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पटना। बिहार की राजधानी पटना स्थित एक विशेष अदालत ने रिश्वत लेने के जुर्म में एक पूर्व अनुमंडल शिक्षा पदाधिकारी को तीन वर्ष के सश्रम कारावास के साथ ही 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत दोषी करार निगरानी के विशेष न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह ने मामले की सुनवाई के बाद समस्तीपुर जिले के दलसिंहसराय के तत्कालीन अनुमंडलीय शिक्षा पदाधिकारी विनोद कुमार विमल को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए यह सजा सुनाई। अदालत ने यह भी कहा कि यदि दोषी जुर्माने की राशि जमा नहीं करता है तो उसे चार माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। 25 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए हुए थे गिरफ्तार मामले के विशेष लोक अभियोजक विजय भानु उर्फ पुट्टू बाबू ने बताया कि निगरानी विभाग की टीम ने 10 फरवरी 2010 को विनोद कुमार विमल को 25 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। उनके अनुसार, तत्कालीन अनुमंडल शिक्षा पदाधिकारी एक प्रभारी प्रधानाध्यापक से जब्त किए गए अभिलेख वापस करने के बदले रिश्वत की मांग कर रहे थे। निगरानी अधिकारियों ने उन्हें पटना के मीठापुर बस स्टैंड स्थित अमन होटल के पास रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया था। 11 गवाहों के बयान से साबित हुआ मामला लोक अभियोजक ने बताया कि अदालत में आरोप साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष ने 11 गवाहों के बयान दर्ज कराए थे। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।



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