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मुंबई। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में उद्योगपति श्रीकांत बोला के प्रेरणादायक जीवन पर आधारित राजकुमार राव अभिनीत फिल्म 'श्रीकांत' को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फिल्म का सम्मान मिलने पर निर्देशक तुषार हीरानंदानी और निर्माता निधि परमार हीरानंदानी भावुक हो गए और इसे उन सभी लोगों की जीत बताया जिन्होंने अपनी सीमाओं और मुश्किलों के आगे कभी हार नहीं मानी। सपना था, अब राष्ट्रीय सम्मान बन गया निर्देशक तुषार हीरानंदानी ने कहा कि राष्ट्रीय पुरस्कार हर फिल्मकार का सपना होता है और 'श्रीकांत' के लिए यह सम्मान मिलना उनके लिए बेहद खास है। उन्होंने बताया कि वह लंबे समय से श्रीकांत बोला की जिंदगी पर फिल्म बनाना चाहते थे और इस कहानी को पर्दे तक लाने के लिए वर्षों तक प्रयास किया। उनके मुताबिक यह सम्मान पूरी टीम, राजकुमार राव और खुद श्रीकांत बोला के संघर्ष को समर्पित है। 'यह सिर्फ फिल्म नहीं, एक भावनात्मक सफर था' फिल्म की निर्माता निधि परमार हीरानंदानी ने कहा कि 'श्रीकांत' उनके लिए सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक भावनात्मक यात्रा रही। उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही फिल्म को पूरी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ बनाने का संकल्प लिया गया था और राष्ट्रीय पुरस्कार इस पूरे सफर का सबसे खूबसूरत पड़ाव है। संघर्ष, हौसले और प्रेरणा की कहानी 2024 में रिलीज़ हुई 'श्रीकांत' दृष्टिबाधित उद्योगपति श्रीकांत बोला की वास्तविक जिंदगी पर आधारित है। फिल्म दिखाती है कि कैसे उन्होंने सामाजिक और व्यवस्थागत चुनौतियों को पार करते हुए बोल्लेंट इंडस्ट्रीज़ की स्थापना कर सफलता की नई मिसाल कायम की। राजकुमार राव के अभिनय को मिली खूब सराहना फिल्म में राजकुमार राव ने श्रीकांत बोला का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों और समीक्षकों ने खूब सराहा। उनके साथ ज्योतिका, अलाया एफ और शरद केलकर भी अहम भूमिकाओं में नजर आए। फिल्म की एक खास उपलब्धि यह भी रही कि इसमें 70 से अधिक दिव्यांग कलाकारों को शामिल किया गया, जिससे पर्दे पर वास्तविक और समावेशी प्रतिनिधित्व देखने को मिला। लगातार मिल रही है सफलता टी-सीरीज़ और चॉक एंड चीज़ फिल्म्स के बैनर तले बनी 'श्रीकांत' ने रिलीज़ के बाद अपनी दमदार कहानी, संवेदनशील निर्देशन और शानदार अभिनय के दम पर दर्शकों का दिल जीता। पिछले एक साल में कई पुरस्कार जीतने के बाद अब राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार ने फिल्म की सफलता पर सबसे बड़ी मुहर लगा दी।



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