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पटना। बिहार सरकार ने राज्य के स्टेट हाईवे, बड़े पुलों और अन्य अधिसूचित सड़कों पर चलने वाले वाहनों से टोल टैक्स वसूलने की व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और तकनीक आधारित बनाने के लिए 'पथ उपयोगकर्ता शुल्क (दरों का निर्धारण एवं संग्रहण) नियमावली, 2026' को मंजूरी दे दी है। अब स्टेट हाईवे पर सफर के लिए देना होगा टोल मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) अरविंद कुमार चौधरी ने बुधवार को यहां मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद बताया कि इस आशय के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई है। अगर आप बिहार के स्टेट हाईवे या सरकार द्वारा अधिसूचित किसी बड़े पुल और सड़क परियोजना से गुजरते हैं, तो आने वाले समय में वहां टोल टैक्स की व्यवस्था नए नियमों के तहत संचालित होगी। राज्य सरकार ने कैबिनेट की बैठक में 'पथ उपयोगकर्ता शुल्क (दरों का निर्धारण एवं संग्रहण) नियमावली, 2026' को मंजूरी दे दी है। इसका मकसद सड़कों के रखरखाव, मरम्मत और नई सड़क परियोजनाओं के लिए बेहतर व्यवस्था तैयार करना है। क्या बदलेगा आम लोगों के लिए? नई नियमावली लागू होने के बाद स्टेट हाईवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों को तय नियमों के अनुसार टोल टैक्स देना होगा। सरकार अलग-अलग श्रेणी के वाहनों, जैसे कार, बस, ट्रक और अन्य व्यावसायिक वाहनों के लिए अलग-अलग टोल शुल्क तय करेगी। यानी वाहन के प्रकार के हिसाब से टोल देना होगा। फास्टैग से होगा भुगतान, नहीं लगाने पर जेब होगी ढीली सरकार चाहती है कि टोल प्लाजा पर नकद लेन-देन कम हो और वाहन बिना रुके आगे बढ़ सकें। इसलिए टोल टैक्स का भुगतान फास्टैग और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से किया जाएगा। अगर किसी वाहन पर फास्टैग नहीं होगा, तो उससे सामान्य वाहनों की तुलना में अधिक टोल शुल्क लिया जाएगा। यानी फास्टैग लगवाना वाहन मालिकों के लिए फायदेमंद रहेगा। रोज आने-जाने वालों को मिलेगी राहत जो लोग किसी टोल प्लाजा से रोजाना या बार-बार गुजरते हैं, उनके लिए सरकार ने राहत का भी प्रावधान किया है। ऐसे वाहन चालकों को रियायती पास और मल्टी-ट्रिप (बहु-यात्रा) सुविधा दी जाएगी, जिससे उन्हें हर बार पूरा टोल नहीं चुकाना पड़ेगा। हर साल बदल सकती हैं टोल की दरें सरकार ने नियमावली में यह भी व्यवस्था की है कि टोल टैक्स की दरों की हर वर्ष समीक्षा की जाएगी। जरूरत पड़ने पर शुल्क बढ़ाया या घटाया जा सकेगा। इससे समय और परिस्थितियों के अनुसार टोल दरों में बदलाव संभव होगा। सरकार का मकसद क्या है सरकार का कहना है कि सड़कों, बड़े पुलों और अन्य सड़क परियोजनाओं के निर्माण के साथ-साथ उनके रखरखाव पर लगातार खर्च होता है। नई नियमावली के जरिए टोल वसूली की व्यवस्था को पारदर्शी, आधुनिक और तकनीक आधारित बनाया जाएगा, ताकि सड़कों के रखरखाव के लिए पर्याप्त संसाधन जुटाए जा सकें और लोगों को बेहतर सड़क सुविधाएं मिल सकें। साथ ही टोल संग्रह प्रणाली में निगरानी और जवाबदेही भी बढ़ेगी।