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पटना। बिहार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने बिहार में खगड़िया जिले के अलौली प्रखंड कार्यालय में कार्रवाई करते हुए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) योजना के बिल भुगतान के बदले 45 हजार रुपये रिश्वत लेते कार्यक्रम पदाधिकारी रमन जी और लेखापाल मोहम्मद शाहिद अकरम को आज रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। बिल पास कराने के बदले मांगे थे पैसे ब्यूरो ने मंगलवार को बताया कि मामले की शुरुआत तब हुई, जब अलौली थाना क्षेत्र के भिखारीघाट निवासी विपिन कुमार ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से शिकायत की। उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा योजना के तहत आपूर्ति की गई सामग्री का भुगतान करने के लिए कार्यक्रम पदाधिकारी रमन जी और लेखापाल मोहम्मद शाहिद अकरम उनसे रिश्वत मांग रहे हैं। बिना पैसे दिए बिल पास नहीं किया जा रहा था। शिकायत सही निकली, फिर शुरू हुआ 'ऑपरेशन ट्रैप' शिकायत मिलते ही निगरानी ब्यूरो हरकत में आया। पहले पूरे मामले का गोपनीय सत्यापन कराया गया। जांच में रिश्वत मांगने की पुष्टि होते ही निगरानी थाना कांड संख्या 088/2026 दर्ज किया गया और पुलिस उपाधीक्षक मोहम्मद वसीम फिरोज के नेतृत्व में विशेष ट्रैप टीम गठित की गई। रिश्वत लेते ही धर दबोचे गए दोनों अधिकारी योजना के मुताबिक शिकायतकर्ता रिश्वत की रकम लेकर अलौली प्रखंड कार्यालय पहुंचा। जैसे ही 45 हजार रुपये आरोपियों के हाथ में पहुंचे, पहले से घात लगाए बैठी निगरानी टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दोनों अधिकारियों को रंगेहाथ पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद दोनों से पूछताछ की गई और उन्हें विशेष निगरानी न्यायालय, भागलपुर में पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। मामले की आगे की जांच जारी है। 2026 में निगरानी की 88वीं बड़ी कार्रवाई ब्यूरो के अनुसार, वर्ष 2026 में भ्रष्टाचार के खिलाफ यह 88वीं प्राथमिकी दर्ज की गई है। इनमें 81 ट्रैप मामले शामिल हैं। ब्यूरो अब तक 82 आरोपियों को रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर चुका है। इस साल अब तक ₹29.63 लाख रिश्वत बरामद ब्यूरो के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2026 में अब तक ट्रैप मामलों में 29 लाख 63 हजार 800 रुपये की रिश्वत राशि बरामद की जा चुकी है। तुलना करें तो वर्ष 2025 में 101 ट्रैप केस दर्ज हुए थे, जिनमें 37 लाख 80 हजार 300 रुपये बरामद किए गए थे।



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