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मुंबई। अमेरिकी सेना के ईरान पर लगातार 12वीं रात किए गए हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज तेजी से वैश्विक बाजारों में बढ़ी चिंता के दबाव में गुरुवार को लगातार चौथे दिन हुई जबरदस्त बिकवाली से सेंसेक्स और निफ्टी दोनों गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स-निफ्टी दोनों में बड़ी गिरावट बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 363.66 अंक यानी 0.47 प्रतिशत टूटकर 76,391.39 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का निफ्टी 126.65 अंक यानी 0.53 प्रतिशत गिरकर 23,869.60 अंक पर आ गया। इसके साथ ही निफ्टी 24 हजार के मनोवैज्ञानिक स्तर से भी नीचे फिसल गया, जिसने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर ज्यादा दबाव बाजार में सबसे ज्यादा दबाव मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर देखने को मिला। बीएसई मिडकैप इंडेक्स 1.01 प्रतिशत गिरकर 16,709.87 अंक पर बंद हुआ, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स 1.20 प्रतिशत की गिरावट के साथ 6,940.17 अंक पर पहुंच गया। इससे साफ है कि बड़े शेयरों के मुकाबले छोटी और मझौली कंपनियों के शेयरों में ज्यादा बिकवाली हुई। महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई बाजार की चिंता विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। महंगे तेल से महंगाई बढ़ने, कंपनियों की लागत में इजाफा होने और मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया है। हालिया आर्थिक संकेतक भी यह इशारा कर रहे हैं कि यदि यह तनाव लंबे समय तक बना रहा तो इसका असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। थोक महंगाई में बढ़ोतरी और कारोबारी गतिविधियों में सुस्ती के संकेत इसी ओर इशारा कर रहे हैं। ऊंची ब्याज दरों की आशंका से बढ़ी बेचैनी ऊंची ऊर्जा कीमतों के कारण दुनिया भर में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की संभावना भी बढ़ गई है। इसका असर उभरते बाजारों में निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता पर पड़ रहा है। यही वजह रही कि गुरुवार को बाजार के लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। हालांकि मजबूत तिमाही नतीजों के दम पर ऑटो सेक्टर ने बेहतर प्रदर्शन किया, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशक अब भी मजबूत कमाई और बेहतर भविष्य वाली कंपनियों पर भरोसा बनाए हुए हैं। ज्यादातर सेक्टर लाल निशान में बंद सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो ऑटो और इंश्योरेंस सेक्टर में 0.68 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई, जबकि कमोडिटीज, एनर्जी, एफएमसीजी, फाइनेंशियल सर्विसेज, हेल्थकेयर, इंडस्ट्रीज, प्राइवेट बैंक, टेलीकॉम, यूटिलिटीज, बैंकेक्स, ऑयल एंड गैस, पावर, रियल्टी और सर्विसेज सेक्टर में 1.78 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। अदानी पोर्ट्स सबसे बड़ा लूजर शेयरों की बात करें तो गुरुवार के कारोबार में अदानी पोर्ट्स सबसे बड़ा लूजर रहा और इसका शेयर 2.26 प्रतिशत तक टूट गया। इसके अलावा भारती एयरटेल, रिलायंस इंडस्ट्रीज, मारुति, टाटा स्टील, एसबीआई, एक्सिस बैंक, इंडिगो और बजाज फाइनेंस के शेयरों में भी 1.96 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने दिखाई मजबूती वहीं, कमजोर बाजार के बीच महिंद्रा एंड महिंद्रा सबसे बड़ा गेनर रहा और इसके शेयर 1.70 प्रतिशत तक चढ़े। इसके अलावा पावरग्रिड, आईटीसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अल्ट्राटेक सीमेंट, सन फार्मा, कोटक महिंद्रा बैंक, एचसीएल टेक, बजाज फिनसर्व, इटरनल और टीसीएस के शेयरों में भी 1.51 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। आने वाले दिनों में रह सकती है उठापटक बाजार जानकारों का कहना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है तथा कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। हालांकि मजबूत फंडामेंटल और बेहतर कमाई वाली कंपनियां ऐसे माहौल में भी निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प बनी रह सकती हैं।