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भोपाल/नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर से सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को धरने से उठाकर अस्पताल पहुंचाने के बाद अब मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और अन्य सिंचाई परियोजनाओं के विरोध में पिछले 15 दिनों से जारी आदिवासी आंदोलन को रविवार सुबह पुलिस कार्रवाई के बाद समाप्त करा दिया गया। पुलिस ने बाराना नदी के किनारे बने प्रदर्शन स्थल को खाली कराया, प्रतीकात्मक चिताओं को हटाया और 14 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे आंदोलनकारी नेता अमित भटनागर को अस्पताल में भर्ती करा दिया। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें बलपूर्वक हटाया गया और महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की की गई। सुबह-सुबह पुलिस और प्रशासन ने की कार्रवाई पुलिस, प्रशासन और डॉक्टरों की संयुक्त टीम छतरपुर जिले के कुपी गांव के पास बाराना नदी के किनारे रविवार तड़के पहुंचे, जहां सैकड़ों आदिवासी पिछले दो सप्ताह से आंदोलन कर रहे थे। पुलिस ने प्रदर्शन स्थल को खाली कराया और वहां बनाए गए अस्थायी ढांचे तथा प्रतीकात्मक चिताओं को हटा दिया। प्रशासन का कहना है कि लगातार बारिश के कारण बाराना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा था। प्रदर्शन स्थल एक निर्माणाधीन पुल के पास था, जहां लोगों की सुरक्षा को खतरा था। इसी वजह से आंदोलनकारियों को वहां से हटाने का फैसला लिया गया। 14 दिन से अनशन पर थे अमित भटनागर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर पिछले 14 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे थे। पुलिस के अनुसार, श्री भटनागर की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलने पर डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंची। स्वास्थ्य जांच के बाद अमित भटनागर को उनकी सहमति से अस्पताल भेजा गया। पूरा अभियान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ और प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन का सहयोग किया। प्रदर्शनकारियों ने लगाए गंभीर आरोप हालांकि प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के दावों को खारिज कर दिया। उनका आरोप है कि पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए उन्हें जबरन हटाया और विरोध कर रही महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की की। सोशल मीडिया पर घटना के कई वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें पुलिसकर्मी महिलाओं को किनारे से खींचते हुए दिखाई दे रहे हैं। कुछ वीडियो में महिलाएं तेज बहाव के बीच एक-दूसरे का हाथ पकड़कर नदी पार करने की कोशिश करती नजर आईं जबकि पुलिस उन्हें बाहर आने के लिए कह रही थी। दो सप्ताह से जारी था अनोखा विरोध प्रदर्शन पन्ना और छतरपुर जिले के कई गांवों के आदिवासी केंद्र सरकार की करीब 44 हजार करोड़ रुपये की केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और राज्य सरकार की अन्य सिंचाई परियोजनाओं का विरोध कर रहे थे। आंदोलन का तरीका भी बेहद अलग था। प्रदर्शनकारी नदी के बीच बने अस्थायी मंचों पर बैठे थे। कई लोगों ने अपने गले में फंदा डाल रखा था और प्रतीकात्मक चिताओं पर लेटकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। उनका नारा था, "न्याय दो, वरना मार दो।" यह आंदोलन पहली बार अप्रैल में शुरू हुआ था। सरकार और ग्रामीणों के बीच बातचीत के बाद इसे स्थगित कर दिया गया था, लेकिन समाधान नहीं निकलने पर इसी महीने इसे फिर से शुरू किया गया। क्या हैं आंदोलनकारियों की मांगें प्रदर्शनकारी सरकार से बेहतर पुनर्वास और मुआवजा पैकेज की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि विस्थापन सर्वे में कई प्रभावित परिवारों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। वे ऐसे सभी लोगों को सूची में शामिल करने और प्रभावित परिवारों के लिए न्यायसंगत पुनर्वास नीति लागू करने की मांग कर रहे हैं।