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नई दिल्ली। प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में दिल्ली के किसान घाट पर आयोजित किसान महापंचायत में शामिल होने पंजाब से आ रहे सैकड़ों किसानों को मंगलवार को हरियाणा पुलिस ने शंभू बॉर्डर पर नाकेबंदी कर रोक दिया। किसान 'देश बचाओ मोर्चा' के बैनर तले दिल्ली के किसान घाट पर आयोजित प्रस्तावित 'किसान महापंचायत' में शामिल होने जा रहे थे। इस महापंचायत में कई किसान संगठनों ने भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने की तैयारी की थी। चार राज्यों के किसानों के जुटने की थी तैयारी किसान मजदूर मोर्चा के नेता सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि महापंचायत में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश से बड़ी संख्या में किसानों के पहुंचने की उम्मीद थी। उनका कहना था कि इस प्रदर्शन का उद्देश्य सरकार को यह बताना है कि प्रस्तावित व्यापार समझौते का असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। क्यों कर रहे हैं किसान विरोध किसान संगठनों का कहना है कि यदि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत कृषि उत्पादों के आयात पर लगी बाधाएं कम की जाती हैं तो भारतीय बाजार में सस्ते विदेशी कृषि उत्पादों की बाढ़ आ सकती है। इससे देश के किसानों को अपनी उपज का उचित दाम मिलना मुश्किल हो जाएगा। किसानों का दावा है कि इसका सीधा असर केवल किसानों पर ही नहीं बल्कि कृषि मजदूरों, डेयरी कारोबार, पशुपालकों, छोटे व्यापारियों और ग्रामीण रोजगार पर भी पड़ेगा। सिर्फ खेती नहीं, कई सेक्टरों पर असर की आशंका किसान संगठनों का कहना है कि प्रस्तावित समझौता केवल कृषि क्षेत्र तक सीमित नहीं रह सकता। उनका दावा है कि इसके दायरे में डेयरी, विनिर्माण, डिजिटल कॉमर्स, ई-कॉमर्स, सरकारी खरीद, बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) और सेवा क्षेत्र भी आ सकते हैं। ऐसे में यह समझौता देश की आर्थिक नीतियों पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है। सरकार से समझौता रद्द करने की मांग प्रदर्शनकारी किसानों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को आगे न बढ़ाया जाए। उनका कहना है कि यह समझौता लाखों किसानों और कृषि पर निर्भर परिवारों की आजीविका के लिए खतरा बन सकता है। किसानों ने सरकार से कृषि और आम नागरिकों के हितों को प्राथमिकता देने की अपील की। पंजाब में कई हफ्तों से चल रहा विरोध भारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में पंजाब में पिछले कई हफ्तों से आंदोलन तेज है। विभिन्न किसान संगठनों ने गांव-गांव जाकर बैठकें की हैं और कई जगह मोटरसाइकिल रैलियां निकालकर लोगों को इस मुद्दे से जोड़ने की कोशिश की है। फिर याद आया 'दिल्ली चलो-2' आंदोलन शंभू बॉर्डर पर मंगलवार को दिखी पुलिस की सख्ती ने फरवरी 2024 की यादें ताजा कर दीं। उस समय भी हरियाणा पुलिस ने एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग को लेकर शुरू हुए 'दिल्ली चलो-2' आंदोलन के दौरान पंजाब-हरियाणा सीमा पर भारी बैरिकेडिंग कर किसानों को दिल्ली जाने से रोक दिया था। उस गतिरोध के चलते किसान शंभू और खनौरी बॉर्डर पर लंबे समय तक डटे रहे थे। क्या है पूरा मामला भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर किसान संगठनों में आशंका है कि इससे भारतीय कृषि बाजार विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए अधिक खुल जाएगा, जिससे घरेलू किसानों की आय और रोजगार प्रभावित हो सकते हैं। इसी आशंका के विरोध में किसान दिल्ली में महापंचायत आयोजित करना चाहते थे, लेकिन शंभू बॉर्डर पर पुलिस की नाकेबंदी के कारण उनका दिल्ली कूच फिलहाल रुक गया।



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