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पुरी/नई दिल्ली। ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा के दौरान गुरुवार को अचानक बढ़े भीड़ के दबाव में एक श्रद्धालु की मौत हो गई और कई श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ गई, जबकि प्रशासन ने स्पष्ट किया कि घटना के दौरान भगदड़ नहीं मची थी और स्थिति पर तुरंत नियंत्रण पा लिया गया। भीड़ बढ़ने से बिगड़ी श्रद्धालुओं की तबीयत प्रशासन के अनुसार, रथ यात्रा के दौरान सिंहद्वार के पास श्रद्धालुओं की संख्या अचानक बढ़ गई, जिससे कुछ लोगों को सांस लेने में दिक्कत, घबराहट और चक्कर आने जैसी शिकायतें हुईं। मौके पर मौजूद मेडिकल टीम और राहतकर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रभावित श्रद्धालुओं को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। शुरुआती स्थानीय रिपोर्टों में 100 से अधिक लोगों के बेहोश होने या बीमार पड़ने की बात कही गई थी, लेकिन प्रशासन ने इन दावों को गलत बताते हुए कहा कि सिर्फ सात श्रद्धालुओं की तबीयत बिगड़ी थी , जिन्हें तत्काल इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। एक श्रद्धालु की मौत, मेडिकल जांच जारी अस्पताल में भर्ती कराए गए श्रद्धालुओं में 60 वर्ष से अधिक उम्र के एक व्यक्ति की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि मौत के सही कारण का पता लगाने के लिए मेडिकल जांच कराई जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि मौत भीड़ के दबाव के कारण हुई या किसी अन्य चिकित्सीय कारण से। हार्ट अटैक से दूसरी मौत का रथ यात्रा से संबंध नहीं अधिकारियों ने यह भी बताया कि एक अलग घटना में 35 वर्षीय एक व्यक्ति की हार्ट अटैक से मौत हुई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस घटना का रथ यात्रा के दौरान भीड़ बढ़ने या आयोजन से कोई संबंध नहीं है। 'भगदड़ नहीं हुई', प्रशासन ने किया साफ घटना के बाद सोशल मीडिया और कुछ शुरुआती रिपोर्टों में भगदड़ की आशंका जताई गई लेकिन जिला प्रशासन ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया। अधिकारियों ने कहा कि रथ यात्रा के दौरान कोई भगदड़ नहीं मची । केवल कुछ समय के लिए श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने से भीड़ का दबाव बना, जिससे कुछ लोगों की तबीयत खराब हुई। स्थिति पर तुरंत नियंत्रण पा लिया गया और सभी जरूरी सुरक्षा एवं चिकित्सा व्यवस्था सक्रिय कर दी गई। प्रशासन ने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करें। राहत और बचाव दल ने तुरंत संभाला मोर्चा घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस, ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स, दमकल कर्मी और मेडिकल टीमें सक्रिय हो गईं। बीमार श्रद्धालुओं को स्ट्रेचर और एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया। पूरे इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारु बनी रहे। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ निकली रथ यात्रा घटना के बावजूद भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ आगे बढ़ी। सबसे पहले भगवान सुदर्शन की पहंडी निकली। इसके बाद भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ अपने-अपने रथों पर विराजमान हुए। गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव ने परंपरा के अनुसार 'छेरा पहंरा' की रस्म निभाई। इसके बाद दोपहर करीब दो बजे तीनों रथ गुंडिचा मंदिर की ओर रवाना हुए। इस दौरान लाखों श्रद्धालु "जय जगन्नाथ" के जयघोष के साथ रथ खींचते नजर आए। नवीन पटनायक ने जताया दुख ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म 'एक्स' पर लिखें पोस्ट में कहा, "रथ यात्रा के दौरान बड़दांडा में हुई भगदड़ में श्रद्धालुओं की मौत की खबर से मैं बेहद दुखी हूं। जिन श्रद्धालुओं ने अपनी जान गंवाई है, उनकी आत्मा की शांति के लिए मैं प्रार्थना करता हूं और सौ से अधिक घायल श्रद्धालुओं के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। इस दुख की घड़ी में बीजू जनता दल का प्रत्येक कार्यकर्ता सभी जरूरतमंदों की हरसंभव सहायता के लिए पूरी तरह सहयोग करेगा। मुझे उम्मीद है कि राज्य सरकार भीड़ का उचित प्रबंधन कर श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।" पिछले साल भी हुआ था बड़ा हादसा गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी पुरी रथ यात्रा के दौरान गुंडिचा मंदिर के पास भीड़ के बीच अफरा-तफरी की स्थिति बनी थी। उस घटना में तीन श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी जबकि 50 से अधिक लोग घायल हुए थे। जांच में सामने आया था कि भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में दो अनुष्ठानिक वाहनों के प्रवेश से स्थिति बिगड़ गई थी। प्रशासन की अपील प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे रथ यात्रा के दौरान निर्धारित मार्गों का पालन करें, भीड़ वाले स्थानों पर धैर्य बनाए रखें और किसी भी आपात स्थिति में पुलिस तथा स्वयंसेवकों के निर्देशों का पालन करें, ताकि यात्रा सुरक्षित और सुचारु रूप से संपन्न हो सके।



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