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मुंबई। ‘हनुमान अंश’ की बॉक्स ऑफिस सफलता के बीच फिल्म के लेखक-निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने इसकी लेखन प्रक्रिया से जुड़ा दिलचस्प किस्सा साझा किया है। नीम करोली बाबा के जीवन और उनकी शिक्षाओं पर आधारित फिल्म की कहानी पर पूरा ध्यान लगाने के लिए उन्होंने अपने कमरे से सभी डिजिटल डिवाइस हटा दिए थे और पेन-कागज को अपना साथी बनाया था। श्री चतुर्वेदी के मुताबिक, फिल्म का पहला दृश्य तय करने में करीब 45 दिन लगे, लेकिन उसके बाद उन्होंने 15 से 20 दिनों में पूरी स्क्रिप्ट तैयार कर ली। कमरे से हटाए डिजिटल डिवाइस, हाथ से लिखी पूरी कहानी विशाल चतुर्वेदी ने बताया कि लेखन के दौरान उनका उद्देश्य बिना किसी रुकावट के कहानी पर ध्यान केंद्रित करना था। इसके लिए उन्होंने अपने काम करने के तरीके में बदलाव किया और कमरे से डिजिटल उपकरण हटा दिए। उन्होंने कहा, “मैंने अपने कमरे से सभी डिजिटल डिवाइस हटा दिए थे। न सिर्फ फिल्म की पूरी कहानी, बल्कि हर चीज मैंने पेन और कागज की मदद से लिखी।” हाथ से लिखे इन पन्नों को बाद में डिजिटल रूप दिया जाता था। उनके अनुसार, वह पन्नों की तस्वीरें अपने सहायकों को भेजते थे और सहायक उन्हें टाइप करते थे। इस व्यवस्था से उन्हें लिखते समय कहानी पर एकाग्र रहने में मदद मिली। पहले दृश्य पर क्यों लगे डेढ़ महीने फिल्म की लेखन प्रक्रिया का सबसे ज्यादा समय लेने वाला हिस्सा उसका पहला दृश्य था। श्री चतुर्वेदी ने बताया कि शुरुआत से ही उनके मन में विषय को लेकर स्पष्ट विचार था, फिर भी कहानी का शुरुआती दृश्य लिखने में करीब 45 दिन लग गए। उनके लिए पहला दृश्य पूरी कहानी की दिशा तय करता है। इसलिए वह शुरुआत को लेकर जल्दबाजी नहीं करना चाहते थे। श्री चतुर्वेदी ने कहा, “पहला दृश्य मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि वही पूरी कहानी की दिशा तय करता है और एक बार पहला दृश्य तय हो गया तो बाकी कहानी तेजी से आगे बढ़ती है।” शुरुआत मिली तो 15 से 20 दिनों में तैयार हुई स्क्रिप्ट पहले दृश्य पर लंबा समय देने के बाद लेखन की रफ्तार बदल गई। श्री चतुर्वेदी के मुताबिक, शुरुआत तय होते ही कहानी आगे बढ़ने लगी और स्क्रिप्ट पूरी करने में 15 से 20 दिन लगे। उन्होंने बताया, “पहला दृश्य मिलने के बाद बाकी कहानी अपने आप बनने लगी और मैंने पूरी स्क्रिप्ट सिर्फ 15 से 20 दिनों में पूरी कर ली।” इस तरह फिल्म की शुरुआत खोजने में लगा समय, उसके बाद स्क्रिप्ट पूरी करने में लगे समय से अधिक रहा। चतुर्वेदी के अनुसार, शुरुआती दृश्य ने कहानी को वह दिशा दी, जिसके बाद बाकी हिस्सों को लिखना आसान हो गया। नीम करोली बाबा पर फिल्म बनाने का विचार पहले से था स्पष्ट श्री चतुर्वेदी ने कहा कि नीम करोली बाबा के जीवन और शिक्षाओं पर फिल्म बनाने को लेकर उनके मन में शुरुआत से स्पष्ट सोच थी। कहानी लिखने से पहले उन्होंने विषय पर काफी शोध भी किया था। उन्होंने निर्माताओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्हें अपनी रचनात्मक प्रक्रिया के अनुसार काम करने की पूरी आजादी मिली। उनके मुताबिक, निर्माताओं ने जल्दबाजी का दबाव नहीं बनाया, जिससे वह कहानी को आवश्यक समय दे सके। 150 करोड़ पार करने के बीच सामने आया लेखन का किस्सा ‘हनुमान अंश’ बॉक्स ऑफिस पर ₹150 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी है। फिल्म की इस उपलब्धि के बीच श्री चतुर्वेदी ने बताया है कि पर्दे पर पहुंची कहानी की शुरुआत हाथ से लिखे पन्नों से हुई थी। उनकी लेखन प्रक्रिया में सबसे अहम फैसला पहला दृश्य तय करना रहा—जिसके लिए उन्होंने करीब डेढ़ महीने का समय लिया। इसके बाद उसी शुरुआत के सहारे बाकी स्क्रिप्ट 15 से 20 दिनों में तैयार हो गई।