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काठमांडू/मोतिहारी। नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में बुधवार सुबह अचानक आए विनाशकारी सैलाब से तिमुरे बाजार और रसुवागढ़ी सीमा क्षेत्र में भारी तबाही तथा 300 से अधिक वाहनों के बहने की सूचना के बीच हिमस्खलन से नदी का रास्ता रुकने, हिमनदी झील फटने और उसी दौरान तिब्बत में आए भूकंप की भूमिका की आशंका को लेकर वैज्ञानिक जांच शुरू कर दी गई है, वहीं संभावित खतरे को देखते हुए बिहार में गंडक नदी और वाल्मीकिनगर बैराज की निगरानी बढ़ा दी गई है। बाढ़ का पानी और मलबा इतनी तेजी से नीचे आया कि लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने का मौका नहीं मिला। बाजार, मकान, पुल, बैंक और सीमा शुल्क परिसर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। सैकड़ों वाहन बहने की सूचना है और कई कर्मचारियों से अब भी संपर्क नहीं हो पाया है। नेपाल में हुई इस तबाही के बाद बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। क्या हिमस्खलन ने रोका नदी का रास्ता काठमांडू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और जलवायु शोधकर्ता रिजन भक्त कायस्थ के अनुसार, नेपाल और चीन के वैज्ञानिकों के बीच हुई शुरुआती चर्चा में हिमस्खलन से लेंडे नदी का रास्ता अवरुद्ध होने की संभावना सामने आई है। आशंका है कि रास्ता बंद होने से नदी का पानी लगातार जमा होता रहा और दबाव बढ़ने पर उसने अचानक विनाशकारी बाढ़ का रूप ले लिया। हालांकि नेपाल की सरकारी एजेंसियों ने अभी इसकी औपचारिक पुष्टि नहीं की है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण की प्रवक्ता शांति महात के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय पर्वतीय विकास केंद्र को चीन से हिमस्खलन के कारण नदी अवरुद्ध होने की प्रारंभिक सूचना मिली है, लेकिन नेपाल सरकार को अब तक कोई आधिकारिक रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। बाढ़ के समय तिब्बत में आया 4.4 तीव्रता का भूकंप इसी दौरान तिब्बत क्षेत्र में भूकंप भी दर्ज किया गया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, सुबह 8:37 बजे 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था। फिलहाल विशेषज्ञों ने भूकंप और बाढ़ के बीच कोई सीधा संबंध स्थापित नहीं किया है। यह पता लगाने के लिए विस्तृत वैज्ञानिक जांच की जरूरत होगी कि भूकंप ने हिमस्खलन या नदी अवरोध की घटना को किसी तरह प्रभावित किया था या दोनों घटनाओं का समय केवल संयोग था। भारी बारिश नहीं, फिर इतना पानी कहां से आया जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, बाढ़ से पहले मंगलवार और बुधवार को रसुवा में भारी बारिश दर्ज नहीं की गई थी। इसके बावजूद अचानक इतनी बड़ी मात्रा में पानी और मलबा आने से हिमनदी झील फटने की आशंका भी जताई जा रही है।प्रोफेसर कायस्थ के मुताबिक, इस क्षेत्र में बड़ी हिमनदी झीलें मौजूद हैं और पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं। उनका मानना है कि यह सामान्य बारिश से आने वाली बाढ़ नहीं, बल्कि अचानक उत्पन्न हुई असामान्य आपदा है। ‘जमीन कांपी, फिर छा गया अंधेरा’ तिमुरे क्षेत्र के एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि बाढ़ से ठीक पहले जमीन में तेज कंपन महसूस हुआ। बाहर निकलने पर पहाड़ की ऊपरी दिशा में धूल और मलबे का गुबार दिखा, जिसके तुरंत बाद पानी का विशाल सैलाब नीचे की ओर बढ़ने लगा। प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, धूल और मलबे से पूरे इलाके में अंधेरा छा गया और लोग जान बचाने के लिए जंगल की ओर भागने लगे। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने पानी की लहर को करीब 100 मीटर ऊंचा बताया है, लेकिन इस दावे की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। तिमुरे बाजार तबाह, 300 से ज्यादा वाहन बहने की सूचना बाढ़ ने तिमुरे बाजार और रसुवागढ़ी सीमा क्षेत्र की तस्वीर बदल दी। घरों, दुकानों, कार्यालयों, बैंक, पुल और सीमा शुल्क यार्ड को भारी नुकसान पहुंचा है। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, सीमा शुल्क यार्ड में खड़े 300 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन और ट्रक बह गए। सड़कों और दूसरे इलाकों में खड़े कई अन्य वाहनों का भी पता नहीं चल पाया है। नुवाकोट के सहायक मुख्य जिला अधिकारी कृष्ण प्रसाद हुमागाईं ने नुकसान को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि क्षेत्र में ऐसी तबाही पहले कभी नहीं देखी गई। जंगल में फंसे करीब 40 लोग, कई कर्मचारियों से संपर्क टूटा बाढ़ से बचने के लिए स्थानीय लोगों और सीमा शुल्क कर्मचारियों सहित करीब 40 लोगों ने तिमुरे बाजार के ऊपर जंगल में शरण ली है। वे राहत एवं बचाव दल के पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। सीमा शुल्क कार्यालय के कुछ कर्मचारियों से संपर्क हो गया है, लेकिन नेपाल-चीन मितेरी पुल पर तैनात कई कर्मचारियों से अब भी संपर्क नहीं हो पाया है। सीमा शुल्क अधिकारियों का आरोप है कि बाढ़ से पहले कोई चेतावनी जारी नहीं की गई। उनका कहना है कि समय रहते सूचना मिलने पर बाजार और सीमा क्षेत्र में मौजूद लोगों को सुरक्षित निकाला जा सकता था। नेपाल की आपदा से बिहार में अलर्ट नेपाल से आने वाले जलप्रवाह में अचानक वृद्धि की आशंका को देखते हुए बिहार प्रशासन भी सतर्क हो गया है। पानी बढ़ने पर वाल्मीकिनगर बैराज पर दबाव पड़ सकता है और बैराज से ज्यादा पानी छोड़े जाने की स्थिति में गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। पूर्वी चंपारण जिला प्रशासन ने अरेराज, संग्रामपुर, केसरिया और पहाड़पुर अंचलों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की पेट्रोलिंग, मेडिकल टीमें तैयार गंडक के तटबंधों और निचले इलाकों की निगरानी बढ़ा दी गई है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को संभावित खतरे के प्रति जागरूक करने और आपात स्थिति में तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रखने को कहा गया है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ को पेट्रोलिंग के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग को पर्याप्त दवाओं के साथ मेडिकल टीमें तैयार रखने को भी कहा गया है, ताकि जरूरत पड़ते ही उन्हें संवेदनशील क्षेत्रों में भेजा जा सके। तीन आशंकाएं, अंतिम जवाब जांच के बाद भोटेकोशी में आए विनाशकारी सैलाब के पीछे फिलहाल तीन संभावनाओं पर ध्यान है—हिमस्खलन से नदी का रास्ता रुकना, हिमनदी झील का फटना या प्राकृतिक घटनाओं का संयुक्त प्रभाव। भूकंप के साथ इसका कोई सीधा संबंध अभी प्रमाणित नहीं हुआ है। तकनीकी और वैज्ञानिक जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। फिलहाल नेपाल में राहत-बचाव अभियान जारी है और बिहार में हर नजर गंडक के जलस्तर पर टिकी हुई है।