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(यूपीएससी एवं अन्य सिविल सेवा परीक्षा अभ्यर्थियों के लिए विशेष) नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में 12 से 13 सितंबर 2026 तक आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से जारी 45 पृष्ठों का नई दिल्ली घोषणापत्र अंतरराष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी, पर्यावरण और सामाजिक सहयोग का विस्तृत खाका प्रस्तुत करता है। घोषणापत्र के 140 क्रमांकित अनुच्छेद यूपीएससी एवं अन्य सिविल सेवा परीक्षाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय संबंधों से लेकर अर्थव्यवस्था, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक मुद्दों तक उपयोगी सामग्री देते हैं। इसका केंद्रीय संदेश स्पष्ट है—ग्लोबल साउथ को वैश्विक फैसलों का केवल पालन करने वाला नहीं, बल्कि उन्हें आकार देने वाला साझेदार बनाया जाए। पहले समझें: 2026 के ब्रिक्स सम्मेलन की बुनियादी बातें 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित हुआ। सम्मेलन की विषयवस्तु थी—“लचीलापन, नवाचार, सहयोग और टिकाऊपन के लिए निर्माण।” ब्रिक्स ने अपने मूल सिद्धांतों के रूप में परस्पर सम्मान और समझ, संप्रभु समानता, एकजुटता, लोकतंत्र, खुलापन, समावेश, सहयोग और आम सहमति को दोहराया। विस्तारित ब्रिक्स का सहयोग तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है- राजनीतिक एवं सुरक्षा सहयोग आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग सांस्कृतिक एवं लोगों के बीच सहयोग भारत की 2026 की अध्यक्षता के दौरान देश के 30 शहरों में मंत्रियों, सांसदों, अधिकारियों, विशेषज्ञों, व्यवसायों और नागरिकों के स्तर पर 400 से अधिक बैठकें एवं कार्यक्रम आयोजित किए गए। परीक्षा का जरूरी अंतर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 18वां था, लेकिन घोषणापत्र में संगठन की 20वीं वर्षगांठ का उल्लेख किया गया है। प्रारंभिक परीक्षा में इन दोनों आंकड़ों को मिलाकर भ्रम पैदा किया जा सकता है। वैश्विक शासन: ब्रिक्स ने उठाया प्रतिनिधित्व का सवाल घोषणापत्र में मौजूदा अंतरराष्ट्रीय एवं बहुपक्षीय व्यवस्था को अधिक न्यायपूर्ण, समान, प्रभावी, प्रतिनिधिक, वैध, लोकतांत्रिक और जवाबदेह बनाने की मांग की गई है। ब्रिक्स ने अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र के उभरते बाजारों, विकासशील देशों तथा सबसे कम विकसित देशों को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक भागीदारी देने पर जोर दिया। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सचिवालयों में विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के साथ वरिष्ठ पदों पर महिलाओं, विशेष रूप से उभरती तथा विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग की गई है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव पद से जुड़ा तथ्य घोषणापत्र के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र महासचिव के पद पर अब तक कोई महिला निर्वाचित नहीं हुई, लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र से केवल एक व्यक्ति इस पद पर पहुंचा और अफ्रीका और एशिया से दो-दो व्यक्ति महासचिव बने। ये तथ्य प्रारंभिक परीक्षा के वक्तव्य-आधारित प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण हैं। सुरक्षा परिषद सुधार: भारत की दावेदारी को फिर समर्थन ब्रिक्स ने संयुक्त राष्ट्र और उसकी सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार का समर्थन किया, ताकि संस्था अधिक लोकतांत्रिक, प्रतिनिधिक, प्रभावी और सक्षम बन सके। समूह ने सुरक्षा परिषद में अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की आवश्यकता बताई। अफ्रीकी देशों की आकांक्षाओं के संदर्भ में एजुलविनी सहमति और सिर्ते घोषणापत्र को भी मान्यता दी गई। घोषणापत्र में कहा गया कि सुरक्षा परिषद सुधार से ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत होनी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र तथा सुरक्षा परिषद में बड़ी भूमिका निभाने की ब्राजील और भारत की आकांक्षाओं के प्रति अपना समर्थन दोहराया। मुख्य परीक्षा के