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पटना। बिहार सरकार ने गांवों के गरीब और मजदूर परिवारों को अधिक रोजगार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए जॉब कार्डधारियों को साल में 125 दिन तक काम देने वाली योजना और मनरेगा की निगरानी के लिए नई राज्य परिषद के गठन को आज मंजूरी दे दी। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग ने बुधवार को यहां मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत देने और गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। एक ओर जहां राज्य में हर जॉब कार्डधारी परिवार को साल में 125 दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराने के लक्ष्य के साथ ‘विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका के लिए गारंटी मिशन ग्रामीण, बिहार-2026’ को मंजूरी दी है, वहीं दूसरी ओर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) से जुड़े कार्यों की निगरानी और नीति निर्धारण को मजबूत बनाने के लिए 12 सदस्यीय बिहार राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद के गठन को भी स्वीकृति दे दी है। गांवों में रोजगार का नया मॉडल सरकार का नया मिशन केवल मजदूरी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसे बिहार के दीर्घकालिक विकास विजन ‘बिहार@2047’ से जोड़ा गया है। योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाना, आजीविका के स्थायी अवसर पैदा करना और गांवों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। सबसे बड़ी बात यह है कि जिस ग्रामीण परिवार के पास जॉब कार्ड होगा और वह काम की मांग करेगा, उसे साल में 125 दिनों तक रोजगार अथवा आजीविका गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। इससे लाखों ग्रामीण परिवारों की आय सुरक्षा मजबूत होने की उम्मीद है। मनरेगा की निगरानी के लिए बनेगी नई परिषद सरकार ने मनरेगा के प्रभावी संचालन के लिए बिहार राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद के पुनर्गठन को भी मंजूरी दी है। नई परिषद में 12 सदस्य होंगे, जो ग्रामीण रोजगार योजनाओं के क्रियान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन से जुड़े मामलों की समीक्षा करेंगे। यह परिषद मनरेगा और विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन से जुड़े मामलों पर सरकार को सलाह भी देगी। तकनीकी बाधाएं होंगी दूर सरकार का मानना है कि ग्रामीण रोजगार योजनाओं के क्रियान्वयन में तकनीकी और प्रशासनिक जटिलताएं अक्सर बड़ी चुनौती बनती हैं। इसी कारण नए मिशन के तहत प्रक्रियाओं को सरल बनाने और जिला से पंचायत स्तर तक कार्यान्वयन तंत्र को मजबूत करने का फैसला लिया गया है। इससे योजनाओं की मंजूरी, कार्य चयन, भुगतान और निगरानी जैसी प्रक्रियाओं में तेजी आने की उम्मीद है। क्या होगा फायदा * जॉब कार्डधारी परिवारों को अधिक कार्य दिवस मिलेंगे। * ग्रामीण क्षेत्रों में आय और क्रय शक्ति बढ़ेगी। * मनरेगा की निगरानी और जवाबदेही मजबूत होगी। * बिहार@2047 विजन को जमीनी स्तर पर गति मिलेगी। * गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ने से पलायन में कमी आ सकती है। * आजीविका आधारित गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।