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मुंबई: रिश्तों के बिखरने, जुदाई के दर्द और उम्मीद के सहारे फिर से संभलने की नरम दास्तान कहती फिल्म ‘मैक्स, मिन एंड म्याऊज़ाकी’ का ट्रेलर रिलीज़ हो गया है, जिसमें प्यार, तन्हाई, यादों और जिंदगी के छोटे-छोटे सुकूनभरे लम्हों को बेहद सादगी और गहराई के साथ पिरोया गया है। ट्रेलर में दिखी मोहब्बत, जुदाई और खामोश दर्द की दुनिया फिल्म का ट्रेलर एक ऐसी दुनिया में ले जाता है, जहां प्यार है, अपनापन है, लेकिन साथ ही बिछड़ने की कसक, खामोशियां और अंदर ही अंदर टूटते रिश्तों की चुभन भी है। यह उन लोगों की कहानी लगती है, जो एक-दूसरे से दूर तो हो जाते हैं, लेकिन एक-दूसरे की यादों से पूरी तरह कभी जुदा नहीं हो पाते। ट्रेलर का सबसे खूबसूरत पहलू यह है कि यह बड़े-बड़े संवादों या भारी-भरकम ड्रामे से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे लम्हों, ठहरी हुई नजरों, चुप रहकर भी बहुत कुछ कहती खामोशियों और रोजमर्रा की साधारण चीजों के जरिए अपना असर छोड़ता है। मैक्स और मिन की कहानी, लेकिन असल में हर उस शख्स की कहानी जो कभी टूटा हो फिल्म की कहानी मैक्स और मिन नाम के एक युवा कपल के इर्द-गिर्द घूमती है। जब जिंदगी उनसे सबसे ज्यादा एक-दूसरे का सहारा बनने की उम्मीद करती है, तभी उनके रिश्ते में दरार पड़ने लगती है। हालात ऐसे बनते हैं कि मिन दूर चली जाती है , और उसके बाद मैक्स को सिर्फ उसके जाने का दुख ही नहीं, बल्कि उसके बाद रह गए खालीपन के साथ भी जीना सीखना पड़ता है। यहीं से फिल्म एक साधारण ब्रेकअप ड्रामा से आगे निकलती है। मैक्स की जिंदगी में सहारा बनकर आती है ‘म्याऊज़ाकी’ — वह बिल्ली जिसे मैक्स और मिन ने कभी साथ मिलकर पाला था। यही बिल्ली इस कहानी में सिर्फ एक पालतू जानवर नहीं, बल्कि याद, रिश्ता, सुकून और उम्मीद का एक नर्म-सा जरिया बन जाती है। यह सिर्फ ब्रेकअप की कहानी नहीं, टूटकर फिर संभलने की कहानी है ‘मैक्स, मिन एंड म्याऊज़ाकी’ का असली जादू इसी बात में है कि यह फिल्म सिर्फ मोहब्बत के खत्म होने की बात नहीं करती, बल्कि यह बताती है कि कुछ रिश्ते खत्म होकर भी पूरी तरह खत्म नहीं होते । उनका रंग बदल जाता है, उनकी जगह बदल जाती है, लेकिन उनका असर दिल में कहीं बाकी रह जाता है। फिल्म शायद यही कहना चाहती है कि आगे बढ़ना हमेशा भूल जाना नहीं होता। कभी-कभी आगे बढ़ना मतलब होता है — दर्द को साथ लेकर भी मुस्कुराना सीखना, टूटे हिस्सों को समेटना और जिंदगी को फिर से धीरे-धीरे अपनाना। बिना शोर की फिल्म, लेकिन असर गहरा आज के दौर में जहां फिल्मों में बड़े ट्विस्ट, तेज ड्रामा और ऊंची आवाज़ों का बोलबाला है, वहीं यह फिल्म बिल्कुल उलट रास्ता चुनती दिखती है। इसमें न तो ज़रूरत से ज़्यादा नाटकीयता है, न ही कहानी को चौंकाने के लिए अनावश्यक मोड़। इसके बजाय यह फिल्म अधूरी रह गई बातों, असहज खामोशियों, अचानक चेहरे पर आ जाने वाली मुस्कान, पीढ़ियों