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रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएसी) की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के विरोध में बुधवार को राजधानी रांची में हजारों छात्रों ने 'संविधान यात्रा' निकालकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। बिरसा मुंडा स्टेडियम से निकली संविधान यात्रा प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र और युवा रांची के बिरसा मुंडा स्टेडियम में जुटे। वहां से संविधान यात्रा शुरू हुई, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर राज्य सरकार के खिलाफ विरोध जताया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने किया। सीबीआई जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग आंदोलनकारी छात्रों और नेताओं ने आरोप लगाया कि भर्ती परीक्षाओं में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन के दौरान "पेपर लीक बंद करो" , "झामुमो-कांग्रेस सरकार युवाओं के भविष्य का सौदा बंद करे" जैसे नारे भी लगाए गए। बारिश भी नहीं तोड़ सकी छात्रों का हौसला बुधवार को रांची में मूसलाधार बारिश हुई, लेकिन इसका आंदोलन पर कोई असर नहीं पड़ा। छात्र छाता लेकर सड़कों पर पैदल मार्च करते रहे और पूरे उत्साह के साथ प्रदर्शन जारी रखा। छात्रों का कहना था कि जब तक भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होगी और युवाओं को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। राजनीतिक दलों को भी दी चेतावनी आंदोलनकारी छात्रों ने कहा कि उनका आंदोलन युवाओं के भविष्य से जुड़ा है और किसी भी राजनीतिक दल को इसका श्रेय लेने या राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित कराना है। संविधान यात्रा से शहर में लगा जाम संविधान यात्रा के कारण राजधानी रांची के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित रहा। कचहरी चौक से फिरायालाल चौक तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इसका असर मेन रोड, रेडियम रोड और लालपुर रोड पर भी देखने को मिला, जहां लंबे समय तक वाहनों की रफ्तार धीमी रही। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग पर अड़े छात्र आंदोलनकारियों ने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि जब तक भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की जाती और शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। छात्रों का कहना है कि यह लड़ाई केवल एक परीक्षा की नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य और निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था की है।



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