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कटिहार। चार बच्चों के बेहतर भविष्य और परिवार की दो वक्त की रोटी के लिए मुंबई कमाने गए बिहार में कटिहार जिले के बारसोई के नूर साहेब को क्या पता था कि उनकी घर वापसी शव के रूप में होगी। हादसे की खबर से टूट पड़ा दुखों का पहाड़ बारसोई थाना क्षेत्र के बासगांव पंचायत अंतर्गत सिराजमुनी गांव निवासी 35 वर्षीय नूर साहेब मुंबई के नालासोपारा इलाके में एक निर्माणाधीन आठ मंजिला भवन में मजदूरी का काम करते थे। रविवार की शाम काम के दौरान अचानक ऊंचाई से गिर जाने के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। बुधवार को जब एंबुलेंस से नूर साहेब का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो पूरे इलाके में मातम छा गया। अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। चार बच्चों के सामने रोजी-रोटी का संकट नूर साहेब परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनके निधन के बाद पत्नी और चार छोटे-छोटे बच्चों के सामने जीवनयापन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। परिजनों का कहना है कि गांव में रोजगार नहीं मिलने के कारण मजबूरी में उन्हें मुंबई जाकर मजदूरी करनी पड़ी थी। ग्रामीणों ने उठाया बेरोजगारी और पलायन का मुद्दा ग्रामीणों का कहना है कि बिहार के हजारों युवा और मजदूर रोजगार के अभाव में हर साल दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर होते हैं। वहां जोखिम भरे माहौल में काम करते हुए कई लोग हादसों का शिकार हो जाते हैं लेकिन उनके परिवारों की सुध लेने वाला कोई नहीं होता।



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