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माटी का श्रृंगार : श्रृंखला दो नोएडा (यूपी)। "यदि इतिहास के सारे महल ढह जाएं, शिलालेख मिट जाएं और राजाओं के नाम स्मृति से विलुप्त हो जाएं, तब भी धरती की गोद में दबा मिट्टी का एक टूटा हुआ पात्र मानव सभ्यता की कहानी कहता रहेगा।" मानव सभ्यता की सबसे पहली आवाज पत्थर के औजारों की नहीं थी; वह उस क्षण की थी, जब किसी अनाम मनुष्य ने नदी के किनारे की चिकनी मिट्टी को अपनी हथेलियों में उठाया, उसे पानी से गूंथा और पहली बार एक पात्र का आकार दिया। वह पात्र शायद टेढ़ा-मेढ़ा रहा होगा। उसकी दीवारें असमान रही होंगी। उसकी सतह पर उंगलियों के निशान भी बने रह गए होंगे लेकिन उसी क्षण मनुष्य ने प्रकृति की वस्तु को अपनी आवश्यकता के अनुरूप बदलने की कला सीख ली। यही वह क्षण था, जब सभ्यता ने पहला आकार लिया। कृषि ने मनुष्य को बसना सिखाया लेकिन मिट्टी के बर्तनों ने उसे व्यवस्थित जीवन जीना सिखाया। पानी संचित करना, अन्न सुरक्षित रखना, भोजन पकाना और बीजों को बचाकर रखना, ये सब उसी माटी के पात्रों ने संभव बनाया। इसलिए, इतिहासकार उचित ही कहते हैं कि मिट्टी का बर्तन मानव सभ्यता का पहला वैज्ञानिक आविष्कार और पहला घरेलू उद्योग था। धरती की गोद में सुरक्षित इतिहास पुरातत्वविदों के लिए मिट्टी का एक टूटा हुआ टुकड़ा किसी स्वर्णाभूषण से अधिक मूल्यवान होता है। सोना केवल संपन्नता बताता है। मिट्टी का पात्र पूरा समाज बता देता है। किस मिट्टी का उपयोग हुआ, किस तापमान पर उसे पकाया गया, किस प्रकार के रंग लगाए गए, किस शैली की रेखाएं उकेरी गईं, इन सबके आधार पर इतिहासकार उस समय की तकनीक, व्यापार, जलवायु, कृषि, भोजन, धार्मिक आस्थाओं और सामाजिक संरचना तक का अनुमान लगा लेते हैं। यही कारण है कि जब किसी प्राचीन नगर की खुदाई होती है, तो सबसे अधिक मिलने वाली वस्तुएं मिट्टी के बर्तन ही होते हैं। वे समय के सबसे विश्वसनीय दस्तावेज हैं। माटी पर अंकित 29,000 वर्षों की सभ्यता का इतिहास ​मिट्टी को आकार देने और उसे आग में तपाकर अमर कर देने की यह साधना मानव के सबसे पहले और क्रांतिकारी आविष्कारों में से एक है। इसकी जड़ें नवपाषाण काल से भी कहीं पीछे तक जाती हैं। ​वैश्विक गौरव: चेक गणराज्य में पाई गई सिरेमिक की मूर्तियां लगभग 29,000 से 25,000 ईसा पूर्व (ग्रेवेटियन संस्कृति) की हैं। वहीं, एशिया में चीन के जियांग्शी में मिले सबसे पुराने मिट्टी के बर्तन 18,000 ईसा पूर्व के हैं। ​सभ्यताओं का उदय: जापान की जोमोन संस्कृति (10,500 ईसा पूर्व), रूसी सुदूर पूर्व में 14,000 ईसा पूर्व, उप-सहारा अफ्रीका में 9,400 ईसा पूर्व, दक्षिण अमेरिका में 9,000-7,000 ईसा पूर्व, और मध्य पूर्व में 7,000-6,000 ईसा पूर्व की पाई गई कलाकृतियों के बिना सभ्यताओं के विकास की गाथा अधूरी है। लगभग 9,000 वर्ष पहले जब मानव ने व्यवस्थित रूप से मिट्टी के बर्तन