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मुंबई। वैश्विक स्तर पर तेल की बढ़ती कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बढ़ी चिंताओं के बीच गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में चौतरफा बिकवाली हुई, जिससे सेंसेक्स 1,247.71 अंक यानी 1.67 प्रतिशत टूटकर 14 सप्ताह के निचले स्तर 73,580.54 अंक और निफ्टी 383.70 अंक यानी 1.64 प्रतिशत गिरकर 23,063.10 पर बंद हुआ। सेंसेक्स में करीब 1250 अंकों की बड़ी गिरावट बाजार में शुरुआत से ही दबाव दिखाई दिया। सेंसेक्स 74,272.40 अंक पर खुला और कारोबार के दौरान 74,362.29 के ऊपरी स्तर तक पहुंचा लेकिन बिकवाली तेज होने के बाद यह 73,563.92 के निचले स्तर तक लुढ़क गया। आखिर में सेंसेक्स पिछले बंद स्तर 74,828.25 के मुकाबले 1,247.71 अंक टूटकर 73,580.54 पर बंद हुआ। निफ्टी की हालत भी खराब रही। निफ्टी 23,221.80 पर खुला और कारोबार के दौरान 23,281.95 के उच्च स्तर तक पहुंचा, लेकिन बिकवाली के दबाव में 23,046.15 तक फिसल गया। अंत में यह 383.70 अंक गिरकर 23,063.10 पर बंद हुआ। मिडकैप और स्मॉलकैप पर भी बिकवाली की मार बाजार में गिरावट केवल सेंसेक्स और निफ्टी के दिग्गज शेयरों तक सीमित नहीं रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी निवेशकों ने बिकवाली का दबाव बनाया। बीएसई 150 मिडकैप सूचकांक 2.05 प्रतिशत की गिरावट के साथ 16,619.81 पर आ गया। वहीं बीएसई 250 स्मॉलकैप सूचकांक 1.24 प्रतिशत टूटकर 7,149.41 पर पहुंच गया। बैंकिंग और फाइनेंस शेयरों में मचा कोहराम सेक्टर के लिहाज से देखें तो बाजार में लगभग हर तरफ लाल निशान दिखाई दिया। सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयरों पर रहा। मिडस्मॉल प्राइवेट बैंक सूचकांक में 2.81 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई। हाउसिंग फाइनेंस सूचकांक 2.56 प्रतिशत , फाइनेंशियल सर्विसेज 2.33 प्रतिशत , टेलीकम्युनिकेशन 2.31 प्रतिशत और इंश्योरेंस सूचकांक 2.20 प्रतिशत टूट गया। इसके अलावा बैंकएक्स में 1.88 प्रतिशत , प्राइवेट बैंक सूचकांक में 1.85 प्रतिशत , टॉप-10 बैंक सूचकांक में 1.74 प्रतिशत , मेटल में 1.65 प्रतिशत और ऑटो सूचकांक में 1.64 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इंडस्ट्रियल्स 1.47 प्रतिशत, सर्विसेज 1.43 प्रतिशत, कमोडिटीज 1.37 प्रतिशत, पावर 1.31 प्रतिशत, यूटिलिटीज 1.26 प्रतिशत और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.20 प्रतिशत नीचे रहे। एफएमसीजी में 1.02 प्रतिशत, पीएसयू बैंक में 1 प्रतिशत, रियल्टी में 0.97 प्रतिशत, ऑयल एंड गैस में 0.88 प्रतिशत, हॉस्पिटल्स में 0.79 प्रतिशत और आईटी में 0.72 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। बजाज फाइनेंस 5.47% धड़ाम, एक्सिस बैंक भी बुरी तरह टूटा दिग्गज शेयरों में बजाज फाइनेंस पर सबसे ज्यादा मार पड़ी। इसका शेयर 5.47 प्रतिशत गिरकर 983.15 रुपये पर आ गया। एक्सिस बैंक 4.67 प्रतिशत टूटकर 1,186.50 रुपये , जबकि बजाज फिनसर्व 4.06 प्रतिशत गिरकर 1,771 रुपये पर आ गया। इंडिगो का शेयर 2.78 प्रतिशत गिरकर 4,890 रुपये और ट्रेंट 2.75 प्रतिशत टूटकर 2,704 रुपये पर आ गया। महिंद्रा एंड महिंद्रा में 2.31 प्रतिशत की गिरावट रही। रिलायंस से भारती एयरटेल तक दबाव दिग्गज रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 2.25 प्रतिशत गिरकर 1,219 रुपये पर आ गया। एशियन पेंट्स 2.22 प्रतिशत, भारती एयरटेल 2.18 प्रतिशत और लार्सन एंड टुब्रो 2.11 प्रतिशत नीचे रहे। कोटक महिंद्रा बैंक में 1.86 प्रतिशत, इटरनल में 1.75 प्रतिशत, मारुति सुजुकी में 1.57 प्रतिशत और भारतीय स्टेट बैंक में 1.51 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। अडान पोर्ट्स 1.34 प्रतिशत, पावर ग्रिड 1.26 प्रतिशत, टाटा स्टील 1.23 प्रतिशत और एचडीएफसी बैंक 1.16 प्रतिशत नीचे रहा।टाइटन, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, इन्फोसिस, अल्ट्राटेक सीमेंट, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एचसीएल टेक, आईटीसी, सन फार्मा, टेक महिंद्रा, टीसीएस और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। तेल की कीमत और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ने बढ़ाई टेंशन बाजार विश्लेषकों के अनुसार, शेयर बाजार पर कई वैश्विक चिंताओं का एक साथ असर दिखाई दिया। तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई को लेकर चिंता बढ़ाई , जिससे निवेशकों के सेंटीमेंट पर दबाव पड़ा। इसके साथ ही अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल भी बाजार के लिए चिंता का कारण बना। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के 19 साल के उच्च स्तर तक पहुंचने और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दर बढ़ाए जाने की उम्मीद ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई। जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच तेल की बढ़ती कीमतों ने भी निवेशकों का भरोसा प्रभावित किया। एशियाई बाजारों में मिला-जुला माहौल एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में तस्वीर मिली-जुली रही। हांगकांग का हैंग सेंग 0.29 प्रतिशत नीचे रहा, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट 1.22 प्रतिशत गिरा। इसके उलट दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.90 प्रतिशत चढ़ा और जापान का निक्केई 0.76 प्रतिशत बढ़त में रहा। आगे भी रह सकता है भारी उतार-चढ़ाव वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम के आधार पर बाजार में उतार-चढ़ाव आगे भी जारी रह सकता है। तेल की कीमतों से लेकर महंगाई, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़े संकेतों तक कई वैश्विक कारक फिलहाल निवेशकों की नजर में हैं। गुरुवार की बड़ी गिरावट ने साफ तौर पर भारतीय शेयर बाजार पर बने दबाव को सामने ला दिया है।