Full Story

नई दिल्ली। ग्रामीण भारत के सरकारी स्कूलों में बिजली, सुरक्षित पेयजल, उपयोगी शौचालय और पौष्टिक मध्याह्न भोजन जैसी बुनियादी सुविधाओं की जमीनी हकीकत सामने लाने और उनमें सुधार के लिए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने नागरिकों, अभिभावकों और ग्राम प्रतिनिधियों की भागीदारी से राष्ट्रव्यापी सामाजिक ऑडिट अभियान शुरू करने की घोषणा की है, जिसकी शुरुआत हिंगोली गांव से की जाएगी। स्कूल में क्या है, क्या नहीं—अब अभिभावक भी करेंगे जांच सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके की ओर से घोषित इस अभियान का फोकस ग्रामीण भारत के सरकारी स्कूलों पर रहेगा। इसके तहत अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों को खुद स्कूलों में जाकर उपलब्ध सुविधाओं की स्थिति देखने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। अभियान में मुख्य रूप से यह जांचने की बात कही गई है कि स्कूलों में नियमित बिजली, सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल, छात्र-छात्राओं के लिए अलग तथा इस्तेमाल योग्य शौचालय और पौष्टिक मध्याह्न भोजन उपलब्ध है या नहीं। किसान-मजदूर परिवारों के बच्चों पर खास फोकस अभियान का विशेष जोर किसान और मजदूर परिवारों के बच्चों को बेहतर तथा सुरक्षित शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने पर है।आयोजकों का कहना है कि देश में बुनियादी ढांचे का बड़े पैमाने पर विकास होने के बावजूद कई ग्रामीण सरकारी स्कूल जरूरी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। सीजेपी ने खराब स्वच्छता व्यवस्था का छात्राओं पर पड़ने वाले असर को भी प्रमुख मुद्दा बनाया है। ‘क्या गांवों के बच्चे देश के भविष्य का हिस्सा नहीं’ ग्रामीण स्कूलों की स्थिति को लेकर अभियान के आयोजकों ने सवाल उठाया कि क्या गांवों के बच्चे देश के भविष्य और राष्ट्र का हिस्सा नहीं हैं? उनका कहना है कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलने के साथ ऐसा सुरक्षित वातावरण भी मिलना चाहिए, जहां वह बेहतर तरीके से सीख सके। अभिजीत दीपके ने अभियान के पीछे ग्रामीण भारत को केंद्र में रखते हुए कहा, “असली भारत गांवों में बसता है।” हिंगोली गांव से शुरू होगा अभियान इस पहल की शुरुआत हिंगोली गांव से करने की योजना है। यहां दीपके स्थानीय सरपंच से मुलाकात करेंगे और सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने तथा उन्हें जरूरी सुविधाओं से लैस करने के उपायों पर चर्चा करेंगे। इसके साथ ही सीजेपी ने देशभर के सरपंचों से अपने गांव के सरकारी स्कूलों की सुविधाएं बेहतर करने के अभियान में शामिल होने की अपील की है। ‘पहले और बाद’ की तस्वीरों से दिखेगा कितना बदला स्कूल अभियान को केवल समस्याओं की पहचान तक सीमित नहीं रखने की योजना है। स्कूल में सुधार होने पर उसके पहले और बाद की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की जाएंगी। इसका उद्देश्य यह दिखाना होगा कि अभियान के दौरान किसी स्कूल में वास्तव में कितना बदलाव आया। अपने गांव के सरकारी स्कूल में उल्लेखनीय सुधार करने वाले सरपंचों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने की योजना भी बनाई गई है। कमी मिली तो फोटो-वीडियो में दर्ज होगी हकीकत सामाजिक ऑडिट के दौरान यदि किसी स्कूल में जरूरी सुविधाएं नहीं मिलती हैं या व्यवस्था में कमी पाई जाती है तो नागरिकों से उसे फोटो और वीडियो के जरिए दर्ज करने की अपील की जाएगी। इससे स्थानीय स्तर पर स्कूल की वास्तविक स्थिति का रिकॉर्ड तैयार करने और सुधार की मांग को मजबूती देने की कोशिश होगी। ऑडिट के लिए तैयार किया गया मानक फॉर्म स्कूलों का आकलन एक तय प्रक्रिया के तहत करने के लिए सीजेपी ने मानक ऑडिट फॉर्म भी तैयार किया है। इसका लिंक संगठन के आधिकारिक सोशल मीडिया पेज पर अभियान के लॉन्च वीडियो के कमेंट सेक्शन में उपलब्ध कराया गया है। इसका मकसद अलग-अलग गांवों में स्कूलों की सुविधाओं का आकलन एक समान मानकों के आधार पर करना है। स्वतंत्रता दिवस को स्कूलों की स्थिति से जोड़ने की कोशिश अभियान के आयोजकों ने स्वतंत्रता दिवस को भी इस पहल से जोड़ा है। उनका कहना है कि यह दिन केवल देश की उपलब्धियों को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि उन ग्रामीण सरकारी स्कूलों की स्थिति पर ध्यान देने का भी मौका है, जहां लाखों बच्चों का भविष्य आकार लेता है। ‘एकजुट होकर बदल सकते हैं ग्रामीण स्कूलों की तस्वीर’ अभिजीत दीपके का कहना है कि नागरिक, अभिभावक और स्थानीय प्रतिनिधि एक साथ आगे आएं तो ग्रामीण सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा, “यदि हम एकजुट होकर आगे आएं और कार्रवाई करें, तो हम अपने सभी ग्रामीण सरकारी स्कूलों को कल के भविष्य के लिए एक बेहतर जगह बना सकते हैं।”