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मुंबई। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दबाव में मंगलवार को रुपया 48 पैसे टूटकर 21 मई के बाद पहली बार 96 रुपये प्रति डॉलर के पार 96.16 प्रति डॉलर पर लुढ़क गया। सीसीआईएल के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को रुपया 95.68 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। मंगलवार को यह 95.95 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान एक समय 96.33 प्रति डॉलर तक लुढ़क गया। हालांकि बाद में कुछ रिकवरी हुई और अंत में 96.16 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। कच्चे तेल ने बढ़ाया दबाव रुपये में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड 86 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने पर डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव आता है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बनी वजह मंगलवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफपीआई) ने भी भारतीय पूंजी बाजार से 31 करोड़ डॉलर की शुद्ध निकासी की। विदेशी निवेशकों की बिकवाली से डॉलर की मांग और बढ़ी, जिसका सीधा असर रुपये पर पड़ा। डॉलर इंडेक्स ने दी थोड़ी राहत हालांकि वैश्विक स्तर पर डॉलर इंडेक्स 0.59 प्रतिशत कमजोर रहा, जिससे रुपये को कुछ सहारा मिला। इसी वजह से दिनभर की भारी गिरावट के बावजूद रुपया 96.33 के निचले स्तर से थोड़ा संभलकर बंद हुआ। आगे क्या रहेगा असर? विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो रुपये पर दबाव बना रह सकता है। वहीं विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और वैश्विक बाजार का रुख भी आने वाले दिनों में भारतीय मुद्रा की चाल तय करेंगे।