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मुंबई। कच्चे तेल की ऊंची कीमत और वैश्विक अनिश्चितताओं के दबाव में बीते सप्ताह आधी फीसदी से अधिक गिरे घरेलू शेयर बाजार की अगले सप्ताह अमेरिकी फेडरल रिजर्व के मिनट्स, क्रूड ऑयल के दाम और चीन के जारी होने वाले आर्थिक आंकड़ों पर नजर रहेगी। बीते सप्ताह बाजार पर ग्लोबल टेंशन और महंगे क्रूड ऑयल का असर साफ दिखा। बीएसई सेंसेक्स 489.92 अंक यानी 0.62 फीसदी टूटकर 78,009.25 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का निफ्टी 204.65 अंक यानी 0.83 फीसदी फिसलकर 24,366 अंक पर आ गया। खास बात यह रही कि निफ्टी 30 जुलाई के बाद पहली बार इतने निचले स्तर पर बंद हुआ। लार्जकैप रहे स्लो, मिडकैप बना हीरो जहां बड़े शेयर पूरे सप्ताह दबाव में रहे, वहीं मिडकैप कंपनियों ने शानदार मजबूती दिखाई। मिडकैप जहां 0.2 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 17275.30 अंक पर पहुंचा वहीं स्मॉलकैप 0.32 फीसदी की गिरावट लेकर 7216.68 अंक पर रहा। बाजार जानकारों का कहना है कि बेहतर कॉर्पोरेट नतीजों की वजह से निवेशकों का भरोसा मिडकैप शेयरों में बना हुआ है। दूसरी तरफ, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और महंगे कच्चे तेल ने लार्जकैप शेयरों की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। अमेरिका से मिली राहत, लेकिन तेल ने बढ़ाई टेंशन सप्ताह की शुरुआत में अमेरिका के कमजोर रोजगार आंकड़ों से उम्मीद जगी कि फेड ब्याज दरों को लेकर जल्दबाजी नहीं करेगा। इससे बाजार का मूड कुछ बेहतर हुआ। लेकिन, यह राहत ज्यादा देर नहीं टिक सकी। जैसे ही कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं, महंगाई और ग्लोबल जोखिमों की चिंता फिर हावी हो गई। महंगा तेल भारत जैसे आयातक देशों के लिए हमेशा चिंता की बात माना जाता है। कॉर्पोरेट नतीजों ने बाजार को दिया सहारा ग्लोबल दबाव के बावजूद भारतीय कंपनियों ने शानदार प्रदर्शन किया। निफ्टी 50 की पहली तिमाही (वित्त वर्ष27) के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहे। 50 में से 33 कंपनियों ने बाजार के अनुमान से बेहतर कमाई दर्ज की। यही वजह रही कि बाजार में पूरी तरह निराशा नहीं दिखी। रुपये की स्थिरता, सरकारी बॉन्ड यील्ड में नरमी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की बढ़ती भागीदारी ने भी बाजार को सपोर्ट दिया। किन सेक्टरों ने मारी बाजी इस सप्ताह कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और रियल्टी सेक्टर सबसे ज्यादा चमके। घरेलू मांग बढ़ने की उम्मीद ने इन शेयरों में अच्छी खरीददारी कराई। पीएसयू बैंक भी निवेशकों की पसंद बने रहे। बेहतर एसेट क्वालिटी, आकर्षक वैल्यूएशन और मजबूत क्रेडिट ग्रोथ की उम्मीद ने इन शेयरों को मजबूती दी। हालांकि, मेटल, ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर में मुनाफावसूली देखने को मिली। बढ़ती इनपुट लागत की चिंता ने इन कंपनियों के शेयरों पर दबाव बनाया। अब अगले हफ्ते क्या देखेगा बाजार जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर के मुताबिक, अगले सप्ताह बाजार की नजर पांच बड़े ट्रिगर्स पर रहेगी—कच्चे तेल की कीमतें, पश्चिम एशिया की स्थिति, अमेरिकी रिटेल सेल्स डेटा, फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की बैठक के मिनट्स और चीन के आर्थिक आंकड़े। अगर फेड के मिनट्स से ब्याज दरों में राहत के संकेत मिलते हैं और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आती है तो बाजार में फिर से खरीददारी लौट सकती है। लेकिन, तेल और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है तो निवेशकों को एक और उतार-चढ़ाव भरे सप्ताह के लिए तैयार रहना पड़ सकता है। फिलहाल इतना तय है कि अगले हफ्ते शेयर बाजार की हर बड़ी चाल पर नजर रखने की वजह भी होगी और रोमांच भी।