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मुंबई। भारत के बंटवारे की दर्दनाक दास्तान और इंसानियत के जज्बे को बड़े पर्दे पर उतारने वाली सनी देओल, प्रीति जिंटा, शबाना आजमी और अली फजल अभिनीत फिल्म ‘बंटवारा 1947’ का ट्रेलर रिलीज हो गया है, जिसमें दंगों और मजहबी नफरत के बीच एक हिंदू बुजुर्ग महिला की हिफाजत करते सनी देओल का किरदार इंसानियत का दमदार पैगाम देता नजर आता है। आजादी की खुशी से शुरू होकर मातम में बदलता है माहौल ट्रेलर की शुरुआत आजादी के जश्न से होती है। सनी देओल का किरदार खुशी में मिठाई बांटता है और प्रीति जिंटा के किरदार को भी मिठाई खिलाता है। लेकिन, यह खुशी ज्यादा देर कायम नहीं रहती। अचानक कोई ऐलान करता है कि यह मुल्क सिर्फ हिंदुओं का है और इसके बाद हालात तेजी से बिगड़ने लगते हैं। सड़कों पर दंगे भड़क जाते हैं, मकान और बाजार आग की लपटों में घिर जाते हैं और चारों तरफ अफरा-तफरी फैल जाती है। इसी दौरान प्रीति जिंटा सनी से अपने बच्चों को लेकर जल्द से जल्द वहां से निकलने की बात कहती हैं। ट्रेनों में जगह के लिए जद्दोजहद, रास्ते में मौत का खौफ ट्रेलर में बंटवारे के दौरान हुए बड़े पैमाने पर पलायन की डरावनी तस्वीर भी दिखाई गई है। हजारों लोग जान बचाने के लिए ट्रेनों पर चढ़ने की कोशिश करते हैं जबकि हमलावर यात्रियों को निशाना बनाते हैं। सनी देओल का किरदार अपने परिवार को बचाते हुए नई खींची गई सरहद पार कर पाकिस्तान पहुंचने की कोशिश करता है। इस सफर में उसके सामने हिंसा, भूख, डर और अपनों को खोने का दर्द आता है। नए घर में मिली एक हिंदू बुजुर्ग महिला पाकिस्तान पहुंचने के बाद सनी का परिवार एक नए मकान में रहने जाता है लेकिन वहां पहले से एक बुजुर्ग हिंदू महिला मौजूद होती है, जिसका किरदार शबाना आज़मी निभा रही हैं। महिला अपना पुश्तैनी घर छोड़ने से इनकार कर देती है। वह कहती है कि यह घर उसका है और वह कहीं नहीं जाएगी। आसपास के लोग सनी के किरदार पर उस महिला को घर से बाहर निकालने का दबाव बनाते हैं लेकिन वह उसकी हिफाजत करने का फैसला करता है। ‘मां को हिंदू या मुसलमान में नहीं बांटा जा सकता’ ट्रेलर का सबसे असरदार पल तब आता है, जब सनी से पूछा जाता है कि वह एक हिंदू महिला के लिए अपनी और अपने परिवार की जान खतरे में क्यों डाल रहा है। इसके जवाब में वह कहता है, "वह मां है मां....मां को हिंदू मुसलमान में न बांटिये। मां अपने आप में एक मजहब है। हर इंसान का पहला मजहब मां है। हर बच्चे के मुंह से निकला पहला लफ्ज मां है...।" यह डायलॉग फिल्म के इंसानियत और भाईचारे के पैगाम को मजबूत करता है। मंदिर तोड़ने पहुंची भीड़ के सामने खड़े हुए सनी कहानी में तनाव उस समय और बढ़ जाता है, जब शबाना आजमी का किरदार दिवाली मनाता है। आसपास के कुछ लोग उस पर मुसलमानों के बीच हिंदू धर्म फैलाने का इल्जाम लगाते हैं और उसके मंदिर को तोड़ने के लिए भीड़ जमा हो जाती है। इस मौके पर सनी देओल उसका साथ देते हुए कहते हैं कि मंदिर तोड़ना इस्लाम की असली तालीम नहीं है। ट्रेलर का यह हिस्सा मजहबी नफरत के खिलाफ मजबूत संदेश देता है। अली फजल का डायलॉग बना ट्रेलर की जान फिल्म में अली फजल भी अहम किरदार में हैं। ट्रेलर में उनका एक डायलॉग खास ध्यान खींचता है, “कोई मजहब बुरा नहीं होता, अच्छे या बुरे सिर्फ इंसान होते हैं।” यह संवाद फिल्म की पूरी सोच को आसान लफ्जों में सामने रखता है। ट्रेलर से साफ है कि कहानी सिर्फ हिंदू-मुस्लिम टकराव तक सीमित नहीं है बल्कि उन लोगों के बारे में है जो हिंसा और नफरत के माहौल में भी इंसानियत का दामन नहीं छोड़ते। मशहूर नाटक से प्रेरित है कहानी ‘बंटवारा 1947’ की कहानी प्रोफेसर असगर वजाहत के चर्चित नाटक ‘जिस लाहौर नई वेख्या, ओ जम्या ई नई’ से कुछ हद तक प्रेरित बताई गई है। इस नाटक में भी बंटवारे के बाद लाहौर पहुंचे एक परिवार और अपने घर में रह रही हिंदू बुजुर्ग महिला के रिश्ते के जरिए इंसानियत का पैगाम दिया गया है। 14 अगस्त को सिनेमाघरों में दस्तक देगी फिल्म आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है। इसमें सनी देओल, प्रीति जिंटा, शबाना आजमी और अली फजल समेत कई कलाकार अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे।