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मुंबई: जब फिल्मों की बात होती है तो दिमाग में एक्शन, रोमांस, वॉर या थ्रिलर आता है, लेकिन क्या कभी सोचा है कि अर्थव्यवस्था भी किसी दमदार फिल्म की कहानी बन सकती है? निर्देशक चिन्मय मांडलेकर ने यही कर दिखाया है। उनकी फिल्म 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर' इन दिनों सिनेमाघरों में शानदार रिस्पॉन्स बटोर रही है। हाल ही में उन्होंने बताया कि आखिर इस अनोखी कहानी की शुरुआत कैसे हुई। एक आइडिया... चार साल की मेहनत... फिर बनी 'गवर्नर' चिन्मय मांडलेकर ने खुलासा किया कि फिल्म का आइडिया 1990 के आर्थिक संकट से निकला था। सबसे पहले यह कहानी उनकी राइटिंग टीम के एक लेखक के पास थी, जिसने इसे निर्माता विपुल शाह तक पहुंचाया। इसके बाद करीब चार साल तक स्क्रिप्ट पर लगातार काम किया गया। उन्होंने बताया, "2025 में यह फिल्म मेरे पास आई। तब तक स्क्रिप्ट काफी मजबूत बन चुकी थी। हमने उसमें दो-तीन राउंड और बदलाव किए और फिर 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर' तैयार हुई।" "हर कोई वॉर पर फिल्म बनाता है... मैंने इकोनॉमी चुनी" चिन्मय का कहना है कि यही बात उन्हें सबसे ज़्यादा एक्साइटिंग लगी कि आर्थिक संकट जैसे विषय पर फिल्में बहुत कम बनती हैं। उन्होंने कहा, "हमने युद्ध, महामारी, प्राकृतिक आपदा और सामाजिक मुद्दों पर कई फिल्में देखी हैं, लेकिन अर्थव्यवस्था पर बहुत कम कहानियां बड़े पर्दे तक पहुंचती हैं। यही वजह थी कि मैंने इस फिल्म को डायरेक्ट करने का फैसला किया।" मनोज बाजपेयी और चिन्मय की जोड़ी फिर हुई हिट 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर' में चिन्मय मांडलेकर ने अभिनेता मनोज बाजपेयी के साथ दूसरी बार काम किया है। फिल्म को दर्शकों के साथ-साथ क्रिटिक्स से भी जबरदस्त तारीफ मिल रही है। पॉजिटिव रिव्यू और ऑडियंस का प्यार इस जोड़ी को एक बार फिर सक्सेसफुल डायरेक्टर-एक्टर कॉम्बिनेशन साबित कर रहा है। कंटेंट है किंग... और 'गवर्नर' इसकी नई मिसाल 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर' यह साबित करती है कि अगर कहानी दमदार हो तो विषय कितना भी गंभीर क्यों न हो, वह दर्शकों को बांध सकता है। बिना शोर-शराबे और बड़े दावों के, यह फिल्म मजबूत कंटेंट और शानदार स्टोरीटेलिंग के दम पर अपनी अलग पहचान बना रही है।