Full Story

मुंबई। फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ में अपने अभिनय के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार पाने के बाद कार्तिक आर्यन ने ग्वालियर के एक छोटे शहर के लड़के से नेशनल अवॉर्ड विजेता बनने तक के अपने सफर को याद करते हुए सोशल मीडिया पर भावुक नोट साझा किया है। ‘आखिरकार मैंने उस पल को जिया’ कार्तिक ने अपने पोस्ट में उस समय को याद किया, जब वह ग्वालियर में रहकर अभिनेता बनने का सपना देखा करते थे। उन्होंने लिखा कि इस उपलब्धि के बाद वह उत्साह और घबराहट से अब भी सुन्न हैं। अभिनेता ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय पुरस्कार को एक छोटे शहर के लड़के और देश के हर कलाकार का सपना बताते हुए लिखा, “चंदू नहीं, चैंपियन है मैं।” मुश्किल और दर्द भरा था सफर अपने सफर को याद करते हुए कार्तिक ने ‘चंदू चैंपियन’ के निर्देशक कबीर खान और निर्माता साजिद नाडियाडवाला का आभार जताया। उन्होंने मुरलीकांत पेटकर का किरदार निभाने का अवसर देने के लिए दोनों को धन्यवाद दिया। कार्तिक ने बताया कि इस भूमिका तक पहुंचने का उनका सफर मुश्किल और दर्द से भरा था, लेकिन उसका परिणाम बेहद खूबसूरत रहा। परिवार और टीम को दिया सफलता का श्रेय कार्तिक ने अपने माता-पिता, दोस्तों और टीम के साथ उन सभी लोगों को धन्यवाद दिया, जिन्होंने इस सफर में उनका साथ दिया और उन पर भरोसा बनाए रखा। उनका भावुक संदेश बताता है कि यह पुरस्कार उनके लिए केवल अभिनय का सम्मान नहीं, बल्कि वर्षों से देखे गए एक सपने के पूरा होने का पल भी है। मुरलीकांत पेटकर बनने के लिए की कड़ी मेहनत ‘चंदू चैंपियन’ भारत के पहले पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर के जीवन पर आधारित फिल्म है। इसमें कार्तिक ने पेटकर की भूमिका निभाई है। इस चुनौतीपूर्ण किरदार को पर्दे पर उतारने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की और बड़े शारीरिक बदलाव से भी गुजरे। फिल्म में मुरलीकांत पेटकर के संघर्ष, साहस और हार न मानने के जज्बे को पेश किया गया है। पैरालंपियंस और सपने देखने वालों को समर्पित किया अवॉर्ड कार्तिक ने अपना राष्ट्रीय पुरस्कार देश के सभी पैरालंपियंस और उन लोगों को समर्पित किया है, जो बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करते रहते हैं। उन्होंने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की जूरी, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का भी आभार व्यक्त किया। ‘यह अंत नहीं, नई शुरुआत है’ अपने नोट के आखिर में कार्तिक ने साफ किया कि वह इस सम्मान को अपने सफर की मंजिल नहीं मानते। उनके लिए यह उपलब्धि आने वाले कई बड़े मुकामों की शुरुआत है। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के मंच पर मिला यह सम्मान कार्तिक के करियर का यादगार अध्याय बन गया है और ग्वालियर से शुरू हुआ उनका सपना अब राष्ट्रीय पहचान में बदल चुका है।