लिए केंद्रीय तर्क भारत अपनी दावेदारी को केवल राष्ट्रीय शक्ति के आधार पर नहीं, बल्कि वैश्विक संस्थाओं में ग्लोबल साउथ के कम प्रतिनिधित्व से जोड़कर प्रस्तुत कर सकता है। यह “बहुध्रुवीय विश्व बनाम पुरानी संस्थागत संरचना” के रूप में मजबूत विश्लेषणात्मक बिंदु है। आईएमएफ, विश्व बैंक और डब्ल्यूटीओ में सुधार ब्रिक्स ने ब्रेटन वुड्स संस्थाओं को अधिक चुस्त, प्रभावी, विश्वसनीय, निष्पक्ष, समावेशी, जवाबदेह और प्रतिनिधिक बनाने की मांग की। समूह का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की शासन संरचना में उभरती एवं विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की आवाज उनकी मौजूदा वैश्विक आर्थिक स्थिति के अनुरूप होनी चाहिए। घोषणापत्र में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की 16वीं सामान्य कोटा समीक्षा में तय वृद्धि को बिना देरी लागू करने तथा 17वीं समीक्षा में सार्थक कोटा पुनर्संयोजन का तरीका जल्द विकसित करने की मांग की गई। ब्रिक्स ने 2025 की विश्व बैंक शेयरधारिता समीक्षा को विकासशील देशों का ऐतिहासिक रूप से कम प्रतिनिधित्व सुधारने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। विश्व व्यापार संगठन पर ब्रिक्स का रुख ब्रिक्स ने नियम-आधारित, खुली, पारदर्शी, निष्पक्ष, समावेशी और भेदभावरहित बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था का समर्थन किया।घोषणापत्र में विश्व व्यापार संगठन के सुधार की मांग की गई, दो स्तरीय और बाध्यकारी विवाद निपटान व्यवस्था तत्काल बहाल करने पर जोर दिया गया, अपीलीय निकाय के नए सदस्यों की नियुक्ति बिना देरी करने को कहा गया, इथियोपिया और ईरान की विश्व व्यापार संगठन सदस्यता की दावेदारी का समर्थन किया गया और चीन द्वारा राजनयिक संबंध रखने वाले 53 अफ्रीकी देशों के लिए शून्य शुल्क व्यवस्था बढ़ाने का उल्लेख किया गया। ब्रिक्स ने विश्व व्यापार संगठन के नियमों के विपरीत एकतरफा शुल्क, गैर-शुल्क उपाय और पर्यावरणीय उद्देश्यों की आड़ में संरक्षणवाद पर गंभीर चिंता जताई। एकतरफा प्रतिबंधों पर तीखा विरोध नई दिल्ली घोषणापत्र ने अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के विपरीत लगाए जाने वाले एकतरफा आर्थिक तथा द्वितीयक प्रतिबंधों की निंदा की। ब्रिक्स ने कहा कि ऐसे उपाय लक्षित देशों की सामान्य आबादी के विकास, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के अधिकारों पर दूरगामी प्रभाव डालते हैं। इनका असमान बोझ गरीब और कमजोर वर्गों पर पड़ता है तथा डिजिटल विभाजन एवं पर्यावरणीय चुनौतियां बढ़ती हैं। परीक्षा में कैसे जोड़ें? इस मुद्दे को “राष्ट्रीय संप्रभुता बनाम आर्थिक दबाव”, “नियम-आधारित बहुपक्षवाद” और “प्रतिबंधों के मानवीय प्रभाव” से जोड़कर लिखा जा सकता है। आतंकवाद पर दोटूक: जीरो टॉलरेंस, दोहरे मापदंड नहीं ब्रिक्स ने आतंकवाद के हर कृत्य को आपराधिक और अनुचित बताया, चाहे उसका उद्देश्य कुछ भी हो, उसे कहीं भी या किसी के द्वारा अंजाम दिया गया हो। घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले की कठोरतम शब्दों में निंदा की गई। दस्तावेज के अनुसार, इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए। ब्रिक्स ने जिन खतरों को स्पष्ट रूप से चिह्नित किया, उनमें आतंकियों की सीमा पार आवाजाही, आतंकवाद का वित्तपोषण, आतंकियों के सुरक्षित पनाहगाह, चरमपंथ और कट्टरता तथा युवा पीढ़ी में कट्टरपंथ का प्रसार शामिल हैं। घोषणापत्र ने आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से जोड़ने का विरोध किया। साथ ही आतंकियों और उनके समर्थकों को कानून के अनुसार जवाबदेह बनाकर न्याय के सामने लाने की मांग की। ब्रिक्स ने आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस सुनिश्चित करने और उससे निपटने में दोहरे मापदंड खारिज करने का आह्वान किया। पांच उपसमूह वाला आतंकवाद-रोधी ढांचा घोषणापत्र में ब्रिक्स आतंकवाद-रोधी कार्य समूह और उसके पांच उपसमूहों की गतिविधियों का स्वागत किया गया। ये ब्रिक्स आतंकवाद-रोधी रणनीति, कार्ययोजना और स्थिति-पत्र के आधार पर काम करते हैं। समूह ने संयुक्त राष्ट्र के ढांचे में अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक