Full Story

नई दिल्ली। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बीच देश की थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई दर इस वर्ष मई में बढ़कर 9.68 प्रतिशत पर पहुंच गई वहीं सरकार ने पहली बार नए आधार वर्ष 2022-23 के अनुसार थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। तेल और गैस बने महंगाई के बड़े कारण थोक महंगाई में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेज उछाल रही। इस श्रेणी में महंगाई दर 61.51 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि खनिज तेलों की महंगाई 49.82 प्रतिशत रही। ईंधन महंगा, बिजली और कोयला हुए सस्ते एक ओर तेल और गैस की कीमतें बढ़ीं, वहीं कोयला और लिगनाइट के दाम सालाना आधार पर 2.26 प्रतिशत और बिजली 1.85 प्रतिशत सस्ती हुई। इसके बावजूद ईंधन एवं ऊर्जा वर्ग की कुल महंगाई दर 30.33 प्रतिशत रही। इन सामानों की कीमतों में सबसे ज्यादा उछाल विनिर्मित वस्तुओं में तंबाकू उत्पाद, रसायन, धातु, बिजली उपकरण, कपड़े और रबर-प्लास्टिक उत्पादों की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। तंबाकू उत्पादों के दाम सबसे ज्यादा 13.59 प्रतिशत बढ़े। नई सीरीज में बड़ा बदलाव सरकार ने थोक मूल्य सूचकांक (WPI) का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है। नई सीरीज में अब 697 की जगह 957 वस्तुओं को शामिल किया गया है। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को भी पहली बार जगह दी गई है। महंगाई के रुख पर रहेगी नजर विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।