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एवियन (फ्रांस)/नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के सुरक्षित, तेज और जिम्मेदार उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि इस तकनीक का उद्देश्य मानव क्षमता को बढ़ाना, साइबर खतरों से सुरक्षा सुनिश्चित करना और इसका लाभ दुनिया के सभी देशों तक पहुंचाना होना चाहिए। श्री मोदी ने एवियन में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन में "इंश्योरिंग ए सेफ, रैपिड एंड एफिशिएंट रोल आउट ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस" विषय पर आयोजित आउटरीच सत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर दुनिया के सामने भारत का दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि एआई एक ऐसी तकनीक है, जो भविष्य बदल सकती है लेकिन इसका उपयोग लोगों को सशक्त बनाने और समाज के हित में होना चाहिए। एआई इंसानों की जगह नहीं, उनकी ताकत बढ़ाए प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई का असली उद्देश्य इंसानों की क्षमता बढ़ाना है न कि उन्हें पीछे छोड़ना। यह तकनीक लोगों को बेहतर फैसले लेने, नए अवसर पैदा करने और जीवन को आसान बनाने में मदद करे तभी इसका सही उपयोग माना जाएगा। भारत ने रखा 'मानव' विजन प्रधानमंत्री ने एआई के लिए भारत के 'मानव' विजन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एआई का विकास ऐसा होना चाहिए जो सभी लोगों के लिए फायदेमंद हो, सुरक्षित हो और जनहित को सबसे ऊपर रखे। उन्होंने कहा कि भारत चाहता है कि तकनीक का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। साइबर सुरक्षा पर भी जताई चिंता श्री मोदी ने कहा कि आज के डिजिटल दौर में साइबर सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। लोकतांत्रिक देशों के पास ऐसे एआई मॉडल होने चाहिए जो उनके महत्वपूर्ण डिजिटल ढांचे की सुरक्षा कर सकें और साइबर हमलों से बचाने में मदद करें। एआई को लेकर दुनिया के सामने रखे चार बड़े सुझाव प्रधानमंत्री मोदी ने एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के लिए चार अहम सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि एआई सिस्टम शुरुआत से ही सुरक्षित बनाए जाने चाहिए। इसके साथ ही एआई के उपयोग के लिए समान मानक और नियम तय होने चाहिए ताकि तकनीक का गलत इस्तेमाल रोका जा सके। डीपफेक और ऑनलाइन धोखाधड़ी पर सख्ती की जरूरत श्री मोदी ने कहा कि एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डीपफेक, फर्जी खबरें और साइबर धोखाधड़ी जैसी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। इनसे निपटने के लिए देशों के बीच मजबूत वैश्विक सहयोग जरूरी है ताकि लोगों को गलत जानकारी और ऑनलाइन ठगी से बचाया जा सके। विकासशील देशों तक भी पहुंचे एआई का फायदा प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि एआई का लाभ सिर्फ विकसित देशों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया के विकासशील और गरीब देशों, जिन्हें 'ग्लोबल साउथ' कहा जाता है, उन्हें भी इस तकनीक का पूरा फायदा मिलना चाहिए ताकि डिजिटल असमानता कम हो सके। मानव गरिमा की रक्षा सबसे जरूरी श्री मोदी ने कहा कि एआई का विकास मानव गरिमा, मानव अधिकारों और मानव हितों की रक्षा करते हुए होना चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत इस दिशा में दुनिया के अन्य देशों के साथ मिलकर काम करता रहेगा।