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मुंबई: होर्मुज के आसपास तनाव कम होने से कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और ब्याज दरों को लेकर फेडरल रिजर्व के नरम रुख से उत्साहित निवेशकों को लिवाली के दम पर बीते सप्ताह एक फीसदी से अधिक उछले घरेलू शेयर बाजार की दिशा अगले सप्ताह फेड के जारी होने वाले मिनट्स, कंपनियों के तिमाही नतीजे, मॉनसून की प्रगति तथा जापान, ब्रिटेन एवं अमेरिका के साथ जारी व्यापार वार्ताओं से तय होगी। एक हफ्ते में 1000 अंक से ज्यादा उछला सेंसेक्स बीते सप्ताह बीएसई का सेंसेक्स 1035.54 अंक यानी 1.34% चढ़कर 77,763.91 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 214.85 अंक यानी 0.9% की तेजी के साथ 24,270.85 पर पहुंच गया। बाजार में तेजी सिर्फ बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। * बीएसई मिडकैप 190.23 अंक यानी 1.14% चढ़कर 16,778.28 पर बंद हुआ * स्मॉलकैप इंडेक्स 124.97 अंक यानी 1.8% उछलकर 7,120.39 पर पहुंच गया। यानी बाजार में सिर्फ इंडेक्स नहीं, बल्कि ब्रोड-बेस्ड खरीदारी दिखी। हफ्ते की शुरुआत में मुनाफावसूली, फिर बदला माहौल सप्ताह की शुरुआत उतनी मजबूत नहीं थी। निवेशक अमेरिका-ईरान शांति समझौते की स्थिरता , तिमाही नतीजों से पहले सतर्कता और मानसून की धीमी शुरुआत को लेकर सावधान थे, जिसके चलते शुरुआती दिनों में मुनाफावसूली देखने को मिली। लेकिन, जैसे-जैसे हफ्ता आगे बढ़ा, बाजार का मूड बदलता गया। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव कम होने से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई और इससे बाजार को राहत मिली। इसके साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नरम रुख और कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों ने यह उम्मीद मजबूत की कि वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर दबाव कम हो सकता है। यही वह ट्रिगर रहा, जिसने बाजार में नई खरीदारी को हवा दी। भारत-जापान वार्ता से भी बढ़ा बाजार का भरोसा घरेलू बाजार के लिए एक और बड़ा पॉजिटिव फैक्टर रहा भारत-जापान शिखर बैठक को लेकर बना आशावाद। निवेशकों को उम्मीद है कि इस बातचीत से व्यापार, रक्षा, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रुपये-येन भुगतान ढांचे जैसे अहम क्षेत्रों में प्रगति हो सकती है। इस उम्मीद ने बाजार के सेंटीमेंट को और मजबूत किया, खासकर ऐसे समय में जब विदेशी संकेत भी थोड़े राहत भरे दिखे। इन सेक्टरों ने दिखाई ताकत, पीएसयू बैंक और एनर्जी पिछड़े सेक्टोरल स्तर पर बीते हफ्ते रियल एस्टेट, फार्मा और हेल्थकेयर शेयर सबसे मजबूत नजर आए। वहीं, आईटी सेक्टर में भी शानदार वापसी देखने को मिली। आईटी शेयरों में तेजी की एक वजह शॉर्ट कवरिंग रही, लेकिन इसके साथ-साथ यह धारणा भी मजबूत हुई कि एंटरप्राइज AI के दौर में भारतीय आईटी कंपनियों की भूमिका और बढ़ सकती है। हाल के कुछ बड़े डील्स ने इस थीम को और ताकत दी। दूसरी ओर पीएसयू बैंक और एनर्जी शेयर बाजार की रफ्तार से कदम नहीं मिला सके और इनमें दबाव बना रहा। अब अगले हफ्ते किन ट्रिगर्स पर टिकी है नजर बाजार के लिए अब सबसे अहम सवाल यह है कि अगले हफ्ते तेजी जारी रहेगी या फिर उतार-चढ़ाव बढ़ेगा। इसका जवाब कुछ बड़े ट्रिगर्स में छिपा है: * अमेरिकी एफओएमसी मिनट्स * घरेलू कंपनियों के जून तिमाही नतीजे * मानसून की प्रगति * क्रेडिट ग्रोथ के आंकड़े * जापान, ब्रिटेन और अमेरिका के साथ जारी व्यापार वार्ताएं अगले हफ्ते टीसीएस और इंडियन बैंक जैसी बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे आने वाले हैं। ऐसे में आईटी और बैंकिंग सेक्टर पर खास नजर रहेगी। क्या कहते हैं एक्सपर्ट निवेश सलाह देने वाली कंपनी जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा फेड के मिनट्स, घरेलू नतीजों, मानसून, क्रेडिट ग्रोथ और ग्लोबल ट्रेड वार्ताओं से तय होगी। उनके मुताबिक, कमाई के अनुमान में कटौती, मानसून से जुड़ी महंगाई की आशंका और विदेशी निवेशकों की सतर्कता जैसे जोखिम अभी भी बने हुए हैं। हालांकि अच्छी बात यह है कि बाजार काफी हद तक इन जोखिमों को पहले ही कीमतों में समाहित कर चुका है। ऐसे में अगर कोई नया बड़ा नकारात्मक झटका नहीं आता, तो बाजार गिरावट पर खरीदारी की रणनीति के साथ आगे बढ़ सकता है। बाजार का मूड क्या कह रहा है फिलहाल बाजार का संकेत साफ है, "घबराहट नहीं, लेकिन आंख मूंदकर तेजी भी नहीं।" निवेशक अब चुनिंदा सेक्टरों और मजबूत कंपनियों पर फोकस कर रहे हैं। खासकर लार्जकैप शेयर अभी भी अपेक्षाकृत सुरक्षित और मजबूत विकल्प माने जा रहे हैं, क्योंकि उनकी कमाई की स्थिति बेहतर और वैल्यूएशन अपेक्षाकृत संतुलित है। निवेशकों के लिए क्या संकेत अगर अगले हफ्ते * फेड के मिनट्स राहत भरे रहे, * तिमाही नतीजे उम्मीद के मुताबिक आए, * और मानसून सामान्य रफ्तार पकड़ता दिखा, तो बाजार में तेजी का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है। लेकिन अगर नतीजों में कमजोरी, महंगाई का दबाव या विदेशी बिकवाली बढ़ी, तो बाजार में उतार-चढ़ाव भी तेज हो सकता है। यानी फिलहाल बाजार का मंत्र यही है, “गिरावट पर खरीददारी, लेकिन चुनिंदा शेयरों में” ।