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नई दिल्ली। ऐतिहासिक विश्व कप अभियान की यादें पीछे छूट चुकी हैं और अब निगाहें एशियाई खेलों के स्वर्ण पर टिक गई हैं। जापान में अपना अभियान शुरू करने से चार दिन पहले भारतीय महिला हॉकी टीम के मुख्य कोच स्योर्ड मारिने ने खिलाड़ियों को साफ संदेश दिया, "पिछली सफलता अगले पदक की गारंटी नहीं देती, इतिहास रचने के लिए टीम को फिर लड़ना होगा और पहले से अधिक मेहनत करनी होगी।" 44 साल के इंतजार को खत्म करने का मौका भारतीय महिला हॉकी टीम ने एशियाई खेलों में अपना पहला और अब तक का एकमात्र स्वर्ण पदक 1982 में जीता था। जापान में टीम के सामने 44 साल बाद दूसरा स्वर्ण जीतने का मौका होगा। खिताबी जीत भारत को लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 का सीधा टिकट भी दिलाएगी। भारतीय टीम एशियाई खेलों में आत्मविश्वास और शानदार लय के साथ उतर रही है। एफआईएच विश्व कप 2026 में भारत ने ऐतिहासिक पांचवां स्थान हासिल किया, जो पिछले 52 वर्षों में भारतीय महिला टीम का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। हालांकि मारिने ने खिलाड़ियों को स्पष्ट कर दिया है कि अब विश्व कप की उपलब्धि से आगे बढ़ने का समय है। बेंगलुरु से ही शुरू हो गया था जापान का सफर विश्व कप से लौटने के बाद भारतीय टीम ने बेंगलुरु में सक्रिय विश्राम किया। जापान रवाना होने से पहले मारिने ने साई केंद्र के शेफ से खिलाड़ियों के लिए उनकी पसंद के जापानी व्यंजनों वाला विशेष रात्रिभोज तैयार करने को कहा। इसी दौरान उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि टीम ने विश्व कप में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है, लेकिन अगले टूर्नामेंट की ओर बढ़ने से पहले पिछले अध्याय को बंद करना जरूरी है। यादों को एक बार जिया, फिर बंद किया अध्याय मारिने ने खिलाड़ियों से पूछा कि विश्व कप की उनकी सबसे खूबसूरत याद कौन-सी थी। टीम के वीडियो विश्लेषक ने सभी गोल और शानदार पलों को मिलाकर एक विशेष फिल्म भी तैयार की। इसकी आखिरी स्लाइड पर लिखा था—‘रोड टू एशियन गेम्स’। कोच ने कहा, “हमने उस उपलब्धि को एक बार फिर जिया, जिस पर हमें गर्व हो सकता है, लेकिन सफलता की कोई गारंटी नहीं होती। आपको इसके लिए दोबारा लड़ना होगा और पहले से भी अधिक देना होगा।” जापान में समय और परिस्थितियों से तालमेल जापान पहुंचने के बाद टीम का पहला लक्ष्य समय के अंतर और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल होना है। टूर्नामेंट करीब आने के साथ अभ्यास सत्रों की तीव्रता बढ़ाई जा रही है। मारिने के मुताबिक अब पूरी टीम का ध्यान केवल एशियाई खेलों पर केंद्रित है। टीम की शारीरिक तैयारियों की जिम्मेदारी डॉ. वेन लोम्बार्ड और उनकी टीम संभाल रही है। लोम्बार्ड खिलाड़ियों की ऊर्जा, नींद, थकान और ताजगी पर नजर रखते हैं। इसी आधार पर तय किया जाता है कि अभ्यास की तीव्रता कितनी होनी चाहिए। मारिने ने कहा कि लोग अक्सर मानते हैं कि बेहतर तैयारी के लिए लगातार अधिक अभ्यास जरूरी