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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ करीब 50 मिनट की द्विपक्षीय वार्ता में सीमा संबंधी मौजूदा समझौतों और सहमतियों के पालन पर जोर देते हुए कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता दोनों देशों के संबंधों की निरंतर प्रगति का जरूरी आधार है और मतभेदों को विवादों में नहीं बदलने देना चाहिए। सीमा पर शांति के बिना संबंधों की रफ्तार संभव नहीं वार्ता में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने स्पष्ट किया कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता भारत तथा चीन के द्विपक्षीय संबंधों के लगातार विकास के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सीमा से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच जो मौजूदा समझौते और सहमतियां हैं, उनका दोनों पक्षों को पालन करना चाहिए। संदेश सीधा था—सीमा पर बनी सहमति केवल दस्तावेजों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीन पर भी उसका प्रभाव दिखाई दे। संबंधों की दिशा तय करेंगे तीन मंत्र दोनों नेताओं ने दोहराया कि भारत और चीन को अपने संबंधों को तात्कालिक घटनाओं के बजाय रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखना चाहिए। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों को तीन प्रमुख बातों से मार्गदर्शन लेना चाहिए— परस्पर सम्मान आपसी संवेदनशीलता आपसी हित इन तीन आधारों के साथ ही दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि मतभेदों को विवाद का रूप नहीं लेने देना चाहिए। सीमा विवाद के निष्पक्ष और स्वीकार्य समाधान पर प्रतिबद्धता श्री मोदी और श्री जिनपिंग ने व्यापक द्विपक्षीय संबंधों के राजनीतिक नजरिए तथा दोनों देशों के लोगों के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए सीमा विवाद का समाधान तलाशने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने ऐसे समाधान पर जोर दिया, जो निष्पक्ष और उचित होने के साथ भारत तथा चीन—दोनों को स्वीकार्य हो। यह संकेत महत्वपूर्ण है कि सीमा प्रश्न को केवल सुरक्षा के नजरिए से नहीं बल्कि दोनों देशों के दीर्घकालिक रिश्तों और उनके नागरिकों के हितों से जोड़कर देखा गया। तियानजिन वार्ता के बाद प्रगति का स्वागत दोनों नेताओं ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई पिछली द्विपक्षीय वार्ता के बाद भारत-चीन संबंधों में हुई लगातार प्रगति का स्वागत किया। यह तीन वर्षों में मोदी और शी के बीच लगातार तीसरी द्विपक्षीय वार्ता है। इससे पहले दोनों नेता कजान और तियानजिन में आमने-सामने बैठकर बातचीत कर चुके हैं। लगातार हो रही इन बैठकों से यह संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष मतभेदों के बावजूद संवाद की प्रक्रिया को जारी रखना चाहते हैं। व्यापारिक असंतुलन और आपूर्ति शृंखला पर गंभीर चर्चा बातचीत केवल सीमा मुद्दे तक सीमित नहीं रही। दोनों नेताओं ने आर्थिक और व्यापारिक संबंधों में एक-दूसरे की चिंताओं को दूर करने की जरूरत पर भी जोर दिया। इन चिंताओं में व्यापार का संरचनात्मक असंतुलन और आपूर्ति शृंखला से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। दोनों पक्षों ने सार्थक तथा पहले से तय बाजार पहुंच को आसान बनाने की आवश्यकता भी बताई। सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों की आवाजाही बढ़ाने पर जोर श्री मोदी और श्री जिनपिंग ने दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों में हुई प्रगति पर भी चर्चा की। उन्होंने सांस्कृतिक आदान-प्रदान, कारोबारी संपर्क और नागरिकों की आवाजाही को बढ़ावा देने की जरूरत बताई। दोनों नेताओं का जोर इस बात पर रहा कि सरकारों के बीच संवाद के साथ समाज, संस्कृति और व्यापार के स्तर पर भी रिश्तों को मजबूती मिलनी चाहिए। क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों पर साथ काम करने की सहमति भारत और चीन ने क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर साझा आधार को लगातार बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने कहा कि मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को चीन से मिले समर्थन और वर्ष 2026 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता में उसके योगदान की सराहना भी की। गलवान के बाद शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा वर्ष 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद शी जिनपिंग की यह पहली भारत यात्रा है। इससे पहले वह वर्ष 2019 में भारत आए थे। गलवान झड़प में भारत के 20 सैनिक शहीद हुए थे, जबकि चीन के भी बड़ी संख्या में सैनिक हताहत हुए थे। इस घटना के बाद दोनों देशों के संबंधों में गंभीर खटास आ गई थी। कजान से सामान्य होते संबंधों की ओर कदम वर्ष 2024 में कजान में हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद से भारत और चीन की ओर से संबंधों को सामान्य बनाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। इसके बाद अगस्त 2025 में तियानजिन वार्ता हुई और अब नई दिल्ली में करीब 50 मिनट की बातचीत ने संवाद की इसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है।