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नई दिल्ली। बिहार में सिवान जिले के शिवपुर मठिया गांव से दिल्ली के विज्ञान भवन तक का सफर सिर्फ दूरी तय करने की कहानी नहीं बल्कि विज्ञान की दुनिया में बड़े सपनों की ओर बढ़ते कदमों की कहानी है.... गांव की युवा शोधकर्ता स्नेहा पाण्डेय आज उस वैश्विक मंच का हिस्सा हैं, जहां दुनिया भर के 2000 से ज्यादा वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और शोधार्थी चिकित्सा के भविष्य की नई इबारत तलाश रहे हैं। दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित वर्ल्ड कांग्रेस ऑन नैनोमेडिसिन 2026 में कैंसर और टीबी से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), नैनो डायग्नोस्टिक्स और लक्षित दवा वितरण तक पर मंथन हो रहा है और इन्हीं वैज्ञानिक चर्चाओं के बीच सिवान की स्नेहा भी नैनोमेडिसिन की बदलती दुनिया को करीब से समझ रही हैं। सिवान की बेटी, दुनिया के वैज्ञानिकों के बीच स्नेहा पाण्डेय सिवान जिले के शिवपुर मठिया गांव की रहने वाली हैं। डब्ल्यूसीएन-2026 जैसे वैश्विक वैज्ञानिक आयोजन में युवा शोधकर्ता के रूप में उनकी भागीदारी खास है। सम्मेलन में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से वैज्ञानिक और शोधार्थी पहुंचे हैं। ऐसे में स्नेहा को नैनोमेडिसिन के अत्याधुनिक शोध, नई तकनीकों और भविष्य में चिकित्सा के बदलते स्वरूप को करीब से जानने और समझने का अवसर मिल रहा है। 2000 से ज्यादा वैज्ञानिकों का महामंथन दिल्ली के विज्ञान भवन में 27 से 29 सितंबर 2026 तक आयोजित इस वैश्विक सम्मेलन में 2,000 से अधिक वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और शोधार्थियों की भागीदारी बताई गई है। सम्मेलन की थीम “नैनोमेडिसिन, व्हेयर द फ्यूचर ऑफ हेल्थकेयर बिगिन्स एट द नैनोस्केल” है यानी चिकित्सा के भविष्य की शुरुआत नैनो स्तर से। इसका आयोजन इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो मेडिकल साइंसेज, फैकल्टी ऑफ मेडिकल साइंसेज, यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली की ओर से किया जा रहा है। कैंसर से टीबी तक, नैनो स्तर पर इलाज की नई राह सम्मेलन में चिकित्सा विज्ञान के उन क्षेत्रों पर मंथन हो रहा है, जो आने वाले समय में इलाज और बीमारी की पहचान के तरीकों में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसमें कैंसर, टीबी, लक्षित दवा वितरण, नैनो डायग्नोस्टिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), बायोसेंसर, रीजेनेरेटिव मेडिसिन और प्रिसिजन मेडिसिन जैसे विषयों पर शोध और विचार-विमर्श किया जा रहा है। यानी, चर्चा इस बात पर भी केंद्रित है कि बेहद सूक्ष्म यानी नैनो स्तर की तकनीक के जरिए दवाओं को शरीर में लक्षित जगह तक पहुंचाने, बीमारियों की पहचान और चिकित्सा के नए रास्तों को किस तरह आगे बढ़ाया जा सकता है। गांव से निकली स्नेहा ने पकड़ी रिसर्च की राह स्नेहा की मौजूदगी इस सम्मेलन को सिवान के नजरिए से भी खास बनाती है। शिवपुर मठिया जैसे गांव से निकलकर विश्व स्तर के वैज्ञानिक आयोजन तक पहुंचना स्थानीय युवाओं के लिए शोध और विज्ञान की संभावनाओं की एक तस्वीर पेश करता है।दुनिया के प्रमुख वैज्ञानिकों और शोधार्थियों के बीच स्नेहा की भागीदारी उन्हें न केवल आधुनिक शोध को समझने, बल्कि नैनोमेडिसिन की भविष्य की संभावनाओं से रूबरू होने का मौका दे रही है। पिता दिनेश चंद्र पाण्डेय रवि किशन के निजी सचिव स्नेहा पाण्डेय के पिता दिनेश चंद्र पाण्डेय उर्फ गुड्डू पाण्डेय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद और अभिनेता रवि किशन के निजी सचिव हैं। इससे पहले वह सिवान के तत्कालीन सांसद ओम प्रकाश यादव के निजी सचिव के रूप में भी काम कर चुके हैं। अब उनकी बेटी स्नेहा विज्ञान और शोध के क्षेत्र में अपनी राह आगे बढ़ा रही हैं।



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