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मुंबई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से हुई बिकवाली के दबाव में बीते सप्ताह आधी फीसदी से अधिक की गिरावट पर रहे घरेलू शेयर बाजार की अगले सप्ताह चाल रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समीक्षा और महंगाई आंकड़ों से तय होगी। बीते सप्ताह बीएसई का तीस शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 532.4 अंक यानी 0.71 प्रतिशत का गोता लगाकर सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन शुक्रवार को 74243.34 अंक पर बंद हुआ। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 181.05 अंक यानी 0.8 अंक लुढ़ककर 23366.70 अंक पर रहा। आलोचय अवधि में बीएसई की बड़ी कंपनियों के शेयरों के विपरीत मझौली और छोटी कंपनियों के शेयरो में मिलाजुला रुख रहा। मिडकैप 205.29 अंक यानी 1.2 प्रतिशत की गिरावट लेकर 16282.05 अंक पर आ गया जबकि स्मॉलकैप 14.65 अंक की मामूली बढ़त के साथ 6784.91 अंक पर बंद हुआ। शेयर बाजार में बीते सप्ताह कारोबार सीमित दायरे में रहा और हल्की गिरावट देखने को मिली। हालांकि, सप्ताह के अंत में बाजार में कुछ सुधार भी हुआ। यह स्थिति एक तरफ देश के सकारात्मक आर्थिक संकेतों और दूसरी तरफ वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच संतुलन को दर्शाती है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर निवेशकों की सोच पर बना रहा। हालांकि, तेल की कीमतों में कुछ नरमी आने से बाज़ार को बीच-बीच में राहत भी मिली। आरबीआई की द्विमासिक मौद्रिक नीति और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों से पहले निवेशक सतर्क रहे। दोनों ही घोषणाएं लगभग बाज़ार की उम्मीदों के अनुरूप रहीं। आरबीआई के तंत्र में लिक्विडिटी बढ़ाने वाले कदमों और रुपये की स्थिरता से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। लेकिन, आर्थिक विकास दर के अनुमान में कुछ कमी आने से उत्साह सीमित रहा और कई शेयरों में निवेशकों ने मुनाफ़ा वसूली की। कुल मिलाकर, वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश की मजबूत घरेलू आर्थिक स्थिति के कारण बाजार का माहौल सतर्क लेकिन संतुलित बना हुआ है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की शुक्रवार को समाप्त तीन दिवसीय बैठक में रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया गया है। हालांकि यह निर्णय बीते सप्ताह कारोबार के अंतिम दिन आया इसलिए अगले सप्ताह निवेशक आरबीआई के इस रुख पर बाजार में अपनी प्रतिक्रिया देंगे। निवेश सलाह देने वाली कंपनी जिओजित इंवेस्टमेंट लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने बताया कि आने वाले समय में बाजार की दिशा घरेलू आर्थिक संकेतों और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर निर्भर करेगी। भारत की उम्मीद से बेहतर जीडीपी वृद्धि अर्थव्यवस्था की मजबूती दिखाती है लेकिन भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और सख्त वित्तीय परिस्थितियां आगे चुनौतियां पैदा कर सकती हैं। निवेशकों की नजर अब आरबीआई की नीतियों, महंगाई की स्थिति और बॉन्ड यील्ड की चाल पर रहेगी। साथ ही, मॉनसून की प्रगति और उससे ग्रामीण मांग पर पड़ने वाले प्रभाव को भी ध्यान से देखा जाएगा। वैश्विक स्तर पर, पश्चिम एशिया की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव महत्वपूर्ण रहेंगे। इनके अलावा, भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता से जुड़ी खबरें भी बाज़ार को प्रभावित कर सकती हैं। कंपनियों के तिमाही नतीजों का दौर समाप्त होने के बाद फिलहाल बाज़ार में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। निवेशक अब आर्थिक विकास और वैश्विक परिस्थितियों को लेकर अधिक स्पष्ट संकेतों का इंतजार करेंगे, जिसके बाद वे बड़े निवेश संबंधी फैसले ले सकते हैं। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन हिंदुस्तान यूनिलीवर ने सबसे अधिक 2.05 प्रतिशत का मुनाफा कमाया। साथ ही अडानी पोर्ट्स 1.82, बजाज फाइनेंस 1.75, एक्सिस बैंक 1.66, एशियन पेंट 0.88, महिंद्रा एंड महिंद्रा 0.86, ईटरनल 0.85, आईसीआईसीआई बैंक 0.79, टाइटन 0.78, एलटी 0.37 और पावरग्रिड के शेयर 0.25 प्रतिशत की बढ़त पर रहे। वहीं, ट्रेंट 2.21, टीसीएस 1.85, टाटा स्टील 1.78, एनटीपीसी 1.28, एचसीएल टेक 1.20, भारती एयरटेल 1.07, कोटक बैंक 1.01 और रिलायंस के शेयर 1.00 प्रतिशत के नुकसान में रहे।