संधि को जल्द अंतिम रूप देकर अपनाने और सभी संयुक्त राष्ट्र-नामित आतंकियों एवं आतंकी संस्थाओं के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने की मांग की। अवैध वित्त और डिजिटल अपराध भी सुरक्षा चुनौती ब्रिक्स ने आतंकवाद के वित्तपोषण के साथ अवैध वित्तीय प्रवाह, हथियार एवं मानव तस्करी, मादक पदार्थों से अर्जित धन के शोधन, भ्रष्टाचार, संगठित अपराध तथा अवैध आभासी परिसंपत्ति प्रवाह पर चिंता जताई। घोषणापत्र में सीमा पार धोखाधड़ी और तथाकथित “स्कैम कंपाउंड” का भी उल्लेख है, जो डिजिटल तकनीक, भुगतान प्रणालियों और कमजोर परिस्थितियों में मौजूद लोगों का दुरुपयोग करते हैं। इन्हें रोकने के लिए सीमा शुल्क अधिकारियों, वित्तीय खुफिया इकाइयों, कानून लागू करने वाली एजेंसियों, कर अधिकारियों, निगरानी संस्थाओं, दूरसंचार कंपनियों और प्रौद्योगिकी मंचों के बीच सहयोग बढ़ाने की बात कही गई। वैश्विक संघर्ष: संवाद और कूटनीति पर जोर ब्रिक्स ने बढ़ते वैश्विक ध्रुवीकरण, अविश्वास और सैन्य खर्च पर चिंता जताई। समूह ने अंतरराष्ट्रीय विवादों को संवाद, परामर्श और कूटनीति से हल करने की प्रतिबद्धता दोहराई। घोषणापत्र ने संघर्ष की रोकथाम, मूल कारणों के समाधान, मध्यस्थता, संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों और अफ्रीकी संघ के शांति प्रयासों में सहयोग की संभावनाएं तलाशने की बात कही। परमाणु खतरे और संघर्ष के बढ़ते जोखिम पर चिंता जताते हुए निरस्त्रीकरण, हथियार नियंत्रण और परमाणु अप्रसार व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया। पश्चिम एशिया और गाजा पर क्या कहा गया ब्रिक्स ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताते हुए अधिकतम संयम, नागरिकों और नागरिक ढांचे की रक्षा तथा संवाद एवं कूटनीति के माध्यम से दीर्घकालिक शांति का आह्वान किया। गाजा के मामले में समूह ने संघर्षविराम बनाए रखने की मांग की, निर्बाध मानवीय सहायता पर जोर दिया, फलस्तीनियों के जबरन विस्थापन का विरोध किया, भुखमरी को युद्ध के साधन के रूप में इस्तेमाल करने की निंदा की, पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर 1967 की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य फलस्तीन राज्य का समर्थन किया, संयुक्त राष्ट्र में फलस्तीन की पूर्ण सदस्यता का समर्थन दोहराया और संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी की भूमिका का समर्थन किया। ब्रिक्स ने कब्जे वाले यरुशलम की कानूनी और ऐतिहासिक स्थिति बदलने वाले एकतरफा उपायों को भी खारिज किया। सूडान, सीरिया और लेबनान सूडान में बिगड़ते मानवीय संकट तथा आतंकवाद और चरमपंथ के प्रसार के जोखिम पर चिंता जताते हुए तत्काल एवं स्थायी संघर्षविराम की मांग की गई। समाधान के लिए “अफ्रीकी समस्याओं का अफ्रीकी समाधान” सिद्धांत दोहराया गया। सीरिया में संप्रभुता, स्वतंत्रता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करते हुए विदेशी आतंकी लड़ाकों से पैदा होने वाले खतरे पर ध्यान दिलाया गया। लेबनान में संघर्षविराम और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 को पूरी तरह लागू करने की मांग की गई। संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल के कर्मियों और परिसरों पर हमलों की निंदा करते हुए शांति सैनिकों की सुरक्षा को समझौता न किए जाने वाला विषय बताया गया। साइबर सुरक्षा: डीपफेक से आपूर्ति शृंखला तक ब्रिक्स ने खुली, सुरक्षित, स्थिर, सुलभ, शांतिपूर्ण और परस्पर काम करने योग्य सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी व्यवस्था का समर्थन किया। देशों से संयुक्त राष्ट्र साइबर अपराध संधि पर हस्ताक्षर और अनुमोदन पर विचार करने की अपील की गई, ताकि वह जल्द प्रभावी हो सके। घोषणापत्र ने डिजिटल क्षेत्र के जिन खतरों का उल्लेख किया, उनमें दुर्भावनापूर्ण सॉफ्टवेयर, आंकड़ों की सुरक्षा, साइबर अपराध, गलत सूचना, घृणास्पद भाषण, दुष्प्रचार, डीपफेक और सूचना प्रौद्योगिकी आपूर्ति शृंखला की असुरक्षा शामिल हैं। ब्रिक्स ने कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दलों के बीच अनुभव साझा करने, कानून प्रवर्तन सहयोग और संयुक्त अनुसंधान एवं विकास का समर्थन किया। स्वास्थ्य कूटनीति: महामारी चेतावनी से मानसिक स्वास्थ्य तक नई दिल्ली घोषणापत्र स्वास्थ्य को लचीलेपन और मानव-केंद्रित विकास का महत्वपूर्ण आधार मानता है। 