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मुंबई। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर में वृद्धि और कच्चे तेल की ऊंची कीमत के दबाव के बीच घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को मिलाजुला रुख रहा। दिग्गज बैंक शेयरों की कमजोरी से सेंसेक्स 21.86 अंक यानी 0.03 प्रतिशत फिसलकर 74,314.59 पर रहा जबकि चुनिंदा धातु, ऑटो और औद्योगिक शेयरों के सहारे निफ्टी 53 अंक यानी 0.23 प्रतिशत बढ़कर 23,270.60 अंक पर पहुंच गया। सेंसेक्स लाल, लेकिन बाजार का बड़ा हिस्सा हरा हेडलाइन सूचकांकों की सुस्त चाल के बावजूद व्यापक बाजार में खरीददारी मजबूत रही। कुल 4,545 शेयरों में से 2,682 यानी 59.01 प्रतिशत शेयरों में तेजी दर्ज की गई। इसके मुकाबले 1,648 शेयर गिरे और 215 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। यह आंकड़ा बताता है कि बाजार की अंदरूनी तस्वीर सेंसेक्स के मामूली नुकसान से कहीं बेहतर रही। मिडकैप और स्मॉलकैप ने बड़े सूचकांकों को पछाड़ा बीएसई 150 मिडकैप इंडेक्स 0.83 प्रतिशत चढ़कर 16,643.03 पर पहुंच गया। बीएसई 250 स्मॉलकैप इंडेक्स ने 0.93 प्रतिशत की बढ़त के साथ 7,109.42 का स्तर हासिल किया। दिग्गज शेयरों में दबाव के बीच छोटे और मझोले शेयरों की तेजी ने निवेशकों के रुझान को सकारात्मक बनाए रखा। 500 अंक से ज्यादा के दायरे में झूला सेंसेक्स सेंसेक्स 74,182.62 पर खुला और कारोबार के दौरान 74,677.56 के उच्च स्तर तक पहुंचा। इसका निचला स्तर 74,163.95 रहा। पिछले सत्र के 74,336.45 के मुकाबले सूचकांक मामूली नुकसान के साथ 74,314.59 पर रहा। ऊपरी स्तर से आई बिकवाली ने सेंसेक्स की बढ़त छीन ली, लेकिन निचले स्तरों पर खरीदारी ने बड़ी गिरावट भी नहीं आने दी। वहीं, निफ्टी ने 23,195.25 से शुरुआत की और दिन में 23,363.55 तक चढ़ा। इसका निचला स्तर 23,193.65 रहा। उतार-चढ़ाव के बाद सूचकांक पिछले बंद 23,217.60 से 53 अंक ऊपर 23,270.60 पर रहा। बीमा शेयरों में सबसे तेज उछाल सेक्टोरल मोर्चे पर बीमा सूचकांक 3.23 प्रतिशत की छलांग के साथ सबसे आगे रहा। कैपिटल गुड्स इंडेक्स 1.96 प्रतिशत और इंडस्ट्रियल्स 1.51 प्रतिशत चढ़े। रियल्टी में 1.47 प्रतिशत, हेल्थकेयर में 1.36 प्रतिशत, हॉस्पिटल्स में 1.35 प्रतिशत, पावर में 1.34 प्रतिशत और सर्विसेज इंडेक्स में 1.33 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके साथ ही मेटल सूचकांक 1.12 प्रतिशत और ऑटो इंडेक्स 1.11 प्रतिशत मजबूत हुआ। कमोडिटीज में 0.89 प्रतिशत, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 0.84 प्रतिशत और यूटिलिटीज में 0.68 प्रतिशत की बढ़त रही। इस व्यापक खरीददारी ने निफ्टी को हरे निशान में बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। बैंक शेयर बने बाजार की कमजोर कड़ी प्राइवेट बैंक इंडेक्स 0.63 प्रतिशत और बैंकएक्स 0.50 प्रतिशत गिरा। टॉप-10 बैंक सूचकांक में 0.72 प्रतिशत की कमजोरी रही। पीएसयू बैंक 0.14 प्रतिशत और वित्तीय सेवा सूचकांक 0.11 प्रतिशत नीचे रहा। हाउसिंग फाइनेंस में 0.21 प्रतिशत और मिड-स्मॉल प्राइवेट बैंक सूचकांक में 0.19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। ऊर्जा सूचकांक 0.35 प्रतिशत और तेल एवं गैस इंडेक्स 0.25 प्रतिशत फिसला। ब्रेंट क्रूड करीब 106 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बने रहने से तेल से जुड़ी कंपनियों पर दबाव रहा। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, आपूर्ति को लेकर कुछ चिंता कम हुई है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े भू-राजनीतिक जोखिमों ने कच्चे तेल के परिदृश्य को अनिश्चित बनाए रखा। ऊंचे तेल और अमेरिकी दर वृद्धि ने भारतीय बाजार की तेजी सीमित की। टाटा स्टील बना सेंसेक्स का सबसे बड़ा विजेता टाटा स्टील 2.82 प्रतिशत चढ़कर 188 रुपये पर पहुंचा और सेंसेक्स शेयरों में सबसे आगे रहा। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स 2.38 प्रतिशत, इंडिगो 2.32 प्रतिशत और इटरनल 2.24 प्रतिशत मजबूत हुए। मारुति सुजुकी में 1.64 प्रतिशत, एशियन पेंट्स में 1.45 प्रतिशत, बजाज फिनसर्व में 1.24 प्रतिशत और अल्ट्राटेक सीमेंट में 1.03 प्रतिशत की तेजी रही। इनके अलावा ट्रेंट, बजाज फाइनेंस, एनटीपीसी, सन फार्मा, आईटीसी, अदाणी पोर्ट्स और कोटक महिंद्रा बैंक बढ़त के साथ रहे। एचसीएल टेक, लार्सन एंड टुब्रो, टेक महिंद्रा, टीसीएस तथा महिंद्रा एंड महिंद्रा में भी हल्की तेजी दर्ज की गई। एचडीएफसी बैंक ने सेंसेक्स पर डाला सबसे ज्यादा दबाव एचडीएफसी बैंक 1.30 प्रतिशत गिरकर 713 रुपये पर रहा और सेंसेक्स में सबसे कमजोर शेयर बना। टाइटन 1.14 प्रतिशत और आईसीआईसीआई बैंक 1.03 प्रतिशत फिसला। भारतीय स्टेट बैंक में 0.67 प्रतिशत, भारती एयरटेल में 0.52 प्रतिशत, एक्सिस बैंक में 0.47 प्रतिशत और इंफोसिस में 0.43 प्रतिशत की गिरावट रही। हिंदुस्तान यूनिलीवर और रिलायंस इंडस्ट्रीज भी लाल निशान में रहे। फेड की सख्ती ने बढ़ाई वैश्विक चिंता अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दर 25 आधार अंक बढ़ाकर 3.75 से चार प्रतिशत कर दी है और आगे एक और वृद्धि की संभावना जताई है। ऊंची अमेरिकी दरें उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी के प्रवाह पर दबाव डाल सकती हैं। फेड का फैसला सभी 12 सदस्यों के समर्थन से लिया गया था। इसका असर भारतीय आईटी शेयरों और रुपये पर पड़ने की आशंका बनी हुई है, क्योंकि अमेरिकी बाजार भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों की आय का बड़ा स्रोत है। आईपीओ बाजार भी खींच सकता है नकदी घरेलू निवेशकों की नजर एनएसई के प्रस्तावित आईपीओ और अन्य प्राथमिक बाजार पेशकशों पर बनी हुई है। बड़े सार्वजनिक निर्गम निवेशकों की नकदी को द्वितीयक बाजार से अपनी ओर खींच सकते हैं, जिससे प्रमुख सूचकांकों की तेजी सीमित रह सकती है। एशियाई बाजारों में मिलाजुला कारोबार एशिया में जापान का निक्केई 0.33 प्रतिशत बढ़ा। दूसरी ओर, हांगकांग का हैंगसेंग 0.44 प्रतिशत और चीन का शंघाई कंपोजिट 0.41 प्रतिशत नीचे रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 0.038 प्रतिशत की मामूली गिरावट में रहा।