बनाने शुरू किए। तब से लेकर आज तक भोजन पकाने, जल को शीतल रखने और अनाज के भंडारण में इन बर्तनों ने इंसानी वजूद को संभाला है। जापान की जोमोन संस्कृति, रूसी सुदूर पूर्व, उप-सहारा अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और मध्य-पूर्व से प्राप्त प्राचीन मृद्भांड यह सिद्ध करते हैं कि अलग-अलग महाद्वीपों में रहने वाले मानव समुदायों ने स्वतंत्र रूप से मिट्टी की उपयोगिता और उसकी कलात्मक संभावनाओं को पहचाना। यह केवल बर्तन बनाने की कला नहीं थी, बल्कि स्थायी जीवन, कृषि, भंडारण और सामाजिक विकास की आधारशिला भी थी। माटी पर सभ्यता का इतिहास मिट्टी के बर्तन मानव के सबसे पुराने आविष्कारों में से एक हैं। मिट्टी के बर्तनों का इतिहास मानव सभ्यता जितना ही प्राचीन है। पुरातात्त्विक साक्ष्य बताते हैं कि मनुष्य ने नवपाषाण काल से भी पहले मिट्टी को आकार देना और उसे आग में पकाकर उपयोगी वस्तुओं में बदलना सीख लिया था। चेक गणराज्य के डोल्नी वेस्टोनिस से प्राप्त लगभग 29,000 से 25,000 ईसा पूर्व की सिरेमिक प्रतिमाएं इस कला के सबसे प्राचीन प्रमाणों में गिनी जाती हैं। इसके बाद चीन के जियांग्शी से लगभग 18,000 ईसा पूर्व के मिट्टी के बर्तन मिले। अन्य प्रारंभिक नवपाषाण और पूर्व-नवपाषाण काल ​​के मिट्टी के बर्तनों की कलाकृतियां जोमोन जापान में 10,500 ईसा पूर्व, रूसी सुदूर पूर्व में 14,000 ईसा पूर्व, उप-सहारा अफ्रीका में 9,400 ईसा पूर्व, दक्षिण अमेरिका में 9,000-7,000 ईसा पूर्व, और मध्य पूर्व में 7,000-6,000 ईसा पूर्व की पाई गई हैं। जापान की जोमोन संस्कृति, रूसी सुदूर पूर्व, उप-सहारा अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और मध्य-पूर्व से प्राप्त प्राचीन मृद्भांड यह सिद्ध करते हैं कि अलग-अलग महाद्वीपों में रहने वाले मानव समुदायों ने स्वतंत्र रूप से मिट्टी की उपयोगिता और उसकी कलात्मक संभावनाओं को पहचाना। यह केवल बर्तन बनाने की कला नहीं थी, बल्कि स्थायी जीवन, कृषि, भंडारण और सामाजिक विकास की आधारशिला भी थी। जब धरती के अलग-अलग कोनों में एक ही विचार जन्मा मानव इतिहास का यह भी एक अद्भुत संयोग है कि संसार के अनेक भागों में अलग-अलग समय पर रहने वाले लोगों ने लगभग एक जैसी खोज की। चीन के जियांग्शी प्रांत में मिले लगभग अठारह हजार वर्ष पुराने मिट्टी के पात्र बताते हैं कि उस समय का मनुष्य आग और मिट्टी के संबंध को समझ चुका था। जापान की जोमोन संस्कृति में दस हजार वर्ष से भी पुराने पात्रों पर उकेरे गए अलंकरण आज भी आश्चर्यचकित करते हैं। अफ्रीका, रूस, दक्षिण अमेरिका और मध्य-पूर्व की प्राचीन बस्तियों से मिले मृद्भांड यह सिद्ध करते हैं कि मिट्टी ने मानव जाति को एक अदृश्य सांस्कृतिक सूत्र में बांध रखा था। किसी ने किसी से सीखा नहीं, फिर भी सबने एक ही निष्कर्ष निकाला, "धरती केवल रहने की जगह नहीं, जीवन को सँवारने का माध्यम भी है।" (क्रमश:)