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पटना। बिहार सरकार ने छात्र संगठनों के आंदोलन के बाद चौथे चरण की शिक्षक भर्ती परीक्षा (टीआरई-4) को प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के बजाय एकल चरण में आयोजित करने तथा ‘एक अभ्यर्थी-एक परिणाम’ के सिद्धांत पर नियमानुसार कार्रवाई करने का फैसला किया है जबकि भर्ती परीक्षाओं में सुधार से जुड़े अन्य मुद्दों पर विचार के लिए पटना उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेषज्ञ समिति गठित की गई है। शिक्षा विभाग और छात्र प्रतिनिधियों के बीच 27 अगस्त को हुई बैठक के बाद लिखित सहमति बनी। इसके बाद पटना के गर्दनीबाग में 18 अगस्त से आंदोलन कर रहे छात्रों ने धरना समाप्त कर दिया। शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रौशन ने अनशन पर बैठे छात्र नेता अमन को जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया। टीआरई-4 में सिर्फ एक परीक्षा बैठक का सबसे बड़ा फैसला टीआरई-4 की परीक्षा प्रणाली को लेकर हुआ। छात्र लंबे समय से प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के बजाय एक ही चरण में शिक्षक भर्ती परीक्षा कराने की मांग कर रहे थे। सरकार ने इस मांग को स्वीकार कर लिया है। इसका अर्थ है कि टीआरई-4 में अभ्यर्थियों को पहले पीटी और फिर मेन्स जैसी दो अलग परीक्षाओं से नहीं गुजरना होगा। ‘एक अभ्यर्थी-एक परिणाम’ पर नियमानुसार कार्रवाई छात्रों की दूसरी प्रमुख मांग ‘वन कैंडिडेट-वन रिजल्ट’ की थी। बैठक की कार्यवाही के अनुसार, सरकार ने इस संबंध में नियमानुसार आगे की कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य एक ही अभ्यर्थी के एक से अधिक पदों या श्रेणियों में चयन से उत्पन्न होने वाली रिक्तियों को कम करना और अधिक अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर देना है। इसकी विस्तृत प्रक्रिया संबंधित भर्ती नियमों के अनुसार तय होगी। दस दिनों के आंदोलन के बाद बनी सहमति टीआरई-4 में पीटी-मेन्स व्यवस्था और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर छात्र गर्दनीबाग में पिछले 10 दिनों से धरने पर बैठे थे। गुरुवार को छात्र प्रतिनिधियों के एक समूह ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ बातचीत की। बैठक में शिक्षा विभाग के सचिव, विशेष सचिव, पटना के जिला पदाधिकारी, आर्थिक अपराध इकाई के पुलिस उप महानिरीक्षक, वरीय पुलिस अधीक्षक और छात्र प्रतिनिधि उपस्थित थे। मांगों पर बिंदुवार चर्चा के बाद सर्वसम्मति से निर्णय दर्ज किए गए। छात्र नेता सौरभ ने इसे छात्र एकता और संघर्ष की जीत बताया। सहमति बनने के बाद छात्र प्रतिनिधि मंडल ने आंदोलन समाप्त करने का फैसला लिया। हर मांग सीधे स्वीकार नहीं, कई मुद्दे समिति के पास छात्र संगठनों ने सरकार के सभी मांगें मान लेने का दावा किया है, लेकिन बैठक की लिखित कार्यवाही से स्पष्ट है कि टीआरई-4 की एकल परीक्षा जैसी कुछ मांगें सीधे स्वीकार हुई हैं, जबकि कई विषय जांच या विचार के लिए प्रस्तावित विशेषज्ञ समिति को भेजे जाएंगे। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि विभिन्न परीक्षाओं में सुधार की अनुशंसा के लिए पटना उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश की अध्यक्षता में ‘परीक्षा सुधार पर विशेषज्ञ समिति’ गठित की गई है। यह समिति छात्रों की शिकायतें सुनेगी, उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करेगी और अपनी अनुशंसाएं देगी। 70वीं बीपीएससी की पारदर्शिता पर समिति करेगी सुनवाई 70वीं बीपीएससी परीक्षा की पारदर्शिता से संबंधित शिकायतें विशेषज्ञ समिति के सामने रखी जाएंगी। शिकायतकर्ता समिति के समक्ष साक्ष्यों के साथ अपना पक्ष या सुझाव प्रस्तुत कर सकेंगे। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसी व्यवस्था के तहत परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार से जुड़े अन्य सुझावों पर भी विचार होगा। 