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मोतिहारी। बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में वर्ष 2023 के बहुचर्चित एसिड अटैक मामले में अनुसूचित जाति/जनजाति न्यायालय ने पिता-पुत्री की मौत के लिए दोषी महेश भगत को आजीवन कारावास और 2.05 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाते हुए जुर्माने की राशि पीड़िता को देने का आदेश दिया। विशेष न्यायाधीश कमलेश कुमार मिश्रा की अदालत ने शुक्रवार को मुख्य दोषी महेश भगत को ताउम्र जेल में रहने (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर 2 लाख 5 हजार रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न चुकाने की स्थिति में दोषी को छह महीने की सजा अलग से भुगतनी होगी। घर में घुसकर परिवार पर फेंका था एसिड यह मामला चकिया थाना कांड संख्या-187/2023 और एससी-एसटी वाद संख्या-72/2023 से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, 22 मई 2023 की रात चकबरा बखरी गांव निवासी शीला देवी अपने पति रेमन पासवान और दो बच्चों के साथ घर में सो रही थीं। इसी दौरान आरोपी महेश भगत सीढ़ी के सहारे घर में घुसा और रेमन पासवान पर एसिड फेंक दिया। एसिड की चपेट में शीला देवी और उनके दोनों बच्चे भी आ गए। तीन साल की बेटी और पिता की चली गई जान इस हमले में गंभीर रूप से झुलसी तीन वर्षीय रिया कुमारी की इलाज के दौरान तीसरे दिन मौत हो गई। वहीं, गंभीर रूप से घायल रेमन पासवान ने भी बाद में पटना में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हालांकि, शीला देवी और उनके बेटे पवन कुमार का लंबे इलाज के बाद जीवन बच गया। महिला पर बना रहा था साथ चलने का दबाव एफआईआर में शीला देवी ने आरोप लगाया था कि घटना से चार-पांच दिन पहले महेश भगत उनके घर आया था और उन्हें जबरन अपने साथ चलने का दबाव बना रहा था। विरोध करने पर आरोपी और रेमन पासवान के बीच विवाद हुआ था। इसके कुछ दिन बाद आरोपी ने इस वारदात को अंजाम दिया। 10 गवाहों की गवाही के बाद हुई सजा पुलिस की चार्जशीट के बाद मामले का स्पीडी ट्रायल चला। विशेष लोक अभियोजक रवि प्रकाश ने अदालत में 10 गवाहों की गवाही कराई। साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की समकक्ष धाराओं (तत्कालीन आईपीसी की धारा 448, 454, 324, 326ए, 307 और 302) तथा एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(वी-ए) के तहत दोषी ठहराया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। पीड़िता को मिलेगा जुर्माने का पैसा, मुआवजे का भी आदेश अदालत ने आदेश दिया कि दोषी से वसूला गया 2.05 लाख रुपये का जुर्माना पीड़िता शीला देवी को दिया जाएगा। इसके अलावा अदालत ने शीला देवी और उनके पुत्र पवन कुमार को वास्तविक पीड़ित घोषित करते हुए बिहार प्रतिकर योजना के तहत मुआवजा दिलाने के लिए आदेश की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव को भेजने का निर्देश भी दिया।