंद्रनाथ सान्याल के भावनात्मक व्यक्तित्व को लेकर उनकी समझ भी गहरी होती गई। शुरुआत में उन्हें लग सकता था कि एक क्रांतिकारी का अर्थ आक्रामक और बेहद कठोर व्यक्ति है। लेकिन सचिन के बारे में पढ़ने और किरदार पर काम करने के बाद उन्होंने जाना कि वह बहुत भावुक इंसान थे। रोहित के अनुसार, सचिन के भीतर डर, मासूमियत और भावनाएं भी मौजूद थीं, लेकिन वे उनके विश्वास को कमजोर नहीं करती थीं। अपने विचार के लिए पूरी जिंदगी बदल देने वाले उस विश्वास की कीमत जेल, हिंसा, परिवार से दूरी, नुकसान और क्रांति के रूप में चुकानी पड़ी। भावुक भी, सिद्धांतों पर अडिग भी रोहित को सचिन के व्यक्तित्व का यही विरोधाभास सबसे अधिक आकर्षित करता है। वह भावुक और कमजोर हो सकते थे, लेकिन सही और गलत का सवाल आने पर अपने विश्वास से पीछे नहीं हटते थे। यही समझ किरदार को केवल गुस्से और कठोरता तक सीमित रखने के बजाय उसे अधिक मानवीय तथा संवेदनशील बनाने में सहायक बनी। ‘बॉय-नेक्स्ट-डोर’ छवि तोड़ने का मिला मौका रोहित जानते थे कि दर्शकों ने उन्हें अब तक कुछ खास तरह के किरदारों में देखा है और सचिंद्रनाथ सान्याल ऐसा नाम नहीं था, जिसके साथ लोग उन्हें तुरंत जोड़ पाते। लेकिन अभिनेता के लिए यही चुनौती सबसे अधिक उत्साहित करने वाली थी। उन्होंने इसे अपनी ‘बॉय-नेक्स्ट-डोर’ छवि और टाइपकास्ट होने की सोच बदलने के अवसर के रूप में देखा। रोहित का कहना है कि अभिनेता के लिए कोई सीमा नहीं होती, बशर्ते उसे खुद पर विश्वास हो। निर्देशक की ओर से वही भरोसा मिलने पर यह अनुभव और खास हो जाता है। 15 महीने तक नहीं टूटा अनुशासन रोहित के प्रशिक्षक तेजस ललवानी के मुताबिक, अभिनेता ने 15 महीने की ट्रेनिंग के दौरान असाधारण अनुशासन दिखाया। वह हमेशा समय पर पहुंचते और अभ्यास में 10, 20 या 50 पुनरावृत्तियां मिलने पर बिना शिकायत उन्हें पूरा करते थे। मांसपेशियां बनाने के दौरान रोहित ने प्रतिदिन 3,500 से अधिक कैलोरी लीं, जबकि अंतिम चरण में उन्हें 1,800 से कम कैलोरी पर आना पड़ा। तेजस के अनुसार, इतनी कठिन प्रक्रिया के बावजूद उन्होंने कभी शिकायत नहीं की। अभिनेता के साथ जी रहे थे प्रतियोगी जैसी जिंदगी तेजस ने बताया कि रोहित एक तरह से पुरुष फिजीक प्रतियोगी का जीवन जी रहे थे, लेकिन उसके साथ अभिनेता की जिम्मेदारियां भी निभा रहे थे। भावनात्मक पटकथा पाठ, लंबे शूटिंग घंटे और रात की अनियमित शूटिंग के बीच उन्हें अलग-अलग विधाओं का अभ्यास करना पड़ता था। कलारीपयट्टू के साथ रोहित ने लाठी, कुश्ती, मल्लखंब और नृत्य का प्रशिक्षण भी लिया। शरीर को चरम स्थिति में लाने के दौरान कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा घटाई-बढ़ाई गई। यह उनका पहला अनुभव था, इसलिए शरीर की प्रतिक्रिया को लेकर अनिश्चितता थी, लेकिन प्रशिक्षक के अनुसार परिणाम उम्मीद से बेहतर रहा। परिवर्तन देखकर बढ़ाए गए बॉडी शॉट्स तेजस का कहना है कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने रोहित को सचिंद्रनाथ सान्याल में बदलते देखा। अभिनेता का शारीरिक परिवर्तन इतना प्रभावशाली रहा कि शुरुआत में जहां केवल एक-दो बॉडी शॉट्स की योजना थी, वहीं बाद में ऐसे दृश्यों की संख्या बढ़ा दी गई।उनके अनुसार, इस बदलाव ने निर्देशक को किरदार को दृश्यात्मक रूप से नए अंदाज में पेश करने की गुंजाइश दी, जिसकी शुरुआती दौर में कल्पना नहीं की गई थी। बिना शॉर्टकट पूरा हुआ बदलाव प्रशिक्षक ने दावा किया कि रोहित का पूरा शारीरिक बदलाव प्राकृतिक तरीके से किया गया। इसमें किसी स्टेरॉयड स्टैक, अचानक नमक घटाने की प्रक्रिया या डाययूरेटिक्स का इस्तेमाल नहीं हुआ। उनके मुताबिक, सही भोजन, प्लांट प्रोटीन, फिश ऑयल, क्रिएटिन मोनोहाइड्रेट, लगातार मेहनत और अनुशासन इस बदलाव की नींव रहे। शुरुआत में रोहित प्रगति दिखाने वाली तस्वीरों में अपना चेहरा छिपाते थे, लेकिन बाद में गर्व से अपनी फ्लेक्स तस्वीरें भेजने लगे। ‘द रिवोल्यूशनरीज’ से मिला विश्वास का मंत्र इस पूरी यात्रा से रोहित ने सबसे बड़ी सीख विश्वास की ली। उनका कहना है कि यदि वह मेहनत करने के लिए तैयार हैं तो कोई भी चुनौती स्वीकार कर सकते हैं। ‘द रिवोल्यूशनरीज’ में रोहित सराफ के साथ प्रतिभा रांटा, भुवन बाम और गुरफतेह पीरजादा भी नजर आ रहे हैं। निखिल आडवाणी के निर्देशन में बनी यह पीरियड ड्रामा सीरीज ब्रिटिश राज और आजादी से पहले के भारत की पृष्ठभूमि पर आधारित है। रोहित के लिए यह सीरीज केवल नया किरदार नहीं बल्कि अपनी स्थापित छवि से बाहर निकलने की परीक्षा भी बनी। इस परीक्षा में उन्होंने अभिनय के साथ शरीर, अनुशासन और भावनाओं तीनों को दांव पर लगाया और शायद इसीलिए उन्हें कुछ समय के लिए सचमुच लगा कि वह अभिनेता नहीं, एथलीट बनने निकल पड़े हैं।