की सोच के फर्क और रिश्तों की बारीकियों को बहुत सादगी से पकड़ती है। यही सादगी इस फिल्म को खास बनाती है। यह कहानी उन लोगों के लिए भी है, जो कभी किसी के जाने के बाद भी उस रिश्ते की परछाई के साथ जीते रहे हैं। बारिशों वाली मुंबई और जिंदगी के छोटे लम्हों की खूबसूरती फिल्म की दुनिया बारिशों वाली मुंबई की गलियों में बसती है, जहां रोजमर्रा की भागदौड़ के बीच भी जिंदगी कुछ नर्म और खूबसूरत पल छोड़ जाती है। ट्रेलर देखकर लगता है कि यह फिल्म उन छोटी-छोटी बातों में खूबसूरती ढूंढ़ती है, जिन्हें हम अक्सर जल्दबाज़ी में नजरअंदाज कर देते हैं। यानी, यह फिल्म सिर्फ रिश्तों की कहानी नहीं, बल्कि रुककर महसूस करने की कहानी भी है। इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में मिल चुकी है खूब तारीफ ‘मैक्स, मिन एंड म्याऊज़ाकी’ कोई साधारण रिलीज़ नहीं है। यह फिल्म पहले ही दुनिया भर के कई बड़े फिल्म समारोहों में सराही जा चुकी है। इसका प्रीमियर बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ था, जबकि पाम स्प्रिंग्स इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के ‘बेस्ट ऑफ फेस्ट’ चयन में भी इसे जगह मिली। इसके अलावा फिल्म को सोनोमा सैन फ्रांसिस्को और ओसाका में दर्शकों का प्यार मिला, जबकि स्टटगार्ट, सिनसिनाटी, बर्लिन इंडो-जर्मन फिल्म वीक और कनाडा के RIFFA में इसे बेस्ट फीचर फिल्म का सम्मान भी मिल चुका है। यानी सिनेमाघरों तक पहुंचने से पहले ही यह फिल्म अपनी संवेदनशील कहानी के दम पर दुनिया भर में पहचान बना चुकी है। दमदार स्टारकास्ट और भावनाओं से भरी कहानी फिल्म में मेधा शंकर, सिद्धार्थ मेनन, आदिल हुसैन, मंदिरा बेदी, नासर, नफीसा अली और विधात्री बांदी जैसे कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। इतनी मजबूत स्टारकास्ट इस भावुक कहानी को और असरदार बना सकती है। फिल्म को पद्मकुमार नरसिम्हमूर्ति ने लिखा और निर्देशित किया है, जबकि इसका संगीत शेल ओसवाल ने अपनी आवाज़ से सजाया है। फिल्म को समीक्षा ओसवाल और शेल ओसवाल ने प्रोड्यूस किया है और इसे SSO प्रोडक्शंस लेकर आ रहा है। दिल को छूने वाली फिल्मों के शौकीनों के लिए खास हो सकती है यह फिल्म अगर आप ऐसी फिल्में पसंद करते हैं जो सिर्फ कहानी न सुनाएं, बल्कि आपको अपने किरदारों के दर्द, खालीपन, मोहब्बत और उम्मीद के साथ जोड़ दें, तो ‘मैक्स, मिन एंड म्याऊज़ाकी’ आपके लिए खास साबित हो सकती है। यह परफेक्ट रिश्तों की कहानी नहीं लगती, बल्कि सच्चे, अधूरे, टूटे लेकिन जिंदा रिश्तों की कहानी लगती है और शायद यही इसकी सबसे बड़ी खूबसूरती है — यह फिल्म आपको सिर्फ एंटरटेन नहीं करती, बल्कि थोड़ी देर के लिए रुककर अपनी जिंदगी, अपने रिश्तों और अपने बिछड़ चुके लोगों के बारे में सोचने पर मजबूर करती है। कब रिलीज़ होगी फिल्म दिल को छू लेने वाली यह फिल्म 24 जुलाई को सिर्फ सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी।