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वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के साथ एक बड़े तेल समझौते की घोषणा करते हुए दावा किया है कि निजी कंपनियों की भागीदारी से अमेरिका ने वहां के 65 अरब बैरल से अधिक प्रमाणित तेल भंडार पर बहुमत नियंत्रण हासिल कर लिया है, जिससे अमेरिकी तेल भंडार दोगुना होने और भविष्य में पेट्रोल की कीमतें घटने की उम्मीद है। हालांकि समझौते की कानूनी संरचना, इसमें शामिल कंपनियों और वास्तविक उत्पादन की समयसीमा से जुड़ी कई अहम जानकारियां अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं। https://truthsocial.com/@realDonaldTrump/posts/117175567133618952 ट्रंप बोले-दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा तेल सौदा राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर समझौते की घोषणा करते हुए इसे “दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा तेल सौदा” करार दिया। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज तथा निजी क्षेत्र के साथ मिलकर इस समझौते को अंतिम रूप दिया है। श्री ट्रंप का कहना है कि इस व्यवस्था पर अमेरिकी करदाताओं का कोई पैसा खर्च नहीं होगा। उनके अनुसार, समझौते से अमेरिका की तेल आपूर्ति बढ़ेगी, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और लंबे समय तक पेट्रोल की कीमतों पर दबाव कम किया जा सकेगा। ये फिलहाल प्रशासन की ओर से किए गए दावे हैं; बाजार और उपभोक्ताओं पर इसका वास्तविक प्रभाव उत्पादन शुरू होने और आपूर्ति बढ़ने के बाद ही स्पष्ट होगा। 65 अरब बैरल का क्या है पूरा हिसाब रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, वेनेजुएला सरकार के मुताबिक प्रस्तावित व्यवस्था के अंतर्गत 17 रणनीतिक तेल क्षेत्रों का विकास किया जाएगा, जिनमें करीब 65 अरब बैरल प्रमाणित तेल क्षमता बताई गई है। ये क्षेत्र मुख्य रूप से ओरिनोको बेल्ट और मराकाइबो झील के आसपास स्थित बताए जा रहे हैं। यह मात्रा वेनेजुएला के कुल विशाल तेल भंडार का लगभग पांचवां हिस्सा मानी जा रही है। देश के पास दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार हैं, लेकिन वर्षों के कम निवेश, प्रतिबंधों, खराब बुनियादी ढांचे और प्रबंधन संबंधी समस्याओं के कारण उसका उत्पादन संभावित क्षमता से काफी नीचे रहा है। अमेरिका को कैसे मिलेगा ‘बहुमत नियंत्रण’ उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अमेरिका और एक अज्ञात निजी संचालक की भागीदारी से एक नई कंपनी या संयुक्त व्यवस्था बनाई जा सकती है, जो चुने गए तेल क्षेत्रों के विकास और संचालन का काम संभालेगी। अमेरिकी पक्ष की परिचालन हिस्सेदारी लगभग 55 प्रतिशत हो सकती है, हालांकि समझौते के अंतिम दस्तावेज सार्वजनिक नहीं हुए हैं। श्री ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किन कंपनियों को तेल क्षेत्रों का अधिकार मिलेगा, अमेरिका नियंत्रण का इस्तेमाल किस कानूनी व्यवस्था के तहत करेगा और उत्पादित कच्चे तेल के लाभ का बंटवारा कैसे होगा। यही कारण है कि समझौते को ऐतिहासिक बताए जाने के बावजूद इसकी व्यावहारिक संरचना को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। वेनेजुएला में 100 अरब डॉलर के निवेश का अनुमान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने समझौते को दोनों देशों के लिए लाभकारी बताया है। अमेरिकी पक्ष का अनुमान है कि इससे वेनेजुएला के तेल उद्योग में करीब 100 अरब डॉलर का निजी निवेश आ सकता है और हजारों रोजगार पैदा हो सकते हैं। वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने कहा है कि परियोजना से देश को लगभग 209 अरब डॉलर का कर राजस्व मिल सकता है। उनके अनुसार, निवेश से तेल उद्योग के आधुनिकीकरण, उत्पादन बढ़ाने और अर्थव्यवस्था को गति देने में मदद मिलेगी। क्या सचमुच जल्दी सस्ता होगा पेट्रोल श्री ट्रंप ने दावा किया है कि अतिरिक्त तेल आपूर्ति से अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें काफी नीचे आएंगी। सिद्धांत रूप से उत्पादन बढ़ने और सस्ता कच्चा तेल मिलने से ईंधन की लागत पर असर पड़ सकता है, लेकिन इसका लाभ तत्काल मिलने की संभावना कम मानी जा रही है। वेनेजुएला का अधिकांश तेल भारी किस्म का है, जिसे निकालने, परिवहन करने और परिष्कृत करने के लिए विशेष तकनीक तथा बड़े निवेश की जरूरत होती है। पुराने तेल क्षेत्रों, क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों और जर्जर संयंत्रों को सुधारने में वर्षों लग सकते हैं। इसलिए विश्लेषकों ने चेताया है कि समझौते के बावजूद उत्पादन में बड़ा उछाल तुरंत नहीं आएगा। कानूनी और संवैधानिक अड़चनें भी कम नहीं इस समझौते के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में वेनेजुएला का कानूनी ढांचा शामिल है। देश के तेल उद्योग में लंबे समय से सरकारी नियंत्रण की व्यवस्था रही है और मुख्य गतिविधियों पर राज्य का अधिकार बना हुआ है। यदि अमेरिकी या दूसरी निजी कंपनियों को बहुमत परिचालन नियंत्रण दिया जाता है, तो इसके लिए कानूनों में बदलाव, नए अनुबंध और राजनीतिक सहमति की जरूरत पड़ सकती है। पुराने राष्ट्रीयकरण विवादों और निवेशकों की संपत्तियों से जुड़े मामलों के कारण विदेशी कंपनियां भी पूरी सावधानी बरत सकती हैं। अमेरिका के लिए क्यों अहम है वेनेजुएला का तेल वेनेजुएला का भारी कच्चा तेल कई अमेरिकी रिफाइनरियों के लिए उपयोगी माना जाता है क्योंकि वे ऐसी ही किस्म के तेल के प्रसंस्करण के लिए तैयार की गई हैं। लंबी अवधि की आपूर्ति मिलने पर अमेरिका आयात लागत घटाने, अपनी सामरिक पेट्रोलियम भंडार व्यवस्था मजबूत करने और वैश्विक आपूर्ति संकट के जोखिम को कम करने की कोशिश कर सकता है। यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब वैश्विक संघर्षों और प्रमुख समुद्री मार्गों पर तनाव के कारण तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे माहौल में वेनेजुएला के विशाल भंडार तक दीर्घकालिक पहुंच अमेरिका की ऊर्जा रणनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है। वेनेजुएला को निवेश, अमेरिका को तेल-लेकिन राह लंबी समझौते का मूल गणित साफ दिखाई देता है—अमेरिका को बड़े तेल भंडार तक दीर्घकालिक पहुंच चाहिए, जबकि वेनेजुएला को अपनी जर्जर ऊर्जा व्यवस्था दोबारा खड़ी करने के लिए पूंजी, तकनीक और बाजार की जरूरत है। इसके बावजूद इसे जमीन पर उतारना आसान नहीं होगा। कंपनियों का चयन, निवेश की सुरक्षा, प्रतिबंधों की स्थिति, स्वामित्व अधिकार, राजस्व बंटवारा और तेल उत्पादन बढ़ाने की वास्तविक लागत जैसे मुद्दे समझौते की सफलता तय करेंगे। फिलहाल श्री ट्रंप की घोषणा ने वैश्विक ऊर्जा बाजार और अमेरिका-वेनेजुएला संबंधों में हलचल जरूर पैदा कर दी है। यदि सभी दावे और प्रस्तावित निवेश वास्तविक रूप लेते हैं, तो यह तेल उद्योग के सबसे बड़े समझौतों में शामिल हो सकता है; लेकिन जब तक विस्तृत दस्तावेज, कंपनियों के नाम और स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आती, इसे एक बड़े राजनीतिक एवं आर्थिक ऐलान के रूप में ही सावधानी से देखा जाना उचित होगा।