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कटिहार। सावन महीने में आस्था के प्रमुख केंद्रों में शामिल बिहार में कटिहार जिले के आजमनगर प्रखंड स्थित मिनी बाबा धाम के नाम से प्रसिद्ध गोरखधाम मंदिर में इस बार श्रद्धालुओं ने दिल खोलकर चढ़ावा चढ़ाया। बाबा गोरखनाथ धाम मंदिर के सचिव पिंटू यादव ने सावन पूर्णिमा मेले से जुड़े आय-व्यय रजिस्टर में दर्ज विवरण के हवाले से बुधवार को बताया कि विभिन्न मदों से कुल 62 लाख 60 हजार 588 रुपये की राशि प्राप्त हुई, जबकि श्रद्धालुओं ने नकद चढ़ावे के साथ सोने की अंगूठी और चांदी के कई आभूषण भी भगवान को अर्पित किए। दान पेटी से निकले 8.26 लाख रुपये श्री यादव ने बताया कि दान पेटी से प्राप्त कुल राशि आठ लाख 26 हजार 974 रुपये है। नोटों की गिनती में 500 रुपये के 300 नोट, 200 रुपये के 142 नोट, 100 रुपये के 1,813 नोट, 50 रुपये के 2,641 नोट, 20 रुपये के 4,400 नोट और 10 रुपये के 3,100 नोट दर्ज हैं। इन छह मूल्यवर्ग के नोटों की कुल राशि छह लाख 10 हजार 750 रुपये होती है। इसके अलावा 1,43,224 रुपये और 73 हजार रुपये की दो अलग प्रविष्टियां भी दर्ज हैं, जिन्हें मिलाकर दान पेटी की कुल राशि 8,26,974 रुपये बताई गई है। छह सोमवारी में करीब 24.50 लाख का चढ़ावा सचिव ने बताया कि बंगला और हिंदी पंचांग के अनुसार सावन के छह सोमवार मंदिर के लिए श्रद्धा और चढ़ावे के लिहाज से बेहद खास रहे। अलग-अलग सोमवारी पर प्राप्त राशि इस प्रकार रही— पहली सोमवारी, 20 जुलाई: 78,687 रुपये दूसरी सोमवारी, 27 जुलाई: 1,46,925 रुपये तीसरी सोमवारी, 3 अगस्त: 3,98,277 रुपये चौथी सोमवारी, 10 अगस्त: 4,96,552 रुपये पांचवीं सोमवारी, 17 अगस्त: 5,67,113 रुपये छठी सोमवारी, 24 अगस्त: 7,62,640 रुपये इन छह सोमवारी का कुल चढ़ावा करीब 24 लाख 50 हजार 194 रुपये बैठता है। आंकड़ों से साफ है कि सावन आगे बढ़ने के साथ मंदिर में चढ़ावे की राशि भी लगातार बढ़ती गई और अंतिम सोमवारी पर सबसे अधिक रकम दर्ज हुई। शिव दर्शन की रसीद से 18.06 लाख रुपये मंदिर रजिस्टर में शिव दर्शन रसीद से 18 लाख छह हजार 800 रुपये की प्राप्ति दर्ज है। यह कुल आय की सबसे बड़ी व्यक्तिगत मदों में से एक है। इसके अलावा मेला दुकानों से चंदा रसीद के रूप में 7,95,220 रुपये , मुंडन से जुड़ी रसीद में 1,86,400 रुपये और नाई व टिकाधारी पंडित से संबंधित मद में 1,95,000 रुपये दर्ज किए गए हैं। इन सभी मदों और सोमवारी चढ़ावे को जोड़कर कुल राशि 62,60,588 रुपये दर्ज की गई है। नकदी ही नहीं, सोना-चांदी भी चढ़ाया श्रद्धालुओं की आस्था केवल नकद चढ़ावे तक सीमित नहीं रही। श्रद्धालुओं ने सोने और चांदी के जेवर भी चढ़ाए। इसमें सात चांदी की मालाएं, सात त्रिशूल, पांच लॉकेट, चार नाग और अन्य छोटी चांदी की वस्तुएं शामिल हैं। दर्ज संख्या के अनुसार चांदी की विभिन्न वस्तुओं की संख्या कुल 29 पीस है। इसके अलावा सोने की एक अंगूठी भी चढ़ावे में मिलने का उल्लेख है। नेपाली और पुराने नोट भी मिले चढ़ावे की गिनती में भारतीय मुद्रा के अलावा नेपाली नोट और पुराने नोट भी मिलने का उल्लेख है। रजिस्टर में नेपाली नोटों की राशि 6,640 रुपये तथा पुराने नोटों की राशि 2,950 रुपये दर्ज की गई है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि गोरखधाम मंदिर में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ आसपास और सीमावर्ती क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। आखिरी सोमवारी पर सबसे ज्यादा चढ़ावा सावन की सोमवारी के आंकड़े अपने आप में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ की कहानी कहते हैं। पहली सोमवारी पर 78 हजार रुपये से कुछ अधिक की राशि दर्ज हुई थी, जबकि छठी सोमवारी तक यह बढ़कर 7.62 लाख रुपये से अधिक हो गई। यानी पहली और अंतिम सोमवारी के बीच चढ़ावे में लगभग दस गुना तक का अंतर दिखाई देता है। यह सावन के अंतिम चरण में मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ और धार्मिक उत्साह को दर्शाता है। 62.60 लाख का सावन, आस्था का बड़ा केंद्र बना गोरखधाम आजमनगर क्षेत्र का गोरखधाम मंदिर पहले से ही स्थानीय और आसपास के जिलों के श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल रहा है। सावन के दौरान यहां जलाभिषेक, सोमवारी पूजा और मेले के कारण भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। इस बार सामने आया 62.60 लाख रुपये से अधिक का चढ़ावा बताता है कि सावन महीने में मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था किस पैमाने पर उमड़ी। नकद राशि के साथ सोने और चांदी के आभूषणों का चढ़ावा भी इस धार्मिक आस्था की तस्वीर को और स्पष्ट करता है।