16वीं ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक चंडीगढ़ में हुई। घोषणापत्र ने तपेदिक को गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती मानते हुए संयुक्त अनुसंधान, साझा प्रौद्योगिकी और सहयोग की आवश्यकता बताई। संक्रामक रोगों, पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले खतरों, रोगाणुरोधी प्रतिरोध और स्वास्थ्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए मजबूत निगरानी, समय पर सूचना और त्वरित प्रतिक्रिया पर जोर दिया गया। महत्वपूर्ण स्वास्थ्य पहल बड़े संक्रामक रोगों की रोकथाम और प्रतिक्रिया के लिए ब्रिक्स एकीकृत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली हेतु अलग उपकार्य समूह, डिजिटल स्वास्थ्य संरचना पर ब्रिक्स संग्रह, ब्रिक्स स्वस्थ जीवनशैली मिशन, स्वस्थ जीवनशैली प्रोत्साहन की संयुक्त पहल के लिए 2026-2029 रोडमैप, मानसिक स्वास्थ्य के लिए ब्रिक्स प्रशिक्षण केंद्र नेटवर्क, उत्कृष्टता केंद्रों का नेटवर्क, जिसमें निमहांस समन्वयकारी केंद्र होगा, पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा पर विशेषज्ञ कार्य समूह का प्रस्ताव और ब्रिक्स टीका अनुसंधान एवं विकास केंद्र की गतिविधियों का समर्थन प्रारंभिक परीक्षा का तथ्य ब्रिक्स स्वस्थ जीवनशैली रोडमैप की अवधि 2026 से 2029 है और मानसिक स्वास्थ्य नेटवर्क के समन्वयकारी उत्कृष्टता केंद्र के रूप में निमहांस का उल्लेख किया गया है। खाद्य सुरक्षा: ब्रिक्स अनाज विनिमय से एग्रीन तक ब्रिक्स देशों ने स्वयं को विश्व खाद्य उत्पादन का महत्वपूर्ण भागीदार बताते हुए कृषि उत्पादकता, टिकाऊ कृषि, खाद्य सुरक्षा और पोषण में अपनी भूमिका स्वीकार की। घोषणापत्र में ब्रिक्स अनाज विनिमय मंच विकसित करने और बाद में उसे अन्य कृषि उत्पादों एवं वस्तुओं तक बढ़ाने पर चर्चा जारी रखने का समर्थन किया गया। इंदौर में 16वीं ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक आयोजित हुई। एग्रीन क्या है? ब्रिक्स ने सहयोगात्मक, गैर-बाध्यकारी और किसान-केंद्रित एग्रीन की स्थापना पर सहमति जताई। एग्रीन का पूरा नाम है—कृषि इनपुट, आनुवंशिक संसाधन और सूचना नेटवर्क। इसके अलावा बीज प्रणालियों में किसानों के अधिकारों पर वैश्विक मंच तथा कृषि-पारिस्थितिकी एवं पुनर्योजी कृषि के उत्कृष्टता केंद्रों का नेटवर्क बनाने का भी स्वागत किया गया। ऊर्जा सुरक्षा: जीवाश्म ईंधन भी, न्यायपूर्ण बदलाव भी घोषणापत्र ने ऊर्जा सुरक्षा को सामाजिक-आर्थिक विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और लोककल्याण की बुनियाद बताया। ब्रिक्स ने विविध स्रोतों से ऊर्जा का निर्बाध प्रवाह, स्थिर बाजार, मजबूत मूल्य शृंखला और सीमा पार महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा पर जोर दिया। दस्तावेज स्वीकार करता है कि जीवाश्म ईंधन अभी भी वैश्विक ऊर्जा मिश्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, विशेषकर उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में। साथ ही न्यायपूर्ण, व्यवस्थित, समान और समावेशी ऊर्जा बदलाव तथा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी की आवश्यकता बताई गई। उद्योग, स्टार्टअप और विज्ञान: घोषणापत्र का नवाचार पक्ष ब्रिक्स ने नई औद्योगिक क्रांति पर साझेदारी को मजबूत करने और उद्योग 4.0, स्टार्टअप, छोटे एवं मध्यम उद्यमों तथा तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने की बात कही। घोषणापत्र में सात विशेष औद्योगिक कार्य समूहों और 14 विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार कार्य समूहों का उल्लेख है। महत्वपूर्ण पहल ब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्क की स्थापना, ब्रिक्स स्टार्टअप नवाचार कोष पर आगे विचार, ब्रिक्स स्टार्टअप नॉलेज हब, आगरा में पहला ब्रिक्स लघु एवं मध्यम उद्यम मंच, भारत में ब्रिक्स औद्योगिक क्षमता केंद्र, चेन्नई सहमति संयुक्त घोषणापत्र, ब्रिक्स विज्ञान एवं अनुसंधान