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मोतिहारी। बिहार में पूर्वी चंपारण के लिए शनिवार दर्द, आंसुओं और मातम की ऐसी तस्वीर लेकर आया, जिसने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया। एक ओर शादी के महज चार महीने बाद नवविवाहिता की संदिग्ध मौत ने दहेज प्रताड़ना पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए, वहीं दूसरी ओर नदी और नहर में डूबने की अलग-अलग घटनाओं में तीन लोगों की मौत से चार परिवारों की खुशियां पलभर में मातम में बदल गईं। चार महीने पहले सजी थी डोली, अब उठी अर्थी सबसे दर्दनाक घटना हरसिद्धि थाना क्षेत्र के मुरारपुर गांव की है, जहां चार माह पहले विवाहिता बनी कविता देवी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतका के पिता सुरेंद्र राय , निवासी बलथर (पिपरा कोठी), ने आरोप लगाया कि छह मार्च 2026 को उन्होंने अपनी बेटी की शादी रणधीर कुमार से पूरे रीति-रिवाज और सम्मान के साथ की थी। विवाह में 10 लाख रुपये नकद सहित अपनी सामर्थ्य के अनुसार उपहार भी दिए गए, लेकिन शादी के बाद से लगातार अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर बेटी को प्रताड़ित किया जाता रहा। उनका आरोप है कि इसी प्रताड़ना ने उनकी बेटी की जान ले ली। दहेज हत्या के एंगल से जांच, आरोपियों की तलाश जारी घटना की सूचना मिलते ही हरसिद्धि थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अरेराज के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (डीएसपी) ने बताया कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। तिलावे नदी में डूबी 16 साल की किशोरी उधर, बंजरिया थाना क्षेत्र के अजगरवा गांव में 16 वर्षीय काजल कुमारी की तिलावे नदी में डूबने से मौत हो गई। बताया जाता है कि नदी में उतरने के दौरान वह गहरे पानी में चली गई। ग्रामीणों ने काफी कोशिश की, लेकिन तब तक उसकी जान जा चुकी थी। नहर ने छीनी एक और जिंदगी इसी दिन कोटवा थाना क्षेत्र में तिरहुत नहर में डूबने से एक वृद्ध की मौत हो गई। स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस ने शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। एक दिन, चार मौतें और कई अनसुलझे सवाल शनिवार की इन घटनाओं ने समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ नवविवाहिता की संदिग्ध मौत ने दहेज प्रथा जैसी सामाजिक बुराई की भयावह तस्वीर उजागर की, तो दूसरी ओर लगातार हो रही डूबने की घटनाओं ने जलाशयों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और लोगों में जागरूकता की जरूरत को फिर सामने ला दिया। पूर्वी चंपारण के लिए काला शनिवार एक ही दिन में चार परिवारों के घरों में चूल्हे ठंडे पड़ गए। कहीं चार महीने पहले आई बहू की अर्थी उठी, तो कहीं माता-पिता ने अपनी संतान को खो दिया। पूर्वी चंपारण के लिए यह शनिवार सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि कई परिवारों के जीवन का ऐसा काला अध्याय बन गया, जिसकी पीड़ा लंबे समय तक भुलाई नहीं जा सकेगी।