1,799 दारोगा बहाली की जांच, रिपोर्ट के बाद प्रक्रिया छात्र प्रतिनिधियों ने 1,799 पदों वाली दारोगा भर्ती परीक्षा की जांच की मांग भी उठाई। बैठक में तय हुआ कि इस परीक्षा की आगे की भर्ती प्रक्रिया विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे बढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही बिहार कर्मचारी चयन आयोग को संशोधित भर्ती कैलेंडर जारी कर समयबद्ध तरीके से परीक्षाएं कराने की दिशा में कार्रवाई करने को कहा गया है। सहायक प्राध्यापक से पहले बीईटी पर भी विचार सहायक प्राध्यापकों की भर्ती से पहले बिहार पात्रता परीक्षा यानी बीईटी आयोजित करने की मांग को भी विशेषज्ञ समिति के सामने रखा जाएगा। छात्र या संबंधित पक्ष समिति के सामने अपने साक्ष्य और सुझाव प्रस्तुत कर सकेंगे। अंतिम कार्रवाई समिति की अनुशंसा के आधार पर की जाएगी। पुस्तकालयाध्यक्षों की बहाली जल्द शुरू करने का फैसला पुस्तकालयाध्यक्ष पदों की रिक्तियों के अनुसार भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करने पर सहमति बनी है। इसके लिए संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई तेजी से प्रारंभ करने को कहा गया है। यह फैसला लंबे समय से पुस्तकालयाध्यक्ष भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संविदाकर्मियों के अंक और अलग कोटे पर बनेगी समिति राज्य सरकार की भर्ती प्रक्रियाओं में संविदा पर कार्यरत कर्मियों को मिलने वाले अंक और वेटेज के साथ उनके लिए अलग कोटा निर्धारित करने की मांग पर तत्काल अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इस विषय पर सरकारी प्रावधानों का अध्ययन करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई जाएगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे निर्णय लिया जाएगा। डोमिसाइल नीति और अधिकतम आयु सीमा भी एजेंडे में बिहार की सभी भर्ती प्रक्रियाओं में अधिकतम डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग पर न्याय विभाग से मिले परामर्श के अनुसार नियमानुकूल कार्रवाई करने का फैसला हुआ है। भर्ती परीक्षाओं में अधिकतम आयु सीमा से जुड़े प्रस्ताव को भी विचार के लिए विशेषज्ञ समिति के सामने रखा जाएगा। यानी इन दोनों विषयों पर विस्तृत नियम और अंतिम निर्णय अभी सामने आना बाकी है। भर्ती कैलेंडर जारी करना और उसका पालन जरूरी बैठक में सभी भर्ती आयोगों एवं विभागों द्वारा समय पर भर्ती कैलेंडर जारी करने और उसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की मांग पर सहमति बनी। सरकार का उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं में होने वाली देरी और अनिश्चितता को कम करना है। हालांकि इस व्यवस्था की सफलता कैलेंडर के वास्तविक और समयबद्ध पालन पर निर्भर करेगी। प्रश्नपत्र, ओएमआर और उत्तर पुस्तिका में पारदर्शिता की मांग बीपीएससी की तर्ज पर होने वाली सभी भर्ती परीक्षाओं में प्रश्नपत्र, ओएमआर शीट और उत्तर पुस्तिका से संबंधित पारदर्शिता अनिवार्य करने की मांग भी उठी। इस विषय पर प्रस्ताव पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति के सामने रखा जाएगा। समिति की अनुशंसाओं के बाद सरकार आगे की प्रक्रिया तय करेगी। एईडीओ और सैनिटरी परीक्षा के पेपर लीक की जांच बीपीएससी द्वारा आयोजित एईडीओ और सैनिटरी सहित अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोपों की निष्पक्ष जांच आर्थिक अपराध इकाई से कराने की बात कही गई है। बैठक की कार्यवाही के अनुसार, ईओयू इस मामले में नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई कर रही है। सरकार ने सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई है। 24 अगस्त का विभागीय पत्र वापस छात्रों की मांगों से जुड़े शिक्षा विभाग के 24 अगस्त 2026 के पत्रांक 162/गो. को तत्काल प्रभाव से वापस लेने पर भी सहमति बनी। वार्ता के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया। बैठक की कार्यवाही पर अधिकारियों और छात्र प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर भी किए गए। शिकायतों के समाधान के लिए पोर्टल और शिविर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि छात्रों की समस्याओं और शिकायतों के तेजी से समाधान के लिए ‘विद्यार्थी सहयोग पोर्टल’ और ‘विद्यार्थी सहयोग शिविर’ शुरू किए गए हैं। सरकार का दावा है कि इनके माध्यम से छात्रों की शिकायतों का समाधान 30 दिनों के भीतर किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार छात्रों के कल्याण और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रतिबद्ध है।



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