रिपॉजिटरी, ब्रिक्स ग्लोबल रिसर्च एडवांस्ड इन्फ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क केंद्रों का प्रस्ताव और क्वांटम प्रौद्योगिकी में सहयोग। ब्रिक्स विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार रूपरेखा कार्यक्रम ने दस वर्ष पूरे किए। इसके अवसर पर अक्टूबर 2026 में रूस में विशेष कार्यक्रम का उल्लेख किया गया है। समुद्र के नीचे केबल, ऊपर डिजिटल संप्रभुता घोषणापत्र ने समुद्र के भीतर बिछे केबल ढांचे को अंतरराष्ट्रीय डिजिटल संपर्क और नेटवर्क लचीलेपन की महत्वपूर्ण बुनियाद बताया। ब्रिक्स देशों के बीच उच्च गति वाला संचार नेटवर्क स्थापित करने के लिए तकनीकी एवं आर्थिक व्यवहार्यता अध्ययन पर संवाद जारी रखने का समर्थन किया गया। ब्रिक्स ने संप्रभु और आत्मनिर्भर डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में सहयोग बढ़ाने तथा डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और डिजिटल सार्वजनिक वस्तुओं की परिवर्तनकारी क्षमता को स्वीकार किया। ब्रिक्स देशों के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना रिपॉजिटरी और प्रायोगिक परियोजनाओं का प्रस्ताव भी दर्ज है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई): अवसर बड़ा, जोखिम भी गंभीर ब्रिक्स ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता को आर्थिक वृद्धि और टिकाऊ विकास का बड़ा अवसर बताया, लेकिन इसके सुरक्षित, विश्वसनीय, समावेशी और न्यायसंगत इस्तेमाल पर जोर दिया। फरवरी 2026 में भारत में आयोजित एआई इम्पैक्ट सम्मेलन की सफलता का उल्लेख करते हुए घोषणापत्र ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के वैश्विक शासन पर ब्रिक्स नेताओं के वक्तव्य को लागू करने की प्रतिबद्धता जताई। दस्तावेज में एआई प्रशिक्षण के लिए उपयोग होने वाली बौद्धिक संपदा के अधिकारों और अधिकारधारकों को उचित पारिश्रमिक देने की आवश्यकता भी बताई गई। घोषणापत्र ने चेताया कि आंकड़ा समूहों और एआई मॉडल में पर्याप्त प्रतिनिधित्व न होने पर ज्ञान, विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों की गलत प्रस्तुति या दुरुपयोग का खतरा पैदा हो सकता है। आपदा प्रबंधन: चेतावनी से पहले तैयारी जलवायु परिवर्तन से बढ़ते आपदा जोखिमों को देखते हुए ब्रिक्स ने राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण प्रणालियों, पारंपरिक एवं स्थानीय ज्ञान, समुदाय आधारित दृष्टिकोण और सुलभ वित्त पर जोर दिया। प्रमुख पहल आपदा प्रबंधन प्रारंभिक चेतावनी, आंकड़ा एकीकरण के लिए ब्रिक्स दिशा-निर्देश, जलवायु अनुकूल शहरी अवसंरचना के स्वैच्छिक सिद्धांत, साक्ष्य आधारित नीति, पूर्वानुमान आधारित कार्रवाई और जोखिम-सूचित योजना हैं। घोषणापत्र ने आपदा-रोधी अवसंरचना गठबंधन की भूमिका को भी स्वीकार किया। एमएसएमई: ऋण से वैश्विक मूल्य शृंखला तक ब्रिक्स ने सस्ते वित्त तक पहुंच को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के अंतरराष्ट्रीयकरण और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं में भागीदारी की प्रमुख बाधा माना। निर्यात-केंद्रित एमएसएमई के लिए ऋण मूल्यांकन रूपरेखा के मार्गदर्शक सिद्धांतों का स्वागत किया गया। जयपुर सहमति के तहत ब्रिक्स सदस्यों के लिए चालान छूट तंत्र की स्थापना का अध्ययन करने की बात कही गई, ताकि एमएसएमई अपनी कार्यशील पूंजी प्राप्त कर सकें और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में हिस्सेदारी बढ़ा सकें। ब्रिक्स वैश्विक मूल्य शृंखला कार्ययोजना 2026-2030 को आगे विकसित करने का समर्थन किया गया। सीमा पार भुगतान: स्थानीय मुद्राओं पर चर्चा जारी ब्रिक्स भुगतान कार्यबल ने सीमा पार भुगतान और संदेश प्रणालियों की परस्पर संचालन क्षमता का अध्ययन किया है।