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पटना। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने राज्य सरकार के परमाणु क्षेत्र के हालिया निवेश समझौतों पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने महज 11 लाख रुपये की पूंजी और फरवरी 2026 में बनी एक कंपनी के साथ 22,500 करोड़ रुपये के निवेश का एमओयू किया है। श्री यादव ने शुक्रवार को दावा किया कि सरकार जिस कंपनी के साथ 22,500 करोड़ रुपये के निवेश का एमओयू कर अपनी पीठ थपथपा रही है, उसकी कुल पूंजी महज 11 लाख रुपये है और कंपनी का गठन भी सिर्फ पांच महीने पहले हुआ है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि जिस कंपनी की हैसियत एक स्कूल या मकान की चारदीवारी बनाने की नहीं है, वह आखिर बिहार में परमाणु क्षेत्र में हजारों करोड़ रुपये का निवेश कैसे करेगी? '11 लाख की जेब, 22,500 करोड़ का वादा' नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार जिस निवेश को बिहार की सबसे बड़ी उपलब्धि बता रही है, उसकी बुनियाद ही सवालों के घेरे में है। उन्होंने दावा किया कि संबंधित कंपनी फरवरी 2026 में बनी और उसकी अधिकृत पूंजी सिर्फ 11 लाख रुपये है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर हजारों करोड़ रुपये के निवेश का दावा किस आधार पर किया जा रहा है। 'पुराने एमओयू का क्या हुआ, पहले उसका हिसाब दीजिए' श्री यादव ने कहा कि सरकार इस समय करीब 51,500 करोड़ रुपये के नए निवेश समझौतों का जोर-शोर से प्रचार कर रही है। लेकिन, 2024, 2025 और उससे पहले दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के जिन एमओयू पर हस्ताक्षर हुए थे, उनका क्या नतीजा निकला? कितने उद्योग लगे, कितने रोजगार बने और कितना निवेश जमीन पर उतरा? सरकार इस पर चुप क्यों है? 'कहीं कागजी निवेश का खेल तो नहीं' नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि कहीं ऐसा तो नहीं कि कागजों पर बनी कंपनियों को बड़े निवेशक दिखाकर सरकारी जमीन और सब्सिडी देने की तैयारी की जा रही हो। उन्होंने कहा कि अगर कंपनियां नाममात्र की कीमत पर जमीन लें, सरकारी सहायता हासिल करें और बाद में परियोजनाएं शुरू ही न करें, तो इसका नुकसान बिहार की जनता को होगा। 'बड़ी कंपनियां आएं, खुलकर स्वागत करेंगे' श्री यादव ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी किसी निवेश के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि देश और दुनिया की बड़ी कंपनियां बिहार में उद्योग लगाती हैं, अपनी पूंजी निवेश करती हैं और युवाओं को रोजगार देती हैं, तो उनका पूरा समर्थन किया जाएगा। लेकिन, केवल कागजी समझौतों को विकास बताना जनता के साथ धोखा होगा। एनडीए सरकार की औद्योगिक नीति पर सवाल राजद नेता ने कहा कि दो दशक से ज्यादा समय से बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार है, फिर भी राज्य ऐसा माहौल नहीं बना पाया कि बड़ी कंपनियां भरोसे के साथ निवेश करें। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जमीनी विकास से ज्यादा प्रचार पर भरोसा कर रही है। 'जांच हुई या सिर्फ दस्तखत?' नेता प्रतिपक्ष ने पूछा कि जिस कंपनी के साथ हजारों करोड़ रुपये का एमओयू किया गया, उसकी वित्तीय क्षमता, अनुभव और परियोजना को लेकर सरकार ने क्या जांच की? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अधिकारियों और मंत्रियों ने किसी तरह की पड़ताल की या केवल कागजों पर हस्ताक्षर कर दिए गए? सरकार से मांगे सीधे जवाब तेजस्वी यादव ने सरकार से मांग की कि वह बताए, 22,500 करोड़ रुपये के निवेश का दावा करने वाली कंपनी की वास्तविक वित्तीय क्षमता क्या है? पिछले वर्षों में हुए दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के एमओयू का क्या परिणाम निकला?बिहार में अब तक कितने निवेश धरातल पर उतरे और कितने सिर्फ कागजों तक सीमित रहे?