है, लेकिन सही तरीके से आराम करना और स्ट्रेंथ सत्र भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। विश्व कप वाली टीम ही एशियाई खेलों में उतरेगी एशियाई खेलों के लिए वही भारतीय टीम चुनी गई है, जिसने विश्व कप में हिस्सा लिया था। उस दल में 11 खिलाड़ियों ने विश्व कप में पदार्पण किया था। अलग-अलग देशों की खेल शैली और संस्कृति का सामना करने के बाद अब ये खिलाड़ी अधिक अनुभवी और आत्मविश्वास से भरी हुई हैं। मारिने ने कहा कि टीम इस अनुभव का इस्तेमाल भविष्य की तैयारी में करेगी, लेकिन सुधार की भूख खत्म नहीं होनी चाहिए। उनके मुताबिक जिस दिन कोई टीम यह मान लेती है कि वह अपनी मंजिल तक पहुंच गई है, उसी क्षण उसकी प्रगति रुकने लगती है। सविता के नाम जुड़ने वाला है बड़ा रिकॉर्ड भारतीय गोलकीपर सविता एशियाई खेलों में अपना दूसरा मुकाबला खेलते ही भारत की ओर से सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली महिला खिलाड़ी बन जाएंगी। हालांकि मुख्य कोच को भरोसा है कि यह उपलब्धि उनके फोकस को प्रभावित नहीं करेगी। मारिने ने कहा, “सविता बेहद पेशेवर हैं। अगर कोई खिलाड़ी पूरी तरह टीम पर केंद्रित है तो वह सविता हैं। मुझे लगता है कि बाकी खिलाड़ी उनके लिए और तेज दौड़ना चाहेंगी। हम व्यक्तिगत रिकॉर्ड पर नहीं, टीम पर ध्यान देते हैं और एक टीम के रूप में जश्न मनाते हैं।” मजबूत डिफेंस बना भारत का हथियार विश्व कप में भारतीय टीम ने मजबूत रक्षण का प्रदर्शन करते हुए ऊंची रैंकिंग वाली टीमों को बराबरी पर रोका और जर्मनी को 3-1 से हराया। इन नतीजों ने टीम के खेलने, मौके बनाने और बचाव करने के तरीके पर विश्वास बढ़ाया है। कोच ने खिलाड़ियों को चेताया कि यह रणनीति तभी काम करेगी, जब प्रयास और तीव्रता लगातार बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि दौड़, रफ्तार और बुनियादी कौशल जैसी छोटी चीजों को हर मुकाबले में सही रखना होगा। चीन नहीं, अपना खेल है भारत की प्राथमिकता एशियाई खेलों में चीन को भारत के मुख्य प्रतिद्वंद्वियों में माना जा रहा है, लेकिन मारिने किसी एक विरोधी पर अतिरिक्त ध्यान नहीं देना चाहते। उन्होंने कहा कि टीम बैठकों में चीन, जापान, कोरिया या किसी अन्य देश के नाम का इस्तेमाल बहुत कम होता है। उनका मानना है कि भारतीय टीम को विपक्षी देशों की रणनीति में उलझने के बजाय अपने खेल को बेहतर तरीके से लागू करने पर ध्यान देना चाहिए। यदि टीम अपने काम सही ढंग से करेगी तो परिणाम भी अच्छा हो सकता है। ‘चक दे’ कोच कहलाने पर क्या बोले मारिने मारिने को भारतीय महिला हॉकी का ‘चक दे’ कोच कहा जा रहा है। इस तुलना पर उन्होंने कहा कि उनके लिए खिलाड़ियों, सहयोगी स्टाफ, हॉकी इंडिया और भारतीय खेल प्राधिकरण के साथ जुड़ाव सबसे महत्वपूर्ण है। मारिने ने कहा कि वह भारत में मिल रहे सम्मान और सराहना को महसूस करते हैं। ‘चक दे इंडिया’ से जुड़ी कहानियां सुनना उन्हें अच्छा लगता है और कभी-कभी खिलाड़ी भी उनसे इस बारे में बात करती हैं।



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