घोषणापत्र में राष्ट्रीय प्राथमिकताओं का सम्मान करते हुए ब्रिक्स की स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान और निवेश पर हुई चर्चा का उल्लेख है। लक्ष्य है कि सदस्य देशों के बीच सीमा पार भुगतान तेज हो, कम लागत वाला हो, अधिक सुलभ हो, पारदर्शी हो और सुरक्षित हो। घोषणापत्र यह भी स्वीकार करता है कि सभी देशों के लिए एक ही समाधान उपयुक्त नहीं हो सकता। परीक्षा में सावधानी दस्तावेज ने किसी साझा ब्रिक्स मुद्रा की घोषणा नहीं की है। इसमें स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान और बेहतर सीमा पार भुगतान व्यवस्था पर चर्चा का उल्लेख है। दोनों बातों को एक समझना गलत होगा। गिफ्ट सिटी में ब्रिक्स रिस्क लैब का प्रस्ताव ब्रिक्स ने सदस्य देशों के बीच व्यापार को समर्थन देने के लिए अधिक आत्मनिर्भर बीमा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की जरूरत बताई। घोषणापत्र में साझा जोखिम मॉडल, सर्वोत्तम प्रक्रियाओं और विशेषज्ञ क्षमता के लिए ब्रिक्स बीमा लचीलापन केंद्र की अवधारणा पर चर्चा जारी रखने का स्वागत किया गया। भारत ने गुजरात के गिफ्ट सिटी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र में ब्रिक्स रिस्क लैब की मेजबानी का प्रस्ताव रखा है। इसमें इच्छुक सदस्य स्वैच्छिक रूप से भाग ले सकते हैं। वित्तीय सुरक्षा: आकस्मिक रिजर्व व्यवस्था और न्यू डेवलपमेंट बैंक ब्रिक्स आकस्मिक रिजर्व व्यवस्था को संकट के समय अधिक लचीला और प्रभावी बनाने के लिए संधि में संशोधन का उल्लेख किया गया है। घोषणापत्र ने नौवें परीक्षण अभ्यास को समय पर पूरा करने और “वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं तथा ब्रिक्स पर उनके प्रभाव” विषय पर ब्रिक्स आर्थिक बुलेटिन का सातवां संस्करण जारी करने की अपेक्षा जताई। न्यू डेवलपमेंट बैंक को ग्लोबल साउथ की विकास और अवसंरचना जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण संस्था बताया गया। 14 से 15 मई 2026 को मॉस्को में बैंक की 11वीं वार्षिक बैठक आयोजित हुई। भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स-एनडीबी ज्ञान पोर्टल शुरू किया गया, जो सदस्य देशों के विकास अनुभव, नीतिगत नवाचार और बैंक द्वारा वित्तपोषित परियोजनाओं से मिली सीख को एक जगह लाता है। जलवायु न्याय: वित्त, तकनीक और साझा लेकिन अलग जिम्मेदारियां ब्रिक्स ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा अभिसमय और पेरिस समझौते के पूर्ण एवं प्रभावी क्रियान्वयन की प्रतिबद्धता दोहराई। घोषणापत्र ने समानता तथा “साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियां और संबंधित क्षमताएं” सिद्धांत को फिर प्रमुखता दी। समूह ने कहा कि विकसित देशों को विकासशील देशों के अनुकूलन प्रयासों के लिए अतिरिक्त, पर्याप्त, अनुमानित और सुलभ वित्त, क्षमता निर्माण तथा प्रौद्योगिकी विकास एवं हस्तांतरण उपलब्ध कराना चाहिए। कार्बन सीमा समायोजन जैसे एकतरफा, दंडात्मक, भेदभावपूर्ण और संरक्षणवादी उपायों का विरोध किया गया। ब्रिक्स ने ब्राजील की कॉप-30 अध्यक्षता के सफल समापन की सराहना की और इथियोपिया की कॉप-32 अध्यक्षता का समर्थन किया। जैव विविधता, वन और भारत की बिग कैट पहल घोषणापत्र ने जैव विविधता अभिसमय, उसके प्रोटोकॉल और कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। भारत की अंतरराष्ट्रीय बिग कैट्स गठबंधन पहल का उल्लेख करते हुए ब्रिक्स देशों को बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण के लिए मिलकर काम करने को प्रोत्साहित किया गया। वन संरक्षण से जुड़े प्रमुख बिंदुओं में एकीकृत परिदृश्य आधारित हरियाली और भूमि पुनर्स्थापन के ब्रिक्स सिद्धांत, जंगल की आग की तैयारी एवं प्रतिक्रिया पर साझा समझ, उष्णकटिबंधीय वन संरक्षण के लिए दीर्घकालिक परिणाम-आधारित वित्त औरमैंग्रोव संरक्षण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग शामिल हैं। जल और स्वच्छता: दिसंबर 2026 का सम्मेलन घोषणापत्र में संयुक्त अरब अमीरात और सेनेगल की सह-मेजबानी में 8 से 10 दिसंबर 2026 तक अबू धाबी में होने वाले संयुक्त राष्ट्र जल सम्मेलन का उल्लेख है। यह सम्मेलन टिकाऊ विकास लक्ष्य-6 यानी सभी के लिए जल और स्वच्छता की उपलब्धता एवं टिकाऊ प्रबंधन की दिशा में प्रगति तेज करने से जुड़ा है। महिला, शिक्षा और श्रम: समाज-केंद्रित ब्रिक्स कोच्चि में आयोजित ब्रिक्स महिला मंत्रिस्तरीय बैठक महिला-नेतृत्व वाले विकास और महिलाओं के सर्वांगीण विकास की सोच पर आधारित थी। घोषणापत्र ने महिलाओं को नेतृत्वकर्ता, निर्णयकर्ता, आर्थिक विकास और सामाजिक परिवर्तन की चालक शक्ति माना। महिला उद्यमिता, वित्तीय एवं डिजिटल समावेशन, कौशल, जलवायु कार्रवाई और शांति निर्माण में उनकी भूमिका पर जोर दिया गया। भुवनेश्वर में 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक हुई। शिक्षा सहयोग में कौशल विकास, डिजिटल साक्षरता, प्रारंभिक बाल देखभाल एवं शिक्षा, बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान, योग्यता की पारस्परिक मान्यता और शिक्षा में सुरक्षित तथा मानव-केंद्रित एआई के उपयोग को शामिल किया गया। श्रम के क्षेत्र में गिग और मंच आधारित अर्थव्यवस्था के श्रमिकों तक सामाजिक सुरक्षा पहुंचाने, सीमा पार जाने वाले श्रमिकों के लाभों की पोर्टेबिलिटी और भविष्य के कौशल का अनुमान लगाने पर जोर दिया गया। ब्रिक्स कनेक्ट नामक क्षमता निर्माण, रोजगार योग्यता तथा नए कौशल एवं प्रौद्योगिकी नेटवर्क को अपनाने का स्वागत किया गया। संस्कृति और विरासत: भोपाल घोषणापत्र से वेव्स बाजार तक 11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक में भोपाल घोषणापत्र अपनाया गया। ब्रिक्स ने संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में सांस्कृतिक विरासत की रक्षा, सांस्कृतिक वस्तुओं की अवैध तस्करी रोकने तथा आध्यात्मिक, पैतृक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की वस्तुओं को उनके मूल देशों में वापस भेजने पर जोर दिया। ब्रिक्स संस्कृति महोत्सव, वेव्स बाजार, ब्रिक्स रंगमंच महोत्सव और ब्रिक्स फिल्म महोत्सव को लोगों के बीच संबंध मजबूत करने वाले मंचों के रूप में मान्यता दी गई। पर्यटन, खेल और शहरी विकास जयपुर में आयोजित पर्यटन मंत्रियों की बैठक ने टिकाऊ, समावेशी, स्मार्ट और लचीले पर्यटन पर जोर दिया। ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, प्रकृति आधारित, भोजन और स्वास्थ्य पर्यटन को बढ़ावा देने की बात कही गई। ब्रिक्स खेल सामग्री विनिर्माण सम्मेलन का प्रस्ताव रखा गया और खेल प्रौद्योगिकी पर कार्य समूह बनाने की चर्चा को प्रोत्साहित किया गया। नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शहरीकरण मंच ने सुरक्षित और सस्ते आवास, जल एवं स्वच्छता, टिकाऊ परिवहन, अपशिष्ट प्रबंधन और रहने योग्य शहरों पर जोर दिया। ब्रिक्स शहरी अनुसंधान एवं ज्ञान नेटवर्क की स्थापना का स्वागत किया गया। 2027 में चीन संभालेगा कमान घोषणापत्र के अंतिम हिस्से में भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता और नई दिल्ली में 18वें शिखर सम्मेलन के आयोजन की सराहना की गई। सदस्य देशों ने 2027 की ब्रिक्स अध्यक्षता और 19वें शिखर सम्मेलन के आयोजन के लिए चीन को पूर्ण समर्थन दिया। ब्रिक्स: संक्षिप्त परिचय औपचारिक स्थापना: वर्ष 2006 संस्थापक देश: ब्राजील, रूस, भारत और चीन पहला शिखर सम्मेलन: वर्ष 2009, येकातेरिनबर्ग (रूस) दक्षिण अफ्रीका का प्रवेश: वर्ष 2010; पहली बार 2011 के शिखर सम्मेलन में भाग लिया विस्तार: मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात 2024 में जुड़े इंडोनेशिया का प्रवेश: जनवरी 2025 कुल सदस्य: 10 वर्तमान सदस्य: ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया प्रकृति: संधि-आधारित औपचारिक संगठन नहीं, बल्कि आम सहमति से चलने वाला अंतर-सरकारी मंच प्रमुख उद्देश्य: सदस्य देशों में राजनीतिक-सुरक्षा, आर्थिक-वित्तीय और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाना वैश्विक भूमिका: ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करना और वैश्विक शासन को अधिक न्यायपूर्ण एवं प्रतिनिधिक बनाना सुधार का एजेंडा: संयुक्त राष्ट्र, सुरक्षा परिषद, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और विश्व व्यापार संगठन जैसी संस्थाओं में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाना प्रारंभिक परीक्षा के लिए 15 तथ्य एक नजर में 1. 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में 12-13 सितंबर 2026 को आयोजित हुआ। 2. वर्ष 2026 में ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ का उल्लेख किया गया। 3. भारत की अध्यक्षता में 30 शहरों में 400 से अधिक बैठकें और कार्यक्रम हुए। 4. ब्रिक्स सहयोग तीन स्तंभों पर आधारित है। 5. नई दिल्ली घोषणापत्र में 140 क्रमांकित अनुच्छेद हैं। 6. चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र में भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका की आकांक्षा का समर्थन किया। 7. आतंकवाद-रोधी कार्य समूह के पांच उपसमूह हैं। 8. 22 अप्रैल 2025 के जम्मू-कश्मीर हमले में 26 मौतों का उल्लेख है। 9. ब्रिक्स स्वस्थ जीवनशैली रोडमैप की अवधि 2026-2029 है। 10. मानसिक स्वास्थ्य उत्कृष्टता केंद्रों के नेटवर्क में निमहांस समन्वयकारी केंद्र होगा। 11. 16वीं कृषि मंत्रियों की बैठक इंदौर में हुई। 12. सात विशेष औद्योगिक और 14 विज्ञान-प्रौद्योगिकी-नवाचार कार्य समूहों का उल्लेख है। 13. भारत ने गिफ्ट सिटी में ब्रिक्स रिस्क लैब की मेजबानी का प्रस्ताव रखा। 14. संयुक्त राष्ट्र जल सम्मेलन 8-10 दिसंबर 2026 को अबू धाबी में प्रस्तावित है। 15. वर्ष 2027 की ब्रिक्स अध्यक्षता और 19वां शिखर सम्मेलन चीन में होगा। मुख्य परीक्षा में उत्तर लिखने का तैयार ढांचा प्रश्न: वैश्विक शासन में सुधार के मंच के रूप में ब्रिक्स की भूमिका का परीक्षण कीजिए। भूमिका: ब्रिक्स ग्लोबल साउथ की बढ़ती आर्थिक और राजनीतिक आकांक्षाओं का मंच है। मुख्य भाग: संयुक्त राष्ट्र एवं सुरक्षा परिषद में प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक में कोटा एवं शेयरधारिता सुधार विश्व व्यापार संगठन की विवाद निपटान व्यवस्था की बहाली विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्त और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण स्थानीय मुद्रा में व्यापार और सुलभ सीमा पार भुगतान स्वास्थ्य, कृषि, एआई, साइबर सुरक्षा और आपदा प्रबंधन में संस्थागत सहयोग चुनौतियां: सदस्य देशों की अलग-अलग राष्ट्रीय प्राथमिकताएं सभी निर्णयों के लिए आम सहमति की जरूरत घोषणाओं को व्यावहारिक परिणामों में बदलना विस्तारित सदस्यता के बीच संस्थागत समन्वय वैश्विक संकटों पर राष्ट्रीय दृष्टिकोणों का अंतर निष्कर्ष: ब्रिक्स की प्रासंगिकता केवल पश्चिमी संस्थाओं के विकल्प के रूप में नहीं बल्कि मौजूदा बहुपक्षीय संस्थाओं को अधिक प्रतिनिधिक और उत्तरदायी बनाने की उसकी क्षमता में निहित है। संभावित मुख्य परीक्षा प्रश्न 1. नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 के संदर्भ में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार की आवश्यकता का परीक्षण कीजिए। 2. क्या ब्रिक्स ग्लोबल साउथ की आवाज को वैश्विक शासन में प्रभाव में बदल सकता है? विश्लेषण कीजिए। 3. स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने से ब्रिक्स देशों को क्या अवसर और चुनौतियां मिल सकती हैं? 4. आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस और दोहरे मापदंडों के विरोध का भारत की सुरक्षा नीति के लिए क्या महत्व है? 5. नई दिल्ली घोषणापत्र में खाद्य, ऊर्जा और स्वास्थ्य सुरक्षा के बीच अंतर्संबंधों की व्याख्या कीजिए। 6. ब्रिक्स की एआई शासन संबंधी दृष्टि ग्लोबल साउथ की चिंताओं को किस प्रकार सामने लाती है? 7. जलवायु न्याय के संदर्भ में विकसित और विकासशील देशों की जिम्मेदारियों पर ब्रिक्स के दृष्टिकोण का मूल्यांकन कीजिए। 8. नई दिल्ली घोषणापत्र में भारत द्वारा प्रस्तावित संस्थागत पहलों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। निष्कर्ष: घोषणापत्र नहीं, परीक्षा का बहुविषयी मानचित्र नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 को केवल ब्रिक्स का कूटनीतिक बयान मानकर पढ़ना इसकी उपयोगिता को सीमित कर देगा। यह यूपीएससी अभ्यर्थियों के लिए अंतरराष्ट्रीय संबंध, वैश्विक अर्थव्यवस्था, आतंकवाद, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, एआई, महिला सशक्तीकरण और संस्कृति को आपस में जोड़ने वाला बहुविषयी दस्तावेज है। इस घोषणापत्र की सबसे महत्वपूर्ण धुरी है- प्रतिनिधित्व से भागीदारी, भागीदारी से प्रभाव और प्रभाव से अधिक न्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था की ओर बढ़ना। सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी के लिहाज से इसे तथ्यों की लंबी सूची की तरह रटने के बजाय पांच बड़े शब्दों में याद रखना बेहतर होगा- सुधार, सुरक्षा, समावेशन, संप्रभुता और टिकाऊपन।