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मुंबई। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और लाल सागर (रेड सी) में मार्ग बाधित होने के कारण कच्चे तेल का दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने के साथ ही अमेरिका में ब्याज दर बढ़ने की संभावना से हुई बिकवाली के दबाव में बीते सप्ताह 2.7 फीसदी तक लुढ़के घरेलू शेयर बाजार की नजर अगले सप्ताह कूड ऑयल की कीमत, दुनिया के प्रमुख बैंकों की मौद्रिक नीति और अमेरिकी महंगाई और भारत के औद्योगिक उत्पादन आंकड़ों पर रहेगी। ढाई फीसदी से ज्यादा टूटा बाजार, निवेशकों की बढ़ी टेंशन पिछले सप्ताह शेयर बाजार में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 2,091.68 अंक (2.7 फीसदी) गिरकर 76,059.77 पर बंद हुआ जबकि एनएसई का निफ्टी 566.85 अंक (2.32 फीसदी) टूटकर 23,767.45 पर आ गया। बड़ी कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। मिडकैप 239.19 अंक (1.4 फीसदी) लुढ़ककर 16683.27 अंक और स्मॉलकैप 171.15 अंक (2.4 फीसदी) टूटकर 6924.45 अंक रह गया। आखिर मार्केट क्यों फिसला इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह रही पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और रेड सी (लाल सागर) में समुद्री मार्ग बाधित होने से क्रूड ऑयल का 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच जाना । महंगा तेल भारत जैसे आयातक देशों के लिए चिंता का विषय है क्योंकि इससे महंगाई बढ़ने और कंपनियों की लागत में इजाफा होने का खतरा रहता है। दूसरी ओर, अमेरिका में सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना मजबूत होने से एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशकों) ने भारतीय शेयर बाजार से तेजी से पैसा निकालना शुरू कर दिया। बीते सप्ताह एफआईआई ने 8,832.24 करोड़ रुपये निकाल लिए। इसके अलावा अमेरिका की ओर से टैरिफ (आयात शुल्क) को लेकर बढ़ी अनिश्चितता और जुलाई के पीएमआई (परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स) के कमजोर संकेतों ने भी निवेशकों का भरोसा डगमगा दिया। इन सभी कारणों से पूरे सप्ताह बाजार में लगातार बिकवाली का दबाव बना रहा। इन सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा पड़ा असर ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका का सबसे ज्यादा असर बैंकिंग और रियल एस्टेट सेक्टर पर देखने को मिला, जहां जमकर बिकवाली हुई। हालांकि चुनौतीपूर्ण माहौल के बावजूद एफएमसीजी (दैनिक उपभोग की वस्तुओं) और ऑटो कंपनियों के शेयर अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करते नजर आए। इसकी मुख्य वजह इन कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजे रहे, जिससे निवेशकों का भरोसा कायम रहा। अगले हफ्ते किन 5 फैक्टर्स पर रहेगी सबसे ज्यादा नजर? बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर इन पांच बड़े संकेतकों पर रहेगी— * क्रूड ऑयल की कीमत * अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर संबंधी नीति * अमेरिका के महंगाई के आंकड़े * अमेरिका की जीडीपी रिपोर्ट * भारत के औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) के आंकड़े इन आंकड़ों के आधार पर बाजार की अगली दिशा तय हो सकती है। क्या निवेशकों को घबराने की जरूरत है? विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय धैर्य रखना बेहतर होगा। कंपनियों की आय में बड़ा सुधार वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में देखने को मिल सकता है, लेकिन इसके लिए क्रूड ऑयल की कीमतों का स्थिर होना और पश्चिम एशिया में तनाव कम होना जरूरी है। एक्सपर्ट की सलाह: लंबी अवधि की सोच रखें बाजार में उतार-चढ़ाव अभी कुछ समय और बना रह सकता है। ऐसे में कमजोर शेयरों के पीछे भागने के बजाय मजबूत फंडामेंटल (बुनियादी स्थिति) वाली अच्छी कंपनियों में लंबी अवधि के लिए निवेश करना ज्यादा समझदारी भरी रणनीति मानी जा रही है। बाजार के जानकारों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित नहीं होतीं और वैश्विक तनाव कम नहीं होता, तब तक शेयर बाजार में तेज रिकवरी की उम्मीद कम है। ऐसे समय में संयम और सोच-समझकर किया गया निवेश ही बेहतर रिटर्न दिला सकता है।