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पटना। बिहार की राजधानी पटना स्थित एक विशेष अदालत ने रिश्वत लेने के जुर्म में आज एक पूर्व अंचलाधिकारी को चार वर्षो के सश्रम कारावास की साथ ही दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत दोषी पटना स्थित निगरानी के विशेष न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह की अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद नवादा जिले में रोह के तत्कालीन अंचलाधिकारी भोला पासवान को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 13 के तहत दोषी करार दिया। अदालत ने दोषी को चार वर्ष के सश्रम कारावास के साथ 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। यदि जुर्माना जमा नहीं दिया गया तो दोषी को दो महीने की सजा अलग से भुगतनी होगी। 4 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े गए थे निगरानी के विशेष लोक अभियोजक रितेश कुमार ने बताया कि वर्ष 2014 में निगरानी ब्यूरो ने भोला पासवान को एक स्थानीय व्यक्ति से 4 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। आरोप के अनुसार तत्कालीन अंचलाधिकारी ने शिकायतकर्ता के रिश्तेदार के मकान में छज्जा, खिड़की और दरवाजा बनवाने की अनुमति से जुड़े काम के बदले रिश्वत की मांग की थी। 11 गवाहों से साबित हुआ मामला अभियोजन पक्ष ने अदालत में मामले को साबित करने के लिए 11 गवाहों के बयान दर्ज कराए। सुनवाई के दौरान आरोपी जमानत पर था लेकिन दोषी ठहराए जाने के बाद अदालत ने उसकी जमानत समाप्त कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।