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नई दिल्ली। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रविवार को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में कहा कि चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना 2026-2030 घरेलू स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाले विकास को गति देने के साथ भारत, अन्य ब्रिक्स सदस्यों और विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के विकासशील देशों के साथ सहयोग के नए अवसर पैदा करेगी। पांच वर्षीय योजना बनेगी विकास और कूटनीति की धुरी ब्रिक्स सम्मेलन के दूसरे दिन अपने संबोधन में श्री जिनपिंग ने कहा, “इस वर्ष चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना की शुरुआत हो रही है।”यह योजना वर्ष 2026 से 2030 तक चीन के आर्थिक और सामाजिक विकास की प्राथमिकताएं तय करेगी। वर्ष 2026 के संसदीय सत्रों में मंजूर यह रूपरेखा वर्ष 2035 तक के चीन के दीर्घकालिक लक्ष्यों से भी जुड़ी है। चीन इस योजना को केवल घरेलू अर्थव्यवस्था में बदलाव का दस्तावेज नहीं बल्कि वैश्विक जुड़ाव बढ़ाने की रणनीति के रूप में भी देख रहा है। खुलेपन का विस्तार, दुनिया से गहरा जुड़ाव चीन के राष्ट्रपति ने कहा कि चीन अपनी नई पंचवर्षीय योजना के जरिए खुलेपन का विस्तार करेगा। उन्होंने वैश्विक विकास पहल को लागू करने और बेल्ट एंड रोड सहयोग को आगे बढ़ाने की बात भी कही। इसके माध्यम से चीन सतत विकास हासिल करने, अपनी तकनीकी क्षमता मजबूत करने और वैश्विक अर्थव्यवस्था के प्रमुख विकास इंजन के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखने का प्रयास करेगा। सस्ते विनिर्माण से उच्च तकनीक की ओर चीन 15वीं पंचवर्षीय योजना का प्रमुख उद्देश्य चीन के आर्थिक मॉडल में बड़ा बदलाव लाना है। चीन निवेश और सस्ते विनिर्माण पर अधिक निर्भर व्यवस्था से आगे बढ़कर तकनीकी नवाचार, उन्नत उद्योग, घरेलू खपत और उच्च उत्पादकता पर आधारित अर्थव्यवस्था तैयार करना चाहता है। इस बदलाव के केंद्र में उत्पादन की संख्या बढ़ाने के बजाय उसकी गुणवत्ता, तकनीकी क्षमता और आर्थिक दक्षता को मजबूत करने की सोच है। एआई को मिली योजना में अहम जगह चीन की नई योजना में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसके तहत विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में एआई का इस्तेमाल तेज करने की तैयारी है। चीन ब्रिक्स सहयोगियों के साथ मिलकर एआई-संचालित नए औद्योगीकरण को आगे बढ़ाने के लिए भी तैयार है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता को केवल डिजिटल प्रयोगों तक सीमित न रखकर उद्योग, उत्पादन और सेवाओं में व्यावहारिक रूप से लागू करना है। क्वांटम कंप्यूटिंग से ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस तक चीन ने अपनी भावी तकनीकी प्राथमिकताओं का दायरा काफी व्यापक रखा है। वह जिन प्रमुख क्षेत्रों में क्षमताएं मजबूत करना चाहता है, उनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स, बायोमेडिसिन, उन्नत सामग्री, हाइड्रोजन, न्यूक्लियर फ्यूजन, ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस और 6जी तकनीक शामिल हैं। इन क्षेत्रों में प्रगति के जरिए चीन अपनी तकनीकी आत्मनिर्भरता, औद्योगिक क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा मजबूत करना चाहता है। इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और अक्षय ऊर्जा पर जोर चीन की विकास रणनीति में इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे उद्योग भी महत्वपूर्ण बने रहेंगे। इन क्षेत्रों को भविष्य के विकास चालकों के रूप में देखा जा रहा है। चीन तकनीकी नवाचार को हरित ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण से जोड़कर अपनी अर्थव्यवस्था को नया आकार देने की तैयारी में है। ‘आत्मनिर्भरता का अर्थ वैश्विक अलगाव नहीं’ श्री जिनपिंग ने स्पष्ट किया कि चीन की ओर से अधिक आत्मनिर्भर बनने की कोशिश का अर्थ दुनिया से अलग होना नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चीन अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी नेटवर्क के साथ गहराई से जुड़ा रहेगा। यह बयान ऐसे आर्थिक मॉडल की ओर इशारा करता है, जिसमें चीन घरेलू उत्पादन और तकनीकी क्षमता मजबूत करते हुए वैश्विक बाजारों तथा साझेदार देशों के साथ अपने संबंधों का भी विस्तार करेगा। ब्रिक्स देशों के लिए क्या हो सकते हैं अवसर चीन की नई योजना से ब्रिक्स सदस्यों और ग्लोबल साउथ के देशों के लिए कई क्षेत्रों में सहयोग के संभावित अवसर बन सकते हैं। इनमें चीनी बाजार तक अधिक पहुंच, विदेशों में चीनी निवेश का विस्तार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता में सहयोग, हरित ऊर्जा परियोजनाएं, बुनियादी ढांचे का विकास और नए औद्योगीकरण में साझेदारी शामिल हो सकते हैं। हालांकि, इन संभावनाओं का वास्तविक स्वरूप चीन और संबंधित देशों के बीच आगे होने वाली नीतिगत एवं आर्थिक बातचीत से तय होगा। भारत और अन्य ब्रिक्स सदस्यों को सकारात्मक संकेत श्री जिनपिंग ने भारत और दूसरे ब्रिक्स देशों को संदेश दिया कि चीन अपने अगले विकास चक्र को केवल राष्ट्रीय योजना के रूप में नहीं देख रहा है। वह इसे अंतरराष्ट्रीय साझेदारी गहरी करने और ग्लोबल साउथ के साथ सहयोग बढ़ाने के अवसर के रूप में भी पेश कर रहा है। विशेष रूप से एआई-संचालित औद्योगीकरण, हरित ऊर्जा, निवेश और बुनियादी ढांचे में सहयोग की बात ब्रिक्स के भीतर आर्थिक तथा तकनीकी साझेदारी का दायरा बढ़ा सकती है।



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