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नई दिल्ली। सोने के भंडार में तेज गिरावट के दबाव में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 26 जून को समाप्त सप्ताह में 5.654 अरब डॉलर घटकर 15 महीने के निचले स्तर 666.933 अरब डॉलर रह गया। भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 26 जून को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 5.654 अरब डॉलर घटकर 666.933 अरब डॉलर पर आ गया। यह गिरावट इसलिए ज्यादा अहम मानी जा रही है क्योंकि इसके बाद देश का फॉरेक्स रिजर्व 15 महीने के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। पिछले हफ्ते तक जहां विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़त देखने को मिली थी, वहीं इस बार तस्वीर पूरी तरह उलट गई। पिछले हफ्ते बढ़ा था रिजर्व, अब अचानक फिसला इससे पहले 19 जून को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 96.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 672.587 अरब डॉलर पर पहुंचा था। यानी एक हफ्ते पहले तक रिजर्व में मजबूती दिख रही थी लेकिन ताजा आंकड़ों ने साफ कर दिया कि विदेशी मुद्रा भंडार में उतार-चढ़ाव अभी भी काफी तेज बना हुआ है। गोल्ड रिजर्व में बड़ी गिरावट ने बढ़ाई चिंता इस बार विदेशी मुद्रा भंडार में आई बड़ी गिरावट की सबसे बड़ी वजह सोने के भंडार में भारी कमी रही। आरबीआई के मुताबिक, स्वर्ण भंडार का मूल्य 5.394 अरब डॉलर घटकर 102.536 अरब डॉलर रह गया। यह 7 नवंबर 2025 के बाद का सबसे निचला स्तर है। साफ है कि इस हफ्ते भारत के कुल फॉरेक्स रिजर्व पर सबसे ज्यादा दबाव गोल्ड रिजर्व से आया। आम तौर पर विदेशी मुद्रा भंडार कई हिस्सों से मिलकर बनता है, लेकिन इस बार सबसे बड़ा झटका सोने के भंडार से लगा है। 15 महीने के लो पर पहुंचा फॉरेक्स रिजर्व ताजा गिरावट के बाद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अब करीब 15 महीने के निचले स्तर पर आ गया है। इससे पहले 28 मार्च 2024 को यह 665.40 अरब डॉलर पर था। यानी मौजूदा स्तर उसी दौर के बेहद करीब पहुंच चुका है। हालांकि यह गिरावट चिंता बढ़ाने वाली जरूर है, लेकिन यह भी सच है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अब भी काफी मजबूत माना जाता है और वैश्विक अस्थिरता या आयात के दबाव से निपटने के लिए यह एक अहम सुरक्षा कवच बना हुआ है। विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में भी दिखी नरमी केवल गोल्ड रिजर्व ही नहीं बल्कि विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (एफसीए) में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई है। आरबीआई के अनुसार, एफसीए 15 करोड़ डॉलर घटकर 541.067 अरब डॉलर रह गया। इसमें सिर्फ अमेरिकी डॉलर ही नहीं बल्कि यूरो, जापानी येन और ब्रिटिश पाउंड जैसी प्रमुख विदेशी मुद्राएं भी शामिल होती हैं। इन मुद्राओं का मूल्यांकन डॉलर के मुकाबले उनकी विनिमय दर के आधार पर किया जाता है, इसलिए वैश्विक करेंसी मूवमेंट का असर भी कुल विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है। आईएमएफ रिजर्व और एसडीआर भी फिसले आरबीआई के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भारत की आरक्षित निधि 2.1 करोड़ डॉलर घटकर 4.772 अरब डॉलर रह गई। वहीं, विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) में भी 8.9 करोड़ डॉलर की गिरावट आई और यह 18.558 अरब डॉलर पर आ गया। यानी कुल मिलाकर विदेशी मुद्रा भंडार के कई हिस्सों में इस हफ्ते कमजोरी देखने को मिली, लेकिन सबसे ज्यादा असर फिर भी गोल्ड रिजर्व की गिरावट का ही रहा। आखिर क्यों अहम है फॉरेक्स रिजर्व विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक मजबूती का बड़ा पैमाना माना जाता है। इसी रिजर्व के दम पर देश आयात का भुगतान करता है, रुपये को सहारा देता है, बाहरी वित्तीय झटकों से मुकाबला करता है और वैश्विक निवेशकों का भरोसा बनाए रखता है । जब विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत रहता है तो यह अर्थव्यवस्था के लिए पॉजिटिव संकेत माना जाता है, लेकिन जब इसमें तेज गिरावट आती है तो बाजार, नीति निर्माताओं और निवेशकों की नजरें इस पर टिक जाती हैं।



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