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यूपीएससी अभ्यर्थियों के लिए नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने देश की न्यायाधिकरण व्यवस्था को अधिक स्वतंत्र, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026 पेश किया है, जिसमें वर्ष 2021 के कानून को बदलते हुए 16 न्यायाधिकरणों की नियुक्ति, कामकाज, अनुशासन और प्रदर्शन की निगरानी के लिए राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग बनाने का प्रस्ताव किया गया है। 2021 के कानून की जगह आएगी नई व्यवस्था न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026 का उद्देश्य न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम, 2021 की जगह नई व्यवस्था लागू करना है। नए विधेयक के प्रावधानों को उच्चतम न्यायालय के मद्रास बार एसोसिएशन मामले में दिए गए निर्देशों के अनुरूप तैयार करने की बात कही गई है। इसका मुख्य जोर न्यायाधिकरणों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने और न्यायपालिका तथा कार्यपालिका के बीच बेहतर संतुलन बनाने पर है। बनेगा राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग विधेयक की सबसे बड़ी खासियत राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग यानी एनटीसी के गठन का प्रस्ताव है। यह एक वैधानिक संस्था होगी, जिसे केंद्र सरकार स्थापित करेगी। आयोग का काम 16 न्यायाधिकरणों में चयन प्रक्रिया का संचालन करना, उनके प्रदर्शन की समीक्षा करना और अनुशासन से जुड़े मामलों की निगरानी करना होगा। पांच सदस्यों का होगा आयोग राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग में अध्यक्ष समेत कुल पांच सदस्य होंगे। अध्यक्ष ऐसा व्यक्ति हो सकता है, जो उच्चतम न्यायालय का पूर्व न्यायाधीश या किसी उच्च न्यायालय का पूर्व मुख्य न्यायाधीश रहा हो। इसके अलावा दो न्यायिक सदस्य होंगे, जो किसी उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश रहे हों। दो तकनीकी सदस्य भी होंगे, जिनके पास संबंधित क्षेत्र में कम से कम 25 वर्ष का अनुभव होना जरूरी होगा। अध्यक्ष और सदस्यों का पांच साल का कार्यकाल राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति केंद्र सरकार करेगी। अध्यक्ष और न्यायिक सदस्यों की नियुक्ति के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श किया जाएगा। इनका कार्यकाल पांच वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक , जो भी पहले हो, रहेगा। न्यायाधिकरण के सदस्यों की नियुक्ति कैसे होगी? न्यायाधिकरणों के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति केंद्र सरकार खोज-सह-चयन समिति की सिफारिश के आधार पर करेगी। न्यायाधिकरण के अध्यक्ष का कार्यकाल पांच वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक , जो भी पहले हो, रहेगा। वहीं, अन्य सदस्यों का कार्यकाल पांच वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक , जो भी पहले हो, निर्धारित किया गया है। तीन महीने के भीतर करनी होगी नियुक्ति विधेयक में समय पर नियुक्तियां पूरी करने पर भी खास जोर दिया गया है। खोज-सह-चयन समिति की सिफारिश मिलने के बाद केंद्र सरकार को तीन महीने के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस प्रावधान का उद्देश्य न्यायाधिकरणों में लंबे समय तक पद खाली रहने की समस्या को कम करना है। चयन प्रक्रिया में बढ़ेगी न्यायपालिका की भूमिका नई व्यवस्था में उम्मीदवारों के मूल्यांकन और चयन की जिम्मेदारी न्यायिक नेतृत्व वाली खोज-सह-चयन समिति को देने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और उसमें राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका को कम करना है। बनेगा राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आंकड़ा तंत्र विधेयक में न्यायाधिकरण व्यवस्था को डिजिटल बनाने का भी महत्वपूर्ण प्रावधान है। इसके तहत राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आंकड़ा तंत्र विकसित किया जाएगा, जिसमें न्यायाधिकरणों से जुड़े मामलों की जानकारी एक केंद्रीकृत डिजिटल मंच पर उपलब्ध होगी। इस व्यवस्था की मदद से लंबित मामलों, मामलों के निपटारे की रफ्तार और न्यायाधिकरणों के प्रदर्शन पर नजर रखी जा सकेगी। 16 न्यायाधिकरणों की निगरानी एक व्यवस्था के तहत राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग बनने के बाद 16 अलग-अलग न्यायाधिकरणों के प्रशासन, प्रदर्शन और अनुशासन की निगरानी एक संस्थागत व्यवस्था के तहत की जा सकेगी। इसका उद्देश्य अलग-अलग न्यायाधिकरणों के कामकाज में एकरूपता लाने के साथ उनकी जवाबदेही बढ़ाना है। न्यायिक स्वतंत्रता पर खास जोर विधेयक का एक महत्वपूर्ण पहलू न्यायिक स्वतंत्रता से जुड़ा है। नई व्यवस्था न्यायाधिकरणों के कामकाज को उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप बनाने की कोशिश करती है, जिसमें न्यायपालिका और कार्यपालिका की शक्तियों के बीच उचित दूरी तथा संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया गया है। निष्कर्ष: तीन मोर्चों पर बड़े बदलाव की तैयारी न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026 मुख्य रूप से तीन बड़े मोर्चों पर बदलाव की कोशिश करता है— स्वतंत्र निगरानी, पारदर्शी नियुक्ति और डिजिटल जवाबदेही। याद रखने की ट्रिक: “16–5–25–5–70–65–3” — 16 न्यायाधिकरण, आयोग में 5 सदस्य, तकनीकी सदस्य का 25 साल अनुभव, 5 साल कार्यकाल, अध्यक्ष के लिए 70 वर्ष, सदस्य के लिए 65 वर्ष और नियुक्ति के लिए 3 महीने।