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नई दिल्ली। दिल्ली और एनसीआर में सीएनजी की आपूर्ति करने वाली इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) ने पश्चिम एशिया संकट और आयात लागत बढ़ने के बीच शनिवार से सीएनजी के दाम 3.89 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ा दिए हैं, जिसके बाद दिल्ली में इसकी कीमत बढ़कर 86.98 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है। आईजीएल की नई दरों के मुताबिक अब दिल्ली में सीएनजी 86.98 रुपये प्रति किलोग्राम मिलेगी जबकि पहले इसकी कीमत 83.09 रुपये प्रति किलोग्राम थी। करीब तीन महीने बाद सीएनजी के दामों में यह बढ़ोतरी की गई है। मई में भी लगातार बढ़े थे दाम इससे पहले 26 मई को सीएनजी की कीमत में 2 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई थी। मई महीने में कुल चार बार कीमतें बढ़ाई गई थीं, जिससे सीएनजी 6 रुपये प्रति किलोग्राम तक महंगी हो गई थी। अब ताजा बढ़ोतरी के बाद वाहन चालकों पर ईंधन का खर्च और बढ़ जाएगा। इन शहरों में सीएनजी के नए रेट आईजीएल की ओर से जारी नई दरों के अनुसार विभिन्न शहरों में सीएनजी की कीमतें इस प्रकार हैं— दिल्ली: 86.98 रुपये प्रति किलोग्राम नोएडा और ग्रेटर नोएडा: 95.59 रुपये प्रति किलोग्राम गाजियाबाद: 95.59 रुपये प्रति किलोग्राम गुरुग्राम: 92.01 रुपये प्रति किलोग्राम मुजफ्फरनगर, मेरठ और शामली: 95.47 रुपये प्रति किलोग्राम रेवाड़ी: 91.59 रुपये प्रति किलोग्राम करनाल: 91.32 रुपये प्रति किलोग्राम कैथल: विज्ञप्ति में 32.32 रुपये प्रति किलोग्राम का उल्लेख है, जो स्पष्ट रूप से टंकण त्रुटि प्रतीत होती है। कानपुर, हमीरपुर और फतेहपुर: 98.31 रुपये प्रति किलोग्राम अजमेर, पाली और राजसमंद: 96.33 रुपये प्रति किलोग्राम महोबा, बांदा और चित्रकूट: 93.31 रुपये प्रति किलोग्राम हापुड़: 96.59 रुपये प्रति किलोग्राम क्यों बढ़े सीएनजी के दाम सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और आर्थिक कारण हैं। पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ा है। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने आयात लागत भी बढ़ा दी है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों और विनिमय दर में होने वाले बदलाव का सीधा असर देश में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की खुदरा कीमतों पर पड़ता है। वाहन चालकों की जेब पर बढ़ेगा बोझ सीएनजी को पेट्रोल और डीजल की तुलना में सस्ता और किफायती ईंधन माना जाता है। लेकिन लगातार बढ़ती कीमतों से अब निजी वाहन चालकों, टैक्सी और ऑटो चालकों के साथ-साथ व्यावसायिक परिवहन क्षेत्र की लागत भी बढ़ेगी। इसका असर आने वाले दिनों में यात्रियों के किराए और माल ढुलाई की लागत पर भी देखने